रात के आठ बज गये थे । आरिफ सांई बाबा के मन्दिर के बाहर खड़ा था। वह अपने आपको बेहद ठगा महसूस कर रहा था। उसे अपनी गाढ़ी कमाई के रूपये यूँ ही चले जाने का अफसोस रह-रहकर हो रहा था। वह दोष भी किसे दे, वह खुद ही इस चक्रव्यूह में फँसा था और मारे शर्म के अपनी यह दुविधा किसी को बता भी नहीं सकता था।
आरिफ की शादी हुए चार साल हो गये है। एक बेटी भी है 3 साल की । पहले गुजारा आराम से हो जाता था लेकिन इन दिनों पैसों की किल्लत हमेशा बनी रहती है। फैक्ट्री के अलावा वह कुछ ऐसे पार्ट-टाइम जॉब की तलाश में था जहाँ से कुछ अतिरिक्त आमदनी हो जाये । कुछ दिनों तक उसने सुबह-सुबह अखबार बाँटने का काम भी किया था, पर उस काम में मेहनत अधिक थी और मेहनताना बहुत कम ।
आरिफ रोजाना फैक्ट्री पर जाने से पहले अखबार जरूर देखता था। खासकर नौकरी वाले विज्ञापन वह ध्यानपूर्वक पढ़ता था । कुछ विज्ञापनों पर उसकी नजर अकसर ठिठक जाती थी, जिनमें लिखा होता था - ’ बेरोजगार युवक मिलें रोजाना 8 से 10 हजार रूपये कमायें, पार्ट टाइम- फुट टाइम जॉब ’ और फिर मो0 नं0 लिखे होते थे । आरिफ उन विज्ञापनों को पढ़कर सोचता, - ’ ऐसा हो सकता है क्या ? एक दिन के 8 हजार यहाँ तो एक महिना के 8 हजार मिलते है। भला, ऐसा कौन सा काम है ये ? सब लोगों को ठगने के धन्धे है। फिर अगले ही पल उसकें विचारों में बदलाव आता-- पर कुछ तो है यार । वरना रोजाना इतने विज्ञापन ऐसे ही थोडी ना छपते ।
उस दिन भी वह उन विज्ञापनों को पढ़ रहा था। दो-तीन विज्ञापनों को पढ़ने के बाद एक विज्ञापन पर उसकी नजर अटक सी गई जिसमें लिखा था - ’ काजल क्लब ’ (रजिस्टर्ड) बेरोजगार युवक मिलें, रोजाना 10 से 15 हजार रूपये कमाये । पार्ट टाइम जॉब के लिए आज ही सम्पर्क करें मो0नं0..................। ’
आरिफ ने उस विज्ञापन को फाड़कर अपनी जेब के हवाले किया और फैक्ट्री के लिए रवाना हो गया । 9 बजे फैक्ट्री में पहुँचकर उसने कपड़े बदले और अपने काम में लग गया । जब उसकी मशीन सुचारू रूप से चालू हो गई तो उसने अपने हैल्पर को मशीन सम्भलाई और जेब से विज्ञापन का वह कागज का पुरजा लेकर फैक्ट्री से लगी हुई एक गली मे आ गया । फिर उसने मोबाइल निकाला और दिये हुये नम्बर डायल कर दिये। उधर से बहुत ही मीठी और संयत स्वर में आवाज आई, ’’ हैलो,’’ हाँ जी बोलिये ......’’
आरिफ ने हकलाते हुए कहा, ’’जी .... जी ....... वो अखबार में मैंने आपका विज्ञापन पढ़ा था । ’’
’’ अच्छा जी कौन बोल रहें है आप ? ’’
’’जी मैं आरिफ बोल रहा हूँ ’’
’’ कहाँ से बोल रहे हैं आप । ’’
’’ जी बोल तो मुँह से ही रहा हूॅ। ’’
’’ अरे आरिफ भाई ! मेरा मतलब है कहाँ रहते हैं और क्या काम करते है ? ’’
’’ जी मैं जयपुर में जलमहल के पास रहता हूँ और कूकस में एक फेक्ट्री में काम करता हूॅ। ’’
और फिर वह बन्दा टेप रिकार्ड की तरह चालू हो गया, ’’ हाँॅ तो, आरिफ भाई आपको हाई प्रोफाइल की बॉडी मसाज करनी होगी और उनके साथ सेक्स करना होगा। हमारी मेम्बरशिप फीस 1100/- रूपये है। महीने में हम आपकी चार-पाँच मीटिंग करवायेंगे और हर मीटिंग के आपको आठ हजार रूपये मिलेगें । इसमें 30 प्रतिशत हमारा कमीशन होगा, जिसे आपको हमारे अकाउण्ट में डलवाना होगा । ’’
आरिफ ने कहा, ’’ लेकिन सर मैं तो यह काम पार्ट टाइम ही कर सकता हूॅँ। ’’
’’ हाँ तो पार्ट टाइम ही तो करना है । बस 2-3 घण्टे की मीटिंग होती है उसके बाद आप फ्री ’’
’’ और ये 1100 रूपये मुझे कहाँ देने होगें । ’’
’’ ये रूपये आपको हमारे अकाउण्ट में डलवाने होगें। अकाउन्ट नम्बर में आपको मैसेज कर दूँगा। अगर आप इस काम के लिए तैयार हो तो मैं आपका डाटा नोट करूॅ।’’
’’ हॉँ सर मैं तैयार हूँॅ। ’’
’’ ठीक है आरिफ भाई । अच्छा यह नम्बर आपका ही है ना ? ’’
’’ हाँॅ सर । ’’
’’ मैं इसे ऐड कर लेता हूँ आप भी हमारा ये नम्बर ऐड कर लेना। और हाँ अब आप अपना डाटा नोट करवायें ।
’’ आपका नाम ’’ ?
’’ आरिफ ’’
’’ उम्र ? ’’
’’ 26 साल ’’
’’ रंग ?
