न्यूज पेपर पढ़ते हुए अदरक की चाय को सवाद लेकर पी रहे गौरव के पास आकर बैठीं राधा।
‘‘क्यों मां काम सब खतम हो गया क्या ? ’’
रसोई का काम तो खतम हुआ पर ये जो कर्तव्य है ये पूरे ही नही हो रहें है। ’’
‘‘ अरे ! सुबह सुबह ही आप शुरू हो गई। कितनी बार कहने पर भी आप नहीं मानोगी क्या ? बड़े जोर शोर से शुरू हुआ मेरा गृहस्थ जीवन सिर्फ थोड़े दिनों में ही खतम हो गया। उसे ही मैं पचा नहीं पाया। फिर से अगले की तैयारी बोलो तो कैसे हो मां ? ये मुझसे नहीं होगा ? ’’
‘‘बेटा, क्या जीवन हमेशा ही खुशी व सन्तुष्ट रहने का नाम है ? रोज सुबह सूरज उगता है व शाम को डूब जाता है ना ? पर मेरा जीवन डूब गया कहकर सूर्य अगले दिन बिना उगे रहता है ? प्रिया के जाने का दुख तो हमें तो बहुत ज्याद्धा है। उसके बराबर का दुख और कुछ नहीं है। इसलिए आने वाले वसंत को रोक देना क्या ठीक है ? ’’
‘‘ ये देखों मां, आपके लिए मैं व मेरे लिए आप, ये वसंत हमारे लिए कम है क्या ? ’’
‘‘ मैं जब तक हूं तब तक तो ठीक! पर मैं न रहूं तो तुम्हें जिदंगी कैसे रास आयेगी ?’’ राधा की आंखों में आंसू देख गौरव परेशान हो गया।
‘‘ ठीक है मां अपनी पसंद की आप एक लड़की देख ले लें। पर मेरी एक शर्त है। उस लड़की वजह से हम दोनों में किसी भी प्रकार का अलगाव नहीं होना चाहिए। ’’
‘‘ तुम देखना बेटा, मैं अपनी प्रिया जैसी ही एक दूसरी प्रिया को बहुत जल्दी तुम्हारे लिए लेकर आऊंगी। ’’ कहती हुई शादी करवाने वाले संस्थान की ओर चल दी।
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बाथरूम से बाहर निकलते हुए वीणा, घड़ी को देखकर बोली ‘‘अरे,... अरे....इतनी जल्दी साढ़े नौ बज गए। कालचक्र का पता नहीं इतनी तेजी से कैसे दौड़ता है ? बड़बड़ाते हुए वीणा मां को इन्सूलीन का इन्जेक्शन लगाना है याद आते ही मम्मी के कमरे में गई व सुई लगा दी। उन्हें नमकीन दलिया दिया व उनकी सुबह की दवाईयां टेबिल पर निकाल कर रखीं। मेरी बेटी मेरी कितनी सेवा करती है सोच कर मां के आखों से आंसू बहने लगे। सीधे हाथ व सीधे पैर पर लकवा मार गया अतः बिस्तरपर पड़ी मां की सेवा बेटी को तो करनी ही है।
‘‘ क्यों बेटी वीणा तूने खाना खा लिया ? ’’
‘‘ नही मां ! तुम्हारा दोपहर का खाना हॉट बाक्स में रख दिया, गोलियां जो तुम्हें लेनी है उन्हें टेबिल पर रख दिया। अब मुझे सिर्फ खाना खाना ही बचा है। दोपहर को 12 बजे गरम पानी जो पीती हो वह थरमस में रख दिया। उसे याद से पी लेना। शाम को बाई पूणिर्मा काम करने आएगी तब उससे चाय बनवा कर पी लेना। ’’
इतनी सेवा करने वाली बेटी को देख गर्व के साथ मां परेशान भी हो रही है कि मेरे कारण ही बेटी का जीवन बरबाद न हो जाए। ये ख्याल उसे बहुत परेशान करने लगा।
‘‘क्यों बेटी शादी कराने वाले संस्थान का एजेन्ट आज आने वाला था ना ...........शुरू करते ही,
‘‘ मैंने आपसे कितनी बार कहा है, मुझे शादी नहीं करनी है और कितनी बार कहूं ? मैं शादी करने के बाद चली जाऊं तो आपकी देखभाल कौन करेगा ? ’’
‘‘मुझे किसी वृद्धाश्रम में छोड़ देना। क्यों कि भाग्यहीन लोगों की वही जगह है।’’ पारू कहने लगी।
