कब तक चलेगा यह सब ?

"एक घंटे से बाथरूम में हो तुम निशा.. कर क्या रही हो?" माँ ने चिल्लाते हुए कहा। रोहित का मन रखने के लिए निशा स्कर्ट पहनने को राजी हुई थी, जो रोहित ने उसको खरीद कर दिया था। लेकिन पहनती कैसे, कभी भी उसने पैरो में वैक्सिंग नहीं करवाई थी। रोहित निशा कॉलेज के फाइनल यर में थे। दोनों का साथ चार साल का था। रोहित खुले खयालात वाला था जबकि निशा माता-पिता के पुराने ख़यालात के बोझों तले दबी हुई थी, वो सबकुछ करना चाहती थी लेकिन उसे कभी किसी के लिए इजाजत नहीं मिलती। आज निशा ने रेजर से पैरो में शेव किया था पहली बार और उसी चक्कर में उसको देर हो गई। उसने भी पहली बार खुद के गोरे रंग को देखा था।

"माँ, आज मुझे आने में देर हो जाएगी, नीता की बहन को मेहँदी रखने जाना है। " एक और जूठ बोलकर निशा बैग और दुपट्टा उठाकर घर से निकल गई। आज दोनों कॉलेज की जगह सीधे अभ्यर्थी मॉल में मिले। जैसा पहले से तय था निशाने सलवार कमीज बदलकर स्कर्ट और टॉप पहन लिए और फिर दोनों रोहित की बाइक पर बैठ कुछ साठ किलोमीटर शहर से दूर एक फार्महाउस पर आए थे। निशा बहुत खुश थी और खुद के खूबसूरत सफ़ेद पैरों पर रह रहकर इतरा रही थी। रोहित की आँखे कुछ भी और देखने को तैयार ही नहीं थी। रोहित के चाचा का फार्महाउस था। "अच्छा चलो अपनी आँखे बंद करो मिस." रोहित ने अपनी बैग में से कुछ निकलते हुए कहा। निशा आँखे बंद कर सोफे पर बैठी हुई थी तभी उसके पैरों ने रोहित का स्पर्श महसूस किया। वो सहम गई और जल्द से आँखे खोल दी। उसके पैरो में बंधी पायल देख वह रोहित के गले लग गई। रोहित ने उसको बखूबी अपने हाथों में उठा लिया और दोनों कई पलों तक एक दूसरे में खो गए। अचानक से दरवाजे की घंटी बजी। रोहित निशा को बेफिक्र रहने का कहकर बाहर आया। दरवाजा खोलते ही जाने उसके सर पर दस किलो का पथ्थर किसीने मार दिया हो वैसा लगा। निशा का देहाती भाई गाली गलोच करता हुआ निशा के पास आ पहुँचा। इन सबसे अनजान निशा रोहित की दी हुई पायलों को निहार रही थी। उसके भाई को देखते ही निशा के होश उड़ गए। निशा को चोटी के बल घसीटता हुआ वो रोहित के पास ले आया। " साली, कॉलेज जाने के नाम पर इस मक्कार के साथ गुलछरिया उड़ा रही है। आज तो तू जान से मरेगी। इतना पिटवाउंगा की टाँगे जनमभर दर्द करती रहेगी। कमबख्त कहीं की " निशा ने देखा की रोहित बेहोश पड़ा हुआ था और उसके सर से खून बह रहा था। वो चिल्लाई,रोयी बहुत छटपटाई लेकिन उसके भाई के सामने उसकी एक न चली। रोहित को वैसी हालत में छोड़कर उसको जाना पड़ा। उसने अपनी एक दोस्त को तुरंत मेसेज कर दिया और रोहित के बारे में बताया।

निशा को अंदाज था की अब उसके साथ क्या होनेवाला है। यह हादसे के पांचवे दिन निशा का घर सजा हुआ था और शहनाइयां बज रही थी। रोहित को किसी ने भागते हुए यह खबर दी। रोहित हजार बार निशा को फोन मिला चूका था लेकिन स्विच्ड ऑफ ही आ रहा था। वह भागता हुआ निशा के घर पहुँचा अपने दो दोस्तों के साथ, और बहुत कोशिश करी निशा के पापा से बात करने की लेकिन निशा के पापा ने उसकी अर्जियों का जवाब लातों से दिया। मार पिट के बाद रोहित फिर से एकबार अस्पताल पहुँच गया। यहाँ निशा की शादी हो गई। निशा ने अपनी खास सहेली पूजा को बताया था की उसका ससुराल पालनपुर में है। अगले शनिवार को वह रोहित का इन्तजार करेगी पालनपुर बस डिपो पर। पगफेरों के लिए निशा पालनपुर से शनिवार को निकलने वाली थी। निशा का कसाई जैसा भाई ही उसको लेने आया था। बस डिपो पर बाथरूम जाने के बहाने निशा रोहित के साथ वहां से भाग निकली।

कुछ दिनों तक दोनों भागते फिरे। बीस से ज्यादा होटल्स बदल चुके थे। रात दिन डर लगा रहता था दोनों को। करीब तीन महीने बाद दोनों दिल्ली आ गए रोहित के दोस्त के यहाँ। यहाँ निशा के घर वालों ने जमीं आसमान एक कर दिया था। चप्पा चप्पा छान मारा। देखते हो दोनों को ठार कर देने के लब्ज़ निकल चुके थे। निशा यह सब जानती थी और इसीलिए वह दोनों सतर्क थे।

एक सुबह धड़ दहाड़ा करते निशा के घरवाले रोहित के दोस्त के यहाँ आ पहुंचे। बाहर से ही गोली बारूद बरसना शुरू हो गया था। रोहित का दोस्त वह घर खाली करके वहां से निकल लिया था। निशा और रोहित करीब एक हफ्ते पहले अमेरिका जाने के लिए निकल चुके थे।

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