’’ गोरा ’’
’’ हाईट ? ’’
’’ 5 फुट आठ इंच ’’
’’ ठीक है आरिफ भाई मैंने आपका डाटा नोट कर लिया है। अकाउन्ट नम्बर मैं अभी आपके नम्बर पर मैसेज कर देता हूँ। आप अभी तुरन्त 1100 रूपये जमा करवाइये ।’’
आरिफ ने वह मोबाइल नं0 ’ काजल क्लब ’ के नाम से ऐड कर लिया और वापस फैक्ट्री में आकर अपना काम-काज सम्भालने लगा।
थोडी देर बाद ही आरिफ के मोबाइल पर अकाउण्ट नंबर का मैसेज आ गया । वह मैसेज पढ़ ही चुका था कि तुरन्त काजल क्लब की ओर से फोन भी आ गया वही बन्दा था ’’ हॉ तो आरिफ भाई अकाउन्ट नं0 का मैसेज आ गया ना ? ’’ ’’हाँ जी आ गया । ’’ तो आप ऐसा करिये आपके आसपास इस बैक की शाखा होगी उसमें ये 1100 रूपये जमा करवा दीजिये । मैं कल-परसों में ही आपकी एक मीटिंग डन करवाता हूॅ। ’’ ’’ठीक है सर । ’’ कहते हुए आरिफ ने फोन काट दिया । आरिफ ने मालूम किया तो उस बैंक की शाखा कूकस में नही थी, आमेर में थी । उसने फोरमेन से आधे घण्टे की छुट्टी ली और आमेर जाकर उस बैंक की शाखा में काजल क्लब के बताये अकाउन्ट नम्बर में 1100 रूपये जमा करा आया। और फोन करके उनको सूचित भी कर दिया ।
वह फेक्ट्री में आकर पुनः अपने काम में लग गया । उसने सोचा, ’’ मैंने पैसे तो डाल ही दिये अब अगर ये फर्जीवाड़ा होगा तो वह मुझसे बात ही नहीं करेगा ’’ पर ऐसा नहीं हुआ थोड़ी देर बाद ही उसकी स्क्रीन पर नाम उभरा काजल क्लब और घण्टी बजने लगी। उसने फोन अटेण्ड किया, ’’ हॉ सर । ’’
’’ आरिफ भाई .... मैंने चैक कर लिया है। आपके मेम्बरशिप फीस के 1100 रूपये हमारे अकाउण्ट में आ गये हैं। अभी आधे-एक घण्टे बाद मैं आपको दुबारा कॉल करूॅगा मीटिंग के लिए। ’’
’’ ठीक है सर । ’’
पैसे जमा करवाते ही उस एजेण्ट से बात हो गई तो आरिफ भी विश्वास में आ गया आज वह अजीब सी उहापोह की स्थिति में फेक्ट्री में काम कर रहा था । बार-बार काम करते हुए मोबाइल को भी सम्भाले जा रहा था क्योंकि कई बार मशीनों की आवाज में मोबाइल बजता रहता है और आरिफ को पता ही नहीं चलता है।
लगभग 3 बजे उसके मोबाइल की घण्टी बजी और स्क्रीन पर नाम उभरा ’ काजल क्लब ’ । उसने अपने सहायक को मशीन सम्भालने के लिए कहा और फेक्ट्री से लगी हुई गली में आकर बात करने लगा। उधर से आवाज आई, ’’ हाँ तो आरिफ भाई हमने आपकी मिटिंग कल दोपहर 2 से 4 बजे के लिए फाइनल कर दी है। ’’
’’सर आप मीटिंग शाम की रखते ना मैं शाम को 5 बजे तो यहाँ से फ्री होता हूॅ।’’
’’ अरे ! वो आपको केवल 2 घण्टे ही तो निकालने हैं, मैनेज कर लेना। कोई भी बहाना बनाकर निकल जाना । ’’
’’ ठीक है सर । ’’
’’ अच्छा हाँ ! सुबह 10 बजे आप मुझे फोन करना। मैं आपको डाटा नोट करवाऊॅगा।’’
’’ ठीक है सर । ’’
’’ अरे यार ! यह क्या सर सर लगा रखा है । मेरा नाम राजेश है। राजेश ही बोल दिया करो। ’’
’’ ठीक है राजेश जी । ’’ कहते हुए आरिफ ने फोन काट दिया । मोबाइल पर बात कर चुकने तक आरिफ के शरीर में एक अजीब सी झुरझुरी सी होने लगी थी । उसे कतई उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी ये सब हो जायेगा।
सुबह 10 बजते ही आरिफ ने फोन मिलाया तो उधर से राजेश की आवाज आई, ’’आरिफ भाई, बस अभी 5 मिनट में आपको रिटर्न कॉल करता हूँ। आप ऐसा करना एक कागज और पेन तैयार रखना । मैं आपको मैडम का डाटा नोट करवाऊँगा । ’’
’’ ठीक है राजेश जी । ’’
आरिफ ने इस बीच अपने फेक्ट्री वाले कपड़े पहने और मशीन पर काम करने लगा। सही पाँच मिनट बाद ही मोबाइल पर ’ काजल क्लब ’ का नाम उभरा । वह फौरन एक कागज और पेन सम्भालता गली में गया । इस बार किसी अन्य व्यक्ति की आवाज थी।
’’ आरिफ जी मैं राजेश जी का बॉस बोल रहा हूँ। आप कहाँ है अभी ? ’’
’’ जी मैं इण्डस्ट्री एरिया कूकस में एक फेक्ट्री में हूँ। ’’
’’ तो आपकी मिटिंग तो हमने मालवीय नगर की रखी है। ’’
’’ मुझे कितने बजे पहुँचना होगा ? ’’
’’ आप को वहाँ 6 बजे तक पहुँचना हैं । ’’
’’ ठीक है सर मैं पहुँच जाऊँगा। ’’
’’ हाँॅ तो फिर डाटा नोट करो - मैडम का नाम है अंजली । उम्र 24 वर्ष । रंग गेहुॅआ। इनके पास सिफ्ट डिजायर गाड़ी है जिसका नम्बर त्श्र14.4466 हैं। और हाँ, आपका कोड नम्बर त्ण्डण्85 हैं । आपको अपना यह कोड नं0 बैंक में जो रूपये जमा करवाये हैं ना उसकी स्लिप के पीछे लिखकर मैडम को देने है। और देखियें आपको बिल्कुल अप-टू-डेट होकर जाना है, शैविंग वगैरह करके । आप समझ रहे है ना मैं क्या कह रहा हूँॅ ? ’’
’’ हाँ, सर समझ रहा हूँ।’’
’’ हाँ .. आपको बहुत अच्छे ढ़ग से मैनेज करना है। मैडम हमारी पुरानी कस्टमर है। हमें शिकायत का मौका ना मिले । यह मीटिंग सक्सेस रही तो अगली मिटिंग परसों की करवा देगें । इस मीटिंग के मैडम आपको देगी 8 हजार रूपये, उसमें हमारा कमीशन होगा 30 प्रतिशत यानि 2400 रूपये । ये पैसा आपको मैडम नकद ही देगी । लेकिन हमारे कमीशन के 2400 रूपये आपको आज ही 2 बजे से पहले जमा करवाने होगें ।