‘‘ ऐसी बातें क्यों करती हो मम्मी ?जो घटना घटी उसका दोषी कोई नहीं। यह विधि का विधान है। तुमने मेरे लिए अच्छा लड़का देख शादी करने की सोची। पर क्या करें ? वह इतना कमजोर व बुजदिल निकला। शादी के दिन तक उसका मुंह नहीं खुखा पर शादी वाले दिन सुबह ही अपनी पसंद की लड़की के साथ भाग गया। बेटी की शादी के रूकने के सदमें को तुम बर्दाश्त नहीं कर पाई व बिस्तर पकड़ लिया। तुम भाग्य को मत कोसो मां मेरा भाग्य अच्छा था जो उसकी कलई पहले खुल गई। जो एक निर्णय कर उसे बताने का साहस न रखता हो क्या वह मर्द है? अच्छा हुआ मैं उस नामर्द से बच गई। ’’
‘‘ नहीं .........अब भी तुम्हारी उम्र ज्यादा नहीं हुई ! तुम्हारी शादी किये बिना यदि मैं ऊपर चली गई तो मुझे मोक्ष कैसे मिलेगा ? ’’
‘’ ठीक है मां तुम्हारी मर्जी। मेरे लिए एक लड़का तुम ही पसंद करना। पर मेरी एक शर्त है। जो लड़का तुम देखों वह हमारे घर में ही घर जवांई बनकर रहने को तैयार हो, क्यों कि मैं तुम्हें वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ सकती। तुम्हें आखिर तक मैं ही अपने पास ही रखूंगी। अतः जो इस बात के लियें राजी हो तो वह कैसा भी हो मुझे मंजूर होगा। इस बात को एजेन्ट आए तो अच्छी तरह समझा देना। ’’
जल्दी जल्दी जा रही बेटी को देख पारू ने दीर्घ श्वास छोड़ा।
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‘‘बेटा गौरव मैने आज तुम्हारी जन्मपत्री पंड़ित को दिखाई। उन्होने कहा उनके पास एक लड़की की जन्मपत्री आई है। उसके व तुम्हारे 36 गुण मिल रहें है। यें संयोग बहुत अच्छा है। लड़की एक बड़ी संस्था में मैनेजर है।पांच साल पहले ऐन शादी के दिन दूल्हा दूसरी लड़की के साथ भाग गया। अतः शादी नहीं हुई। लड़की की सिर्फ एक मां ही है। ’’
‘‘ मेरी शर्त उसे बताई की नहीं। ’’
‘‘ उसका अभी से क्या ? जब लड़की को देखेगे तो बातचीत कर लेगे। ’’
वहां पारू खुशी से फूली नहीं समा रही थी। वीणा के घर आते ही :‘‘ बेटी आ गई क्या ? अभी अभी एजेन्ट आकर लड़के की जन्मपत्री देकर गया। उसका नाम गौरव है। वह भी कोई प्राईवेट बड़े बैक में अधिकारी है। उसका एक बड़ा भाई भी है। जो विदेश में रहता है। गौरव ने अपने साथ काम करने वाली लड़की को पसंद कर प्रेम विवाह किया। पर अफसोस तीन ही महीने में सड़क दुर्घटना में मारी गई। उसके बाद शादी नहीं करूंगा कह कर अभी तक शादी नहीं की। ये फोटो है उसका इसे देख कर बता बेटी। ’’ हांफते-हांफते जल्दी जल्दी पारू ने सब बताया। आज पारू बहुत खुश थी। मां को इतना प्रसन्न देख वीणा ने तुरन्त हां कर दी।
दोनों ने एक दूसरे को देखा। राधा को वीणा बहुत पसंद आई। गौरव ने तो पसंद मां पर ही छोड़ दी थी।उसने भी हां कह दी। पर अचानक मौन तोड़ते हुए वीणा ने गौरव से कहा- ‘‘ मुझे आपसे अकेले में बात करनी है। ’’
‘‘ कोई भी बात हो, कोई बात नहीं, मां के सामने ही निसंकोच कहियेगा। ’’ गौरव बोला।
‘‘ नहीं मुझे आपकी मां के बारे में ही बात करनी है। ’’
ये सुनते ही एकदम राधा का चेहरा कुम्हलागया। ‘‘कोई बात नहीं वीणा जी ! मेरे मां के सामने ही कहियेगा । मुझसे ज्यादा इस शादी में मेरी मां उत्साहित है। ’’
‘‘ वीणा ! अभी क्यों बात कर रही है..........मेहमानों को नाश्ता तो दो ’’ पारू बोली।
‘‘नहीं आण्टी ! वे जो कहना चाहती है आराम से उन्हें कहने दो। यही सबके लिये अच्छा है। ’’ गौरव तस्सली से बोला।
‘‘ शादी के बाद आपकी मां कहां रहेंगी ?’’
