रवि को बचपन से ही लिखने का शौक था ! कालेज की मैगज़ीन में हर साल उसकी कोई न कोई रचना प्रकाशित होती थी ! कभी कभार किसी अखबार या पत्रिका में भी छप जाता था ! कालेज के दोस्त व प्रोफेसर भी उसकी रचनाओं की तारीफ किया करते थे ! फेसबुक का जमाना आया तो इसी लिखने के शौक के कारण उसके बहुत से आनलाइन फ्रेंड बन गए ! अपनी रचनाओं के कारण वो नेट पर छाया रहता ! लोग उसकी रचनाओं को लाइक करते और अपने कमेंट भी देते ! उसके लिखने का ढंग इतना अच्छा था कि लोग फेसबुक पर उसकी रचनाओं का इंतज़ार करते !

रवि ने देखा की उसके सामने के मकान में कोई नया किरायेदार आया है ! उस परिवार में केवल चार सदस्य थे ! पंडित उमाशंकर बैंक में काम करते थे ! उनकी पत्नी की उम्र 40-42 के करीब रही होगी ! रंग साफ़ होने के कारण खिचड़ी बालों में भी आकर्षक लगतीं थीं ! उनका एक छोटा बेटा था जिसको सभी प्यार से पप्पू कहते थे ! और चौथी सदस्या थी एक 19 वर्ष की लड़की ! नाम रीता ! रवि ने जब उसे देखा तो देखता ही रह गया ! मोटी-मोटी आँखे, गोल चेहरा, काले लम्बे बाल, मतवाली चाल ! रंग गेहुआं, बड़े चटक-मटक के कपडे पहनती थी ! सब कुछ मिलाकर उसे एक बार देख लेने के बाद निगाहे अपने आप ही उस तरफ उठ जाती थीं ! रवि ने जब रीता को देखा तो उसे ऐसा लगा कि जैसे उसने उसे कहीं देखा है ! लेकिन याद नहीं आ रहा था कहाँ..... ? कुछ समझ में न आया !

आज रवि की एक कहानी फेसबुक पर प्रकाशित हुई तो लाइक और कमेंट्स् आने शुरु हो गए ! वो कमेट्स के उत्तर दे रहा था कि उसकी निगाह एक फोटो पर अटक गई ! सोचने लगा यह फोटो किसकी है ? चेहरा जाना पहचाना सा लगा ! लेकिन कहाँ देखा याद नहीं आ रहा था ! फोटो पर डबल क्लिक करके प्रोफाइल देखी और नाम पढा तो लिखा था रीता ! रीता.... यह रीता कौन है ? अरे, यह तो वही रीता है सामने वाले नये किरायेदार अंकल की लडकी ! रवि ने झट से उसे मेसेज करके पूछा ! कुछ समय बाद ही रीता का “हाँ” में उत्तर आ गया ! फिर तो मेसेज भेजने का सिलसिला शुरु हो गया ! बस दोनो मोबाईल से चिपके रहते !

रवि तो उस पर पहली नज़र में ही मर मिटा था ! रवि के कमरे की खिड़की सीधी रीता के दरवाजे के सामने ही खुलती थी ! वह घंटो रीता की एक झलक पाने के लिए खिड़की पर खडा रहता ! अब तो सभी काम वो खिड़की पर ही करने लगा ! उसका अधिकतर समय खिडकी पर ही बीतता ! नहाने के बाद कपडे पहनते-पहनते खिड़की पर पहुँच जाता ! कंघी करने के लिए भी उसे खिड़की पर ही आना पड़ता ! कुछ दिनों में धीरे-धीरे उसका रोज मर्रा का सारा सामान खिड़की पर आ गया – केवल एक झलक पाने ले लिए – रीता की !

उधर रीता भी फेसबुक पर उसकी रचनाओं को पढ कर उसे पसन्द करने लगी थी ! एक दिन गली के नुक्कड़ पर दोनों की मुलाकात हो गयी ! बस फिर क्या था ? चुपके-चुपके दोनों एक दूसरे से मिलने लगे ! कभी पार्क में, कभी सिनेमा-हाल में तो कभी शापिंग-माल में ! प्यार इतना बढा कि दिन में जब तक एक दूसरे को देख न लेते चैन न आता ! कई वादे किए दोनों ने आपस में जिन्दगी भर साथ निभाने के ! जीवन साथी बनकर होने वाले चुन्नू-मुन्नू को साथ खिलाने के !