’’ सर मेरी मीटिंग होगी उसके बाद ही दूँगा ना कमीशन तो। ’’
’’ नहीं ..... नहीं........... आरिफ जी ऐसा नहीं है। ये कमीशन का पैसा तो आपको आज ही जमा करवाना होगा, तभी मीटिंग होगी । ’’
आरिफ उखड़ गया उसने अपने मन में सोचा, ’ सालो ने कर दी ठगी चालू । ’ वह बोला, ’’ ठीक है तो आप मेरी मीटिंग कैंसिल करवा दीजिए । मेरे पास अभी 2400 रू0 नही है और अगर पैसे ही होते तो मैं इस काम में ही क्यों लगता। ’’ कहते हुए आरिफ ने फोन काट दिया और सब कुछ भूलकर अपने काम में लग गया । थोड़ी देर बाद ही उसके फोन पर पुनः कॉल आई। इस बार वही बन्दा राजेश था --
’’ आरिफ भाई क्या हुआ ? ’’
’’ सर वो तो 2400 रू0 जमा करवाने के लिए कह रहे हैं। ’’
’’ तो जमा करवा दो यार । शाम को तो मैडम से आपको रूपये मिल ही जायेगें।’’
’’ मेरे पास अभी है नहीं ’’
’’ अरे यार ! किसी से उधार ले लो । 2400 रू0 की ही तो बात है। देख लो, यह मीटिंग अब केंसिल नहीं हो सकती। ’’
’’ ठीक है सर करता हूँ कुछ । ’’
लंच तक आरिफ गहरे तनाव में रहा । रू0 जमा करवाऊँ या नही और सबसे बडी बात, रू0 लूॅँ किससे । सभी साथी कर्मचारी तो उसी की तरह थे । आखरी सूत्र बस मालिक ही था । वह भी उनके मूड पर निर्भर था कि देंगे या नहीं।
डेढ बजे जैसे-तैसे वह लंच करके उठा ही था कि पुनः उस बन्दे का फोन आ गया।
’’ क्या हुआ आरिफ भाई डेढ़ बज गया ? ’’
’’ सर मैं इन्तजाम में लगा हूँ। ’’
’’ अरे यार ! आप से 2400 रू0 का इन्तजाम नहीं हुआ, जल्दी करो यार ! आपको ये पैसे हर हालात में जमा करवाने होंगे ! अब मीटिंग कैंसिल नहीं हो सकती । ये हमारे क्लब का रूल है। आपके 2400 रू0 के चक्कर में हमारा लाखों का नुकसान हो जायेगा। कैसे भी करके मैनेज कर लो यार ! ’’
’’ ठीक है। करता हूँ कुछ । ’’
उसने झट प्लान बनाया और सीधा मालिक के केबिन में चला गया । उसने मालिक से कहा, ’’ सेठ जी, घर से फोन आया है। मिसेज की तबियत खराब है मुझे अभी ही जाना होगा और 3 हजार रू0 भी चाहिए। ’’ मालिक का मूड ठीक था उसने कहा, ’’ ठीक है जाओ। और हाँ, मशीन पर कौन है ? ’’
’’ रोहित है, उसको मैने समझा दिया है, सारा काम। ’’
’’ ठीक है, ये लो। ’’ कहते हुए मालिक ने 3 हजार रूपये गिनकर दे दिये ।
आरिफ ने रूपये लिये, झटपट कपड़े पहने और फैक्ट्री से बाहर निकलकर फोन लगाया काजल क्लब को ।
उधर से आवाज आई, ’’ हाँॅ आरिफ भाई क्या हुआ ? ’’
’’ सर मैंने इन्तजाम तो कर लिया है लेकिन 2 तो बज गये और आपके इस बैंक की शाखा तो आमेर में है मुझे जाने में ही आधा घण्टा लग जाएगा। ’’
’’ कोई बात नहीं थोड़ा लेट सही बैंक में तो केश 4 बजे तक जमा होता है। आप जमा करवाओ । अभी दो घण्टे हैं आपके पास ।
आरिफ ने फौरन स्टेण्ड से बस पकड़ी और लगभग बीस मिनट में वह आमेर के उस बैंक के बाहर था। उसने झटपट रसीद भरी और 2400 रू0 लेकर लाइन में खड़ा हो गया । उसका नम्बर 10 मिनट में ही आ गया । रू0 जमा होते ही उसने राहत की सांस ली।
वह इत्मीनान से बैंक से बाहर आया और कॉजल क्लब को फोन लगाया, ’’ राजेश जी मैंने रूपये जमा करवा दिये हैं। ’’
’’ ठीक है आरिफ भाई मैं अभी दस मिनट में आपको रिटर्न काल करता हूँ। तब तक आप ऐसा करो इन दोनो बैंक की रसीदों की फोटो कॉपी करवाकर इनके पीछे अपना कोड नं0 डाल लो । ये दोनों रसीदे आपको मैडम को देनी है। ’’
उसने दोनों रसीदों की फोटो कॉपी करवाई, पीछे कोड नं0 डाले और थोडा रिलेक्स होने के लिए एक थड़ी पर आकर चाय पीने लगा। चाय पी चुकने के बाद वह बार बार समय देखता रहा । दस क्या पन्द्रह मिनट गुजर जाने पर भी उधर से फोन नहीं आया। उसे चिन्ता होने लगी । फिर उसने अपनी तरफ से फोन मिला दिया ।
उधर से आवाज आई, ’’ अरे हाँ ......... आरिफ भाई आपका पैमेन्ट आ गया है। बस अभी मैडम से बात करके मैं आपको कॉल करता हूँॅ। ’’
आरिफ ने कहा, ’’ सर, मैंने फैक्ट्री से तो छुट्टी ले ही ली है। आप कहे तो मैं मालवीय नगर में जहाँ आप बताये वहीं पहुँच जाऊँ। वैसे भी मैं बस से जाऊँगा, मेरे को समय तो लगेगा ही । क्योंकि चार तो बज ही गये । ’’ ’’ अरे आप वहीं रहो यार ! हम खुद ही पिक अप कर लेंगे आपको । ’’
’’ ठीक है सर । ’’
आरिफ एक अजीब सी बैचेनी, तड़प और तनाव में इधर से उधर आमेर की सड़क नापता रहा। आधे घण्टे बाद भी उधर से फोन नहीं आया तो आरिफ ने फोन किया ।
’’ क्या हुआ सर, साढ़े चार बज गये । ’’
’’ बस मैं आपको फोन करने ही वाला था । ऐसा करो यहाँ आसपास कोई मेडिकल स्टोर हो तो वहाँ से एक छोटी 50 एम0एल0की ’’ कॉमिनी हर्बल आयल ’’ की बोतल और एक कंडोम का पैकेट ले लो। ’’
’’ ठीक है सर । ’’
आरिफ मेडिकल स्टोर पर गया । उसे कंडोम का पैकेट तो मिल गया लेकिन वह हर्बल ऑयल नहीं मिला । उसने वहाँ के सारे मेडिकल स्टोर छान मारे।
फिर आरिफ ने फोन करके बताया तो राजेश ने कहा कि मैं अभी पता करके बताता हूँ कि यह हर्बल ऑयल कहाँ मिलेगा।
आधा घण्टा गुजर जाने पर भी फोन नहीं आया तो आरिफ ने फोन मिलाया । चार-पाँच बार फोन मिलाने पर भी बात नहीं हो पाई । घण्टी जाती रही लेकिन उधर से फोन अटेन्ड ही नहीं किया गया। आठ-दस कॉल करने के बाद उसने फोन उठाया, ’’ हाँ आरिफ भाई, दरअसल मैं मैडम से ही बात कर रहा था । यार ! ये ऑयल अभी कहीं भी ऐविलेबल नहीं है। ये ऑयल मैडम का खास ऑयल है इसके बिना मीटिंग नही होगी। ’’
आरिफ ने चिन्तित स्वर में कहा, ’’ ये क्या कह रहे है आप ? ’’
’’ अरे घबराओ मत यार ! आपकी मीटिंग में सन्डे को करवा देता हूँ। आज शुक्रवार तो हो ही गया । वैसे भी सन्डे को तो आपकी छुट्टी भी रहती होगी । और हाँ, एक बार सुबह 10 बजे आप मुझे फोन कर लेना । मैं आपको ऑयल कहाँ मिलेगा यह बता दूँगा। आप बिल्कुल टेंशन फ्री रहो यार, हमारे यहाँ धोखेवाली कोई बात नहीं है। ’’
सुबह 10 बजे आरिफ ने फोन किया तो राजेश ने कहा, ’’ अभी दो ही मिनट में बात करता हूँॅ। ’’
थोड़ी देर बाद उसका फोन आया जिसमें ऐसी आवाजें आ रही थी जैसे राजेश तथा बॉस आपस में गुफ्तगूॅँ कर रहे हों। फिर राजेश ने आरिफ से कहा, ’’ आरिफ भाई लाइन पर बने रहो हमारे बॉस बात करेगें । ’’
’’ हाँ करवाईये । ’’
’’ आरिफ जी, ये ऑयल आपको किसी भी मेडिकल स्टोर पर नही मिलेगा । दरअसल जो मैडम ये ऑयल सप्लाई करती है वो सिंगापुर गई हुई है । हमने किसी तरह कुछ बोतलों की व्यवस्था की है। यह बोतल आपके पास पहुँचा दी जायेगी । इसको किस तरह इस्तेमाल करना हैं, वह जो बन्दा बोतल लेकर आयेगा वो समझा देगा । आप ऐसा करिये 1500 रू0 उसी अकाउन्ट में जमा करवा दीजिए । 1450 की बोतल है और 50 रू0 उस बन्दे का पैट्रोल का खर्चा है, जो ऑयल लेकर आयेगा । ’’
आरिफ बिफर गया, ’’ सर ! ये कौनसा हर्बल ऑयल है जो किसी मेडिकल स्टोर पर नहीं मिलता और इतना मॅहगा ऑयल में कैसे ले पाऊँगा ं ’’
’’ अरे ! आरिफ जी आप समझ नहीं रहे । अरे यार ! ऑयल के पूरे पैसे आपको मैडम देगी । यानि कुल आपको साढ़े 9 हजार रूपये मिलेगें । और आप ऑयल लेने में जितनी देर करेगे आपकी मिटिंग उतनी ही लेट होती जायेगी । ’’
आरिफ ने उकता कर फोन बन्द कर दिया । उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे । उसके आगे कुआँ पीछे खाई वाली स्थिति हो गई थी । दो दिन तक उसने कोई फोन नहीं किया और ना ही उधर से कोई फोन आया । तीसरे दिन आरिफ ने फोन किया तो राजेश आरिफ को समझाने लगा, ’’ क्या हुआ आरिफ भाई ? ’’
’’ सर आप तो रोज-रोज नय-नये बहाने बनाकर मुझसे रूपयें ऐंठे जा रहे हो। ’’
’’ यार आप समझ नहीं रहे हो, बिना ऑयल के मीटिंग कैसे होगी ? और ऑयल के पैसे तो मैडम देगी ही फिर क्या प्रॉब्लम है ? मेरी मानों तो आज नहीं तो कल या परसां तक ऑयल के 1500 रू0 जमा करवा दो । मैं तुरन्त ऑयल भिजवा दूँगा और जल्दी ही आपकी मिटिंग भी करवा दूँगा। ’’
आरिफ अजीब धर्म संकट में फँस गया । क्या करे ? या तो 3500 रू0 जो उसने जमा करवाये है उनको भूल जाये या 1500 रू0 और जमा करवाये । अजीब स्थिति थी ना आगे बढ़ते बनता था ना पीछे हटते । दो दिन तक वह असमंजस की स्थिति में झूलता रहा। तीसरे दिन उसके मोबाइल स्क्रीन पर नाम उभरा काजल क्लब उसने फोन अटेन्ड किया, ’’ हाँ, नमस्कार सर । ’’
’’ आरिफ भाई क्या हुआ आज तीसरा दिन हो गया । आज शुक्रवार है। आप आज पैसे डलवा दें और ऑयल ले ले । मैं सन्डे को आपकी मिटिंग डन करवा दूँगा। ’’
’’ ठीक है सर मैं अभी आधे घण्टे में दुबारा कॉल करता हूँ। ’’
’’ अरे कॉल क्या करना है यार । किसी से भी उधार ले लुवाकर ये 1500 रूपये जमा करवा दो । ’’
’’ ठीक है सर ! मै अभी करवाता हूँ। ’’ कहते हुए आरिफ ने फोन काट दिया । संयोग से आज आरिफ के पास 2 हजार रूपये आये थे । उसने 2 महीने पहले अपने एक साथी को उधार दिये थे । आज ही वह रू0 देकर गया था । आरिफ ने थोड़ी देर की छुट्टी ली और बैंक के उसी अकाउन्ट में 1500 रू. जमा करवाकर फोन करके सूचित भी कर दिया । ’’ सर मैंने ऑयल के पैसे डलवा दिये है। ’’ उधर से राजेश ने कहा, ’’ आरिफ भाई मै अभी 5 मिनट में अकाउन्ट चैक करके आपको दुबारा कॉल करता हूँ। ’’ 15 मिनट तक भी फोन नहीं आया तो आरिफ घबरा गया कि लो ये 1500 रू0 भी गये । अब व ना तो फोन करेगा और ना ही फोन उठायेगा ।
वह फैक्ट्री में आ गया और कपड़े बदलकर अपने काम में लग गया । फिर उसने अपनी तरफ से फोन मिला दिया । उधर से वही चिर-परिचित आवाज आई, ’’ हाँ आरिफ भाई आपके रू0 अकाउन्ट में आ गये हैं। आप फैक्ट्री में कितने बजे तक है ? ’’
’’ जी शाम 6 बजे तक हूँ। ’’
’’ ठीक है शाम 6 बजे तक बन्दा आपके पास ऑयल ले आयेगा । वह कूकस स्टेण्ड आकर फोन कर लेगा मैंने उसको आपके नं0 दे दिये है। ऑयल लेने के बाद आप उससे मेरी एक बार बात जरूर करवा देना । ’’
’’ ठीक है सर । ’’