लेकिन दुनिया वाले इस तरह के प्रेमियों को जीने ही कहाँ देते है ! बात फैलते-फैलते सारे मोहल्ले में जंगल की आग की तरह फ़ैल गयी ! रीता के मां-बाप को पता चला तो उन्होंने रीता को बहुत समझाया ! परन्तु रीता नहीं मानी और रवि से चोरी छिपे मिलने लगी ! एक दिन पकड़ी गयी ! बहुत पिटाई हुई ! रीता का बाहर आना-जाना बंद हो गया ! उसको ऊपर की मंजिल में एक कमरा दे दिया गया और बाहर आने-जाने पर पाबन्दी लगा दी ! उससे मोबाइल भी छीन लिया !

एक दिन साहस करके रवि पिछवाड़े की तरफ से गंदे पानी के पाईप से ऊपर चढ़ गया ! रात का समय था ! दोनों प्रेमी बहुत देर तक अपनी किस्मत पर रोते रहे ! पानी पी-पी कर घर वालों और दुनिया वालों को कोसते रहे ! कैद से छूटने के कई उपाय सोचे गए ! मिलने का कोइ भी रास्ता न सूझ रहा था ! दोनों को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की क्या करें ! दोनो के घरवाले इस शादी के खिलाफ थे !

रीता से मिलकर भरे मन से रवि उसी पाईप के सहारे नीचे आने लगा ! लेकिन वाह रे दुर्भाग्य ! आते समय पकड़ा गया ! लोगों ने चोर समझकर अच्छी-खासी पिटाई कर दी ! लड़की वालों ने बदनामी के डर से पुलिस में रिपोर्ट नहीं लिखवाई ! परन्तु उसकी मुरम्मत बहुत तबियत से कर दी थी ! टांग की हड्डी भी टूट गई ! लिहाजा रवि को अस्पताल में भरती होना पड़ा ! अब वो अस्पताल के बिस्तर पर करवटें बदल रहा था और रीता अपने घर में आंसू बहा रही थी ! हाल दोनों का ही बुरा था !

रीता के घर वालो की चिंता और बढ गयी ! उन्होंने उसके लिए लड़का ढूँढना शुरू कर दिया ! जल्दी ही शादी की तारीख भी तय हो गयी ! रीता ने बहुत हाथ-पैर मारे ! ससुराल जाते समय रीता ने रोते रोते आसमान सिर पर उठा लिया ! सारे मोहल्ले वाले हैरान ! खैर रोते-धोते शादी हो गयी !

जब रवि को अस्पताल से छुट्टी मिली तो घर आकर पता चला कि रीता तो अपनी ससुराल चली गयी ! रवि को काटो तो खून नहीं ! लेकिन वह कर भी क्या सकता था ! सारा दिन उसकी याद मैं रोता रहता ! न खाने की सुध न पानी की प्यास ! सारा दिन खोया-खोया, उदास-उदास !

कुछ दिन ससुराल में रहने के बाद रीता मायके आई तो रवि ने उससे मिलने की बहुत कोशिश की ! एक दिन मौका पाकर उससे मिला तो लाल साड़ी में लिपटी, हाथ में चूडा पहने, मांग में सिन्दूर और गहनो से सजी धजी रीता ने उसे ऐसी झाड पिलाई की रवि अवाक सा खडा उसका मुंह ही ताकता रह गया !

वह बोली – “दिखाई नहीं देता मेरी शादी हो चुकी है ! मेरी एक बात सकझ लो मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ और वो भी मुझे बहुत प्यार करते हैं ! अब तुम मुझे भूल जाओ ! आज के बाद मुझसे मिलने की भी कोशिश मत करना !”

रवि को उससे ऐसे उत्तर की उम्मीद न थी ! उसने उसको सच्चे दिल से प्यार किया था ! रीता की बेवफाई से उसका दिल टूट गया ! उसे बहुत दुख हुआ ! उसने सूसाईड नोट लिखा और अपनी छाती पर रखकर रेल की पटरी पर सो गया !

रीता की सहेली ने उससे कहा – “तू तो बड़ी बेवफा निकली ! सुना है रवि तेरे पीछे रेल के नीचे आकर मर गया ! यह भी कहते हैं की तेरे नाम ख़त लिख कर उसे छाती पर रख कर मरा है !”

रीता ने सहेली की बात सुनी तो मुंह बनाकर बोली – “ऊंह ! वो तो बेवकूफ था !”


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