शाम के 6 बजे तक ना ऑयल लेकर कोई आया और ना ही इस बाबत कॉजल क्लब की ओर से कोई फोन आया । फैक्ट्री से छुट्टी करके जाते समय आरिफ ने शाम को 6.30 बजे फोन मिलाया तो उधर से बिजी टोन की आवाज आई । शनिवार को भी उसने कई बार फोन किया लेकिन उधर से कॉल रिसीव ही नहीं की गई । और फिर रविवार की दोपहर को आरिफ के मोबाइल पर मैसेज आया - ’ आरिफ भाई, आपकी मिटिंग आज नहीं हो सकेगी । हमारे यहाँ पुलिस को प्रॉब्लम हो गया है। आप हमारे कॉल का वेट करें और आयल भी आपको आज नहीं मिलेगा। ’
इस मैसेज के बाद आरिफ घबरा गया कि साला पुलिस का लफड़ा हो गया। कहीं मैं भी फँस ना जाऊँ । उसने मैसेज को दो-तीन बार पढ़ा तो उसके दिमाग की बत्ती जली। हो न हो अब ये साले मुझे बेवकूफ बना रहे हैं। सोचा होगा कि मैं घबरा कर खुद ही पीछे हट जाऊँगा । पर मैं सब समझता हूँ इनकी चाल ।
दो-तीन दिन तक तो वह उनके कॉल का इन्तजार करता रहा । फिर एक दिन उसने खुद ही अपनी ओर से फोन मिला दिया । चार-पाँच बार फोन मिलाने पर भी उसकी बात नहीं हो पाई । फिर उसने अपने किसी साथी कर्मचारी के फोन से नं0 मिलाया तो फोन उठा लिया गया । आरिफ ने कहा, ’’ हाँ सर, मैं आरिफ बोल रहा हूँ। आपने तो मेरा फोन उठाना ही बन्द कर दिया । ’’
उधर से राजेश की आवाज आई, ’’ आरिफ भाई आप समझ नहीं रहे। हमारे यहाँ पुलिस का प्रॉब्लम हो जाने के कारण बहुत सी मिटिंगों को कैंसिल करना पड़ा । आपका फोन आता रहता था लेकिन हम क्या जवाब देते इसलिए नहीं उठाते थे । ’’
’’ तो अब क्या करूँ मैं ? मैंने तो बहुत सा पैसा आपको दे दिया । सीधे-सीधे 5 हजार रूपये के नीचे आ गया । 8 हजार रूपये मेरी कुल तनख्वाह है। अच्छा बेवकूफ बनाया आपने ’’
’’ आरिफ भाई समझने की कोशिश करो’’ । आपकी मिटिंग तय है और वो होगी, पर थोड़ा समय तो दो हमें । आप नहीं जानते हम किस परेशानी से गुजर रहे हैं। दो-तीन दिन में स्थिति सम्भलते ही हम आपकी मिटिंग करवा देगें । ’’
’’ ठीक है सर । ’’ कहते हुए आरिफ ने फोन काट दिया । आरिफ ने शुरू से लेकर अभी तक की घटनाओ का आकलन किया तो उसके समझ में यही बात आई कि ये सब बेवकूफ बनाने के हथकण्डे हैं। लेकिन मन के एक कोने से यह आवाज भी आती रही कि पुलिस वाली बात सच भी हो सकती है । दो-तीन दिन और इन्तजार सही फिर इसके अलावा और चारा भी क्या है।
तीन दिन गुजर जाने के बाद भी उधर से फोन नहीं आया तो आरिफ ने फोन मिला दिया । इस बार पहली ही बार में उसकी कॉल को रिसिव कर लिया गया । वही चिर-परिचित राजेश की आवाज थी, ’’ हाँ आरिफ भाई, नमस्कार ! बस अभी बॉस से बात करके मैं आपको दुबारा कॉल करता हूॅ। ’’
कहते हुए उधर से फोन काट दिया गया ।
आरिफ इंतजार करता रहा । लगभग 15 मिनट बाद उधर से फोन आया । बॉस की आवाज थी, ’’ आरिफ जी आप आज मिटिंग कर लेंगे क्या ? ’’
’’ हाँ सर कर लूँगा, टाइम क्या रहेगा ? ’’
’’ टाइम रहेगा शाम 4 से रात 9 बजे तक । ये पाँच घण्टे आपको मैडम के साथ ही गुजारने हैं। मैडम आपके उधर ही कूकस से आगे दिल्ली रोड़ के एक होटल में रूकेगी। आपका ऑयल भी हम वहीं पहुँचा देगें । और हाँ, रात का डिनर भी आपका मैडम के साथ ही होगा । ये मैडम आपको देगी 15 हजार रूपये प्लस ऑयल का पैसा । आपके पिछली मिटिंग के कमीशन के 2400 रूपये जमा है। वो मिटिंग 8 हजार की थी और ये 15 हजार की है। इसका 30 प्रतिशत हुआ 4500 रूपये यानि बाकी के 2100 रू0 आपको हमारे अकाउन्ट में जमा करवाने होगें । ’’
पैसा जमा करवाने की बात सुनते ही आरिफ भड़क गया, ’’ आप तो रोज रोज नये-नये बहाने बनाकर पैसे ऐंठे जा रहे है। मेरे पास अब और पैसा नहीं है। ’’
’’ अरे आप पूरी बात तो सुनो आरिफ जी । ’’
’’ हाँ..... बोलिये । ’’
’’ देखिये आपका मिटिंग क्यों नही हुआ वो मैं बता देता हूँ। जब से यह पुलिस वाला मैटर हुआ है ना तो उसके बाद से पुलिस को हफ्ता सिस्टम बढ़ाकर देना पड़ रहा है। हम लोगों ने इसमें यह नियम सैट किया कि भैया छोटी मीटिंग कुछ समय के लिए रोक दी जाये और बड़ी मीटिंग ली जाये । ताकि पुलिस वालों को हफ्ता दिया जा सके और दो पैसा हमको भी बचे । तो आपके लिये ये 2100 रू0 कोई माई-बाप नहीं है। आपको ये टारगेट देखना है कि अपन को 15 हजार प्लस ऑयल का पैसा मिल रहा है और ऐसा मीटिंग मिल रहा है, जिसके लिए मेरे यहाँ लाइन लगता है। ये मीटिंग आप कर लोगें ना आरिफ जी तो मैं दावा करता हूँ कि आप खुद ही फोन करके मुझे कहोगे कि सर ये मैडम जब भी आये तो मुझे ही देना मीटिंग ।
ऐसी गोरी-चिट्टी, हँसमुख और लालचट मैडम है कि देखते ही पागल हो जाओगें। और पूरा जैसे अंग्रेज लोग करते है ना वैसे ही सेक्स करती है। आपको इतना आनन्द .... आनन्द क्या .... समझो आप जन्नत मे जाओगे । मेरा जो बन्दा गया था ना पिछली बार उसने कहा था कि जब भी मैडम आये मुझे ही देना मिटिंग । मैं उसको ही भेजता लेकिन आपका एक भी मीटिंग नही हुआ इसलिए आपको दे रहा हूँ ताकि आपका भी श्री गणेश हो जाये। सही कह रहा हूँ आपका जब फोन आता है ना तो हम लोग झिझकते है, फोन उठाने में कि यार ’ आरिफ जी का मीटिंग नही हुआ। ’
आरिफ ने कहा, ’’ लेकिन सर ये पैसे की व्यवस्था आज कैसे हो पायेगी ? ’’
’’ नहीं आरिफ जी ये व्यवस्था तो आपको आज ही 2 बजे तक करनी होगी तब ही 4 बजे की मीटिंग डन होगी । ’’
’’ तो फिर रहने दीजिए । मेरे लिए तो आप कोई छोटी मीटिंग ही कर देना। अब मैं और पैसा नहीं कर पाऊँगा। ’’
’’ देखिये आरिफ जी छोटा मीटिंग मैं आपको बताऊँ 15 दिन भी लग जाये, महीना भी लग जाये। ’’
’’ कोई बात नहीं तो और अब मैं क्या करूँ ? ’’
’’ अरे सुनो ! मैं क्या कह रहा हूँ ? आप मेरी बात को समझ ही नहीं रहे हो ! मैं कहता हूँ कि आपके पास नहीं है तो किसी से उधार ले लो जिससे लेते हो । कहना भैया कल मार्निग में वापस कर दूँगा। मैं कहता हूॅ कि अपनी किस्मत को ठोकर मारोगे अगर यह मीटिंग नही करोगे तो । ये मैडम वो है जो पिछली बार आई थी ना तो 5100 रू0 तो ऐसे ही दे गई थी लड़के को इनाम के तौर पर । मैं कहता हूँ ये अगर खुश हो गई ना तो 5-7 हजार तो ऐसे ही दे जायेगी । इसीलिए मैं इतना जोर दे रहा हूँ। ’’
’’ ठीक है सर । मैं व्यवस्था करता हूँ। ’’
’’ हाँ यह हुई ना मर्दोवाली बात । आरिफ जी मैं कहता हूँ इस मीटिंग के बाद आपकी किस्मत चमक जायेगी। ’’
आरिफ ने पूछा, ’’ पैसा अकाउन्ट में ही डलवाना है ना ? ’’
’’ हाँ..... हाँ .....उसी अकाउन्ट में डलवाना है .... नं0 तो है ही आपके पास । ’’
’’ हाँ वो तो है। ’’
’’ ठीक है तो आज 2 बजे तक पैसा जमा करवाते ही हम आपकी 4 से 9 बजे की मीटिंग फाइनल कर देगें । ’’ और ऑयल भी आपको भिजवा दिया जायेगा। ’’
’’ ठीक है सर । ’’ कहते हुए आरिफ ने फोन काट दिया ।
अब 2100 रू0 का इंतजाम भी आरिफ के लिए बहुत भारी था । किसी तरह जोड़-तोड़ बिठाकर उसने 2 बजे तक 2100 रू0 का इन्तजाम कर लिया । उसने फोरमेन से आधे घण्टे की छुट्टी ली और अपने साथी कर्मचारी की गाड़ी लेकर तुरन्त आमेर वाली शाखा में वे रूपये जमा भी करवा आया । इस बार रूपये जमा करवाने के पाँच मिनट बाद ही उसके पास काजल क्लब की ओर से फोन आ गया । वही बन्दा राजेश था -
’’ आरिफ भाई, आपके 2100 रू0 हमारे अकाउन्ट में आ गये है। अभी आप कूकस में ही है ना ’’
’’ जी हाँ मैं फैक्ट्री में ही हूँ। ’’
’’ ठीक है तो, अभी टाईम हुआ है 2.30 । आपको सही 4 बजे तैयार होकर । शेव वगैरह बनाकर, बिल्कुल अपडेट होकर कूकस के सांई बाबा के मन्दिर के बाहर खड़े हो जाना है। 4 बजे वह ऑयल वाला बन्दा आपके पास आ जायेगा । हमने उसको आपका नं0 दे दिया है। आप वह ऑयल ले लेना और कैसे इस्तेमाल करना है यह भी समझ लेना। और एक कंडोम का पैकेट भी रख लेना ।
’’ ठीक है सर । ’’
’’ और हाँ, 4 से 4.30 के बीच में मैडम आपको वहीं से अपने साथ ले जायेगी । हमने आपके नं0 उनको दे दिये है और आपका डाटा भी नोट करवा दिया है। ’’
’’ ठीक है सर मैं समय से पहुँच जाऊँगा । ’’ कहते हुए उसने बात खत्म की ।
आरिफ ने जल्दी से अपना काम निपटाया और शेष बचा काम अपने हेल्परों को संभलाकर फोरमेन से छुट्टी माँगने चला गया । उसने फोरमेन से कहा,
’’ पप्पू जी मुझे अभी ही जाना है। ’’
’’ फोरमेन ने कहा, ’’ क्यों भाई ? ’’
’’ जी कोई जरूरी काम है। ’’
’’ क्या जरूरी काम आ गया ? चक्कर क्या है तेरा ? इन दिनों तू खूब गोल होने लगा है। ’’
’’ पप्पू जी किसी से पैसे लेने है। उसने 3.30 बजे का टाइम दिया है। बस आज-आज की ही बात है। ’’
’’ ठीक है ..... ठीक है.......। हाँ, मशीन पर कौन है ? ’’
’’ रोहित और कालू है मैने उनको समझा दिया है। ’’
’’ चल ठीक है ........ जा । ’’
आरिफ ने जल्दी से हाथ पैर धोये और तुरन्त कपड़े पहन कर फैक्ट्री से बाहर आ गया । अभी 3.15 हुये थे । कूकस स्टेण्ड पर आकर उसने बढ़िया वाली शेव बनवाई। फिर मेडिकल स्टोर से एक कंडोम का पैकेट लेकर अपनी जेब में रखा । और सही 3.30 बजे वह सांई बाबा के मन्दिर के बाहर खड़ा हो गया ।
4 बजे तक का तो उसे समय दिया ही गया था । इसलिए 4 बजे तक वह धैर्यपूर्वक इन्तजार करता रहा । कभी मन्दिर के बाहर पड़ी सीमेन्ट की बैंच पर बैठ जाता और कभी सड़क के किनारे खड़ा होकर जयपुर से आ रही गाड़ियों को निहारने लगता। लेकिन 4 बज चुकने के बाद उसकी बैचेनी बढ़ने लगी । 4 बजकर पॉँच मिनट होते ही उसने काजल क्लब को फोन लगाया ,
’’ हाँ सर ........ मै यहाँ सांई बाबा के मन्दिर के बाहर खड़ा हूॅ । चार-पाँच हो गये लेकिन आपका वो ऑयल वाला अभी तक नहीं आया । ’’
’’ बस आरिफ भाई .... अभी पाँच दस मिनट में पहुँचने ही वाला है । आप बेफिक्र रहे। ’’
और सही 4.15 पर एक लड़का वहाँ बाईक लेकर आया । उसने मन्दिर के बाहर आकर बाइक रोकी और अपने मोबाईल से नं0 डॉयल करने लगा । आरिफ उस लड़के की तरफ ही देख रहा था कि उसके मोबाइल की घण्टी बजी । आरिफ फौरन समझ गया और उस लड़के के पास जाकर खड़ा हो गया । लडके ने पूछा, ’’ आप ही है आरिफ भाई ?
’’ हॉँ । ’’ आरिफ ने सिर हिलाते हुए कहा ।
लड़के ने अपने बैग में से एक 50 एम0एल0 की छोटी सी नवरत्न तेल जैसी शीशी निकाली और आरिफ को पकड़ा दी । आरिफ ने शीशी को अपनी जेब में रख लिया । फिर वह लड़का आरिफ को समझाने लगा, ’’ सर ....... आप इसकी सील अभी मत तोडना। मैडम के सामने ही इसे खोलना । ’’
’’ ठीक है। ’’ आरिफ ने कहा ।
’’ और इसको कैसे इस्तेमाल करना है वह भी समझ लीजिए । ’’
’’ हाँ समझाओ । ’’
देखिये ......... ’’ कहते हुए लड़के ने हाथ के इशारे से समझाया ।
’’ इस तरह एक दो बूँद अपनी हथेली पर डालना फिर दोनो हथेलियों को मसलना और मैडम के पूरे शरीर पर आराम से धीरे-धीरे मालिश करना । और एक बार में दो-तीन बूँद से ज्यादा ऑयल मत लेना । ठीक है ? समझ गये ना ? ’’
’’ हाँ समझ गया । ’’ आरिफ ने हामी भरी ।
लड़के ने अपने मोबाइल से नम्बर मिलाया और बात करने लगा, ’’ हाँॅ ... राजेश जी मैने इनको ऑयल दे दिया है और पूरा समझा भी दिया है। ’’
फिर उस लड़के ने मोबाइल आरिफ को पकड़ाते हुए कहा,
’’ हाँॅ ........ लो ......... बात करो । ’’
’’ हॉँ सर । ’’ आरिफ ने कहा ।
उधर से वही आवाज थी -- ’’ आरिफ भाई ....ऑयल को कैसे इस्तेमाल करना है आपने ठीक से समझ लिया ना ? ’’
’’ हाँ राजेश जी । ’’
’’ ठीक है तो फिर ........ बस अभी 10-15 मिनट में मैडम भी पहुँचने ही वाली है। बेस्ट ऑफ लक ........ मजे करो । ’’ कहने के साथ ही फोन कट गया । आरिफ ने मोबाइल लड़के को पकड़ा दिया । लड़के ने झटपट अपनी बाइक स्टार्ट की और रवाना हो गया ।
ऑयल आ गया और काजल क्लब वालों से बात भी हो गई तो आरिफ को यकीन हो गया कि आज तो मीटिंग हो ही जायेगी । वह मन ही मन आने वाले पैसां का हिसाब लगाने लगा - ’ 15 हजार मैडम देगी मीटिंग के 1500 ऑयल के अलग से देगी यानि 16500/- रू0 । और अगर साढे 3 हजार भी इनाम के तौर पर देती है तो टोटल हो गये बीस हजार । इनमें से मुझे वापस किसको देने है। 3 हजार तो मालिक को जो मैने एडवांस लिये है और ........... हाँं कमीशन के तो मैने दे ही दिये ........ और बस हजार दो हजार और देने है। यानि मेरे पास 15 हजार रूपये तो बचेगे ही । ’
फिर उसने जेब से मोबाइल निकालकर समय देखा 4.40 हो गये थे । एक बार उसकी इच्छा हुई कि सामने थड़ी पर जाकर चाय पी आये । फिर उसने अपनी इस इच्छा को यही सोचकर त्याग दिया कि इस बीच अगर मैडम आ गई और ........... नहीं... नही अब क्या चाय पीना । अब तो जाने मैं क्या-क्या पीऊंगा । बस थोड़ी देर की ही तो बात है और उसके कानों में सुबह वाली वे बाते जो काजल क्लब के बास ने कही थी संगीत की तरह थिरकने लगी ....... ’’ ऐसी गौरी चिट्टी मैडम है कि देखते ही पागल हो जाओगे ..... पाँच-सात हजार तो ऐसे ही इनाम में दे जाती है ............ मै कहता हूॅ कि आप जन्नत में जाओगे ... और डीनर भी आपका मैडम के साथ ही होगा ।’’
इसी तरह ख्वाबो ख्यालों में बीस मिनट और गुजर गये । आरिफ ने मोबाइल निकाला । वह कॉजल क्लब का नं0 डायल करने ही वाला था कि सामने से एक मँहगी विदेशी कार में एक खूबसूरत गोरी जवान औरत आती दिखी । वह बिल्कुल सड़क के किनारे पर आ गया । उसे लगा कि शायद यही है वो मैडम .......... बस अब ये गाड़ी साईड में लगाकर मुझे फोन करेगी । लेकिन यह क्या ? वह तो हवा के तेज झोंके की तरह उसके सामने से निकल गई। और आरिफ देखता ही रह गया । फिर उसने समय देखा 5.15 हो गये थे । उसने काजल क्लब को फोन किया। बहुत देर तक घन्टी जाती रही लेकिन फोन अटेन्ड ही नहीं किया गया । उसने अपने मन मे कहा, ’ जाने सालो ने कितना लम्बा-चौड़ा कारोबार फैला रखा है कि फोन सुनने की भी फुरसत नहीं है। ’ तभी उसके बिल्कुल पास एक कार आकर रूकी । कार में दो ही लोग थे। एक महिला और एक पुरूष । पुरूष कार चला रहा था और महिला उसके पास वाली सीट पर बैठी थी । महिला ने आरिफ को इशारे से अपने पास बुलाया । आरिफ झटपट गया। इन कुछ ही पलों में उसके दिल की घड़कन बढ़ गई । जब वह महिला से मुखातिब हुआ तो महिला ने पूछा, ’’ ये दिल्ली रोड ही है ना ? ’’ आरिफको झटका सा लगा। वह थोड़ा सम्भलते हुए बोला, ’’ हाँ जी दिल्ली रोड़ ही है। वैसे आपको जाना कहॉ है ? ’’
तभी पुरूष बोला, ’’ दिल्ली ही जाना है। ’’
’’ ठीक है ... ठीक है। ’’ कहते हुए आरिफ पीछे हट गया ।
महिला ने थैक्स कहा और गाड़ी सरपट दौड़ती हुई आँखों से ओझल हो गई। आरिफ ने अपने मन में कहा, ’’ धत तेरे की। ’’ उसने मोबाइल निकाला और काजल क्लब को मिलाया । इस बार उधर से आवाज आई, आप जिस नं. पर कॉल कर रहे है ... वह अभी स्वीच आफ है। कृपया कुछ समय बाद कोशिश करें । आरिफ ने समय देखा - 6 बज गये थे । वह बैचेनी और तनाव की छटपटाहट से गुजरने लगा। वह बार बार मोबाइल में समय देखता और हर एक-दो मिनट में फोन मिलाता और उधर से वही स्विच ऑफ की आवाज आती ।
अब तो बार-बार फोन करते-करते उसकी ऊँगलियाँ भी थकने लगी थी । हर बार एक आशा जागती कि अबकी बार बात हो जायेगी, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती। पूरा एक घन्टा इसी तरह घबराहट और बैचेनी के आलम में गुजर गया। जब वह वहाँ खड़े-खड़े उकता गया तो उसने सामने थड़ी पर जाकर चाय पीने की सोची । और वह सड़क पार करके चाय की थड़ी पर आ गया । तभी उसके मोबाइल की घन्टी बजी। उसने झट से हरा वाला बटन दबाया, तभी स्क्रीन पर नजर पड़ी ’ होम ’ उसने फोन अटेन्ड किया, ’’ हाँ बोलो । ’’ ’’ क्या हुआ आज तो बहुत देर करदी । ’’
उसने जल्दी से बहाना बनाते हुए पत्नी को जवाब दिया, ’’ अरे वो क्या है .... आज फैक्ट्री में कोई अरजेन्ट काम आ गया है और आज ही पूरा करके देना है। मुझे रात के 10-11 बज सकते है। ठीक है ना । ’’ कहते हुए उसने फोन काट दिया।
उसने चाय वाले को चाय के लिए कहा तो चेहरे से तनाव भी झलकने लगा था। चाय तैयार ही थी, चाय वाले ने झट से गिलास में डालकर उसे पकड़ा दी । वह चाय पीने लगा । नजरें अभी भी उसकी सामने वाली सड़क और सांई बाबा के मन्दिर के बाहर ही एकटक जमी हुई थी । उसने जल्दी से चाय समाप्त की और चाय के पैसे देकर फिर सड़क पार करके वहीं आकर खड़ा हो गया । समय देखा... 7.30 हो गये थे । शाम रात मे ढ़लने लगी थी । वह मन्दिर के बाहर पड़ी सीमेंट की कुर्सी पर बैठ गया । मोबाइल निकालकर उसने फिर काजल क्लब को मिलाया लेकिन उधर से स्वीच ऑफ की ही सूचना मिली।
यहाँ तक कि उसे वहाँ बैठे- बैठे आठ बज गये । पर ना तो मैडम आई ना उसका कोई फोन आया और ना ही काजल क्लब वालों को फोन लगा । उसने 8.30 बजे तक इंतजार किया । फिर वह उठा और बेहद थके कदमों से चलता हुआ सड़क पार करके उसी थड़ी के पास आकर खड़ा हो गया । अब उसे अपनी मिटिंग की बिल्कुल भी आशा नहीं थी । वह समझ चुका था कि वह खूब अच्छी तरह ठगा गया है। कूकस से जयपुर आने वाली बस इधर से 8.30 बजे चलती है, बस आने ही वाली थी । वह बस का इन्तजार करने लगा ।
वहीं खड़े-खडे उसने अपने-आपको एक जोरदार गाली दी और कहा, ’ लालच..... हाँ लालच । ये साला लालच ही ले डूबता है आदमी को । उसे बेहद गुस्सा आया अपने आप पर और उन काजल क्लब वालों पर भी जिन्होंने खूब जमकर काजल लगाया था उसको। और .......... और अखबार वालों पर भी जो ऐसे फर्जी लोगों के विज्ञापन छाप देते हैं तथा ’ पाठक अपने विवेक से कोन करे ’ इतनी सी लाइन साईड में डालकर अपने दायित्व से मुक्ति पा लेते है। वरना क्या उन्हें इनकी शिकायतें नही आती होगी ? फिर भी ऐसे विज्ञापनों को छापते रहते है। ’
आरिफ यह सब सोच ही रहा था कि बस आ गई । बस बिल्कुल खाली थी, कुल दो-चार ही सवारियाँ थी । वह खिड़की के पास वाली सीट पर जाकर बैठ गया । उसने एक बार फिर काजल क्लब को फोन लगाया । पर उधर से स्वीच ऑफ की ही आवाज आई। उसने काजल क्लब वालों को गाली देते हुए कहा, ’’ मादर ... ठग, बहुत जल्दी अपनी दुकान समेटकर भाग गये । फिर उसे लगा कि जैसे उसका सिर दर्द से फटा जा रहा है । वह दोनों हाथों से अपना सिर दबाने लगा । वह अपने आपको संयत करने की भरपूर कोशिश कर रहा था पर संयत नहीं हो पा रहा था। उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके सिर के दोनों ओर की नसों में खून बहुत तेजी से तड़-तड़ कर रहा है। उसे रह-रहकर काजल क्लब वालों की कही बातें याद आ रही था और उसके मुँह से उनके लिए अस्फुट स्वर में गालियों की बौछारें हो रही थी ।
उसे बार-बार अपनी गाढ़ी कमाई के 7 हजार रूपये यूँ ही चले जाने का बेहद अफसोस हो रहा था। तभी उसे अपनी फूली हुई जेबों का ध्यान आया । जिसमें एक ओर वह ऑयल की बोतल और एक ओर वह पैकेट पड़ा था । उसने जेब से ऑयल की बोतल बाहर निकाली और बस की खिड़की से हाथ बाहर करके पूरी ताकत से उसे दूर फेंक दिया । फिर इसी तरह उसने वह पैकेट भी फेंक दिया । इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ । वह क्रोध से कसमसा तो रहा था पर अपने आपको बहुत असहाय भी पा रहा था। तभी उसे ख्याल आया कि चलो मैं तो बेरोजगार नही हूँ। 2-3 महीनों में अपने इस घाटे से उबर ही जाऊँगा लेकिन जो बेरोजगार युवक इधर-उधर से पैसों का जुगाड़ करके इनके चंगुल में फँसते हैं उनकी क्या स्थिति होती होगी ?
यही सब सोचते-सोचते उसने गर्दन नीची की तो आँखों से आँसुओं की गर्म गर्म बूँदें टपकने लगी । थोड़ी देर वह ऐसे ही बैठा रहा फिर उसने गर्दन उठाकर बाहर झांका। आँसूओं से भरी आँखों के कारण उसे धुँधलापन लगा । आमेर आ गया था। दूर पहाड़ों पर अंधेरा पसरा था लेकिन आमेर का महल रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था । उसने अपने आँसू पोछे और गुजरे हुए घटनाक्रम को भूलने का प्रयास करने लगा । पर क्या यह इतना आसान था ?






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