‘‘ इसमें क्या संदेह है ? बेशक वे अपने आखिरी दिन तक मेरे साथ ही रहेगी। ’’
‘‘ फिर इस फैसले को बदलना पडेगा क्यों कि मेरे मां के लिए मैं जो घर जवांई बन कर रहना पसंद करें। उसी से मैं शादी करूंगी। कृपया मुझे क्षमा करें। ’’
‘‘ ठहरो बेटी ! तुम्हें क्या ? मैं तुम लोगों के साथ न रहूं यही समस्या है तो मैं अकेले रह लूंगी। ’’ कह कर राधा अन्दर गई।
‘‘ अम्मा आप क्या कह रहीं हैं ? आप मेरी शर्त भूल गई क्या ? ’’ गौरव परेशान होकर बोला।
‘‘ अण्टी आप मुझे गलत न समझे। मेरी मां को इस असहाय स्थिति में छोड़ कर मैं अलग नहीं रह सकती। मेरी मां को अपने साथ ससुराल ले आकर , मैं आप लोगों को कष्ट देना नहीं चाहती। अतः मैं घर जवांई बनने को जो तैयार हो उसी से शादी करूंगी।ये मेरी शर्त है। गौरव का एक भाई और है मालुम होने पर ही मैंने आपको आमंत्रित किया। यदि मेरी बातों से आपका दिल दुखा हो तो मुझे माफ कर दीजियेगा।’’ स्पष्ट व आत्मविश्वास के साथ बोलते ही गौरव बोल पड़ा।
‘‘ मेरा एक भाई जरूर है। पण्ड़ित जी ने आपको बताया होगा। परन्तु मेरी मां का मैं सिर्फ इकलौता लड़का हूं। अतः मैं उन्हें छोड़ कर अलग नहीं हो सकता। ’’
राधा व वीणा उसे आश्चर्य से देखने लगे.............
‘‘ हां वीणा मेरी प्रिय पत्नी प्रिया की मां ही ह। ये राधा आण्टी। हम दोनो जब एक दूसरे से प्रेम करते थे,तब मां ने ही हमें स्पोर्ट कर अपनी एक मात्र बेटी की शादी मुझसे कर दी।पता नहीं किसकी नजर लगी, एक दिन आफिस से बॅाइक से आते समय पीछे से कार ने ठक्कर मारी व प्रिया सदा के लिए मेरा साथ छोड़कर भगवान की प्यारी हो गई। इस दुख को किस तरह कैसे कहूं ! ’’
‘‘ अपनी इकलौती पुत्री जिसके सुखी वैवाहिक जीवन देखकर जो मां खुश होती थी अब उसके लिए पूरा ससांर ही अन्धकारमय हो गया। उन्हें सिर्फ सात्वंना से काम नहीं चलेगा। अतः मैनें ही उन्हें पुत्र व पुत्री बन कर सम्भाल लिया और उन्होंने मां बन कर मुझे सम्भाल लिया। अब यदि उन्हें छोड़ने पर मुझे अच्छी जिंदगी मिलेगी तो ये मुझे मंजूर नहीं। ऐसी जिंन्दगी मुझे नहीं चाहिए। ’’ पूरा घर आश्चर्य में पड़ गया।
वीणा के अांखों से आंसू बहने लगे। ‘‘ गौरव दया करके मुझे माफ कर दीजियेगा। जन्म देने वाली माता व शादी कर घर लाए अपनी पत्नी के मन को ही न समझने वाले आदमियों को ही मैंंने देखा व दुखी हुई हूं। ऐसे में आप एक सास को मां जैसे मान रहे हो, तो मेरा मन आपको देवतुल्य मानकर पूजने को कर रहा है। आप न केवल मेरे पूज्नीय हो, पर देश के भी गौरव हो।’’
‘‘ मां मुझे माफ कर दीजियेगा। ’’ कहते ही राधा ने वीणा को गले लगाया।
‘‘ तुम भी मेरे लिए प्रिय ही हो ! किसी को भी कहीं जाने की जरूरत नहीं। सभी एक साथ एक ही घर में रहेगे। तुम्हारा दाम्पत्य जीवन सुखी हो व हमारा रिश्ता अपूर्व हो सब रिश्तो से ऊंचा। ’’ ऐसा कहकर राधाजी ने पारू जी को भी गले लगाया।
‘‘समधिन जी, मेरी बेटी बहुत ही भाग्यशाली है। दामाद अपनी सास के लिये बेटा बना है। इस अपूर्व रिश्ते से हम भी जुड़ने जा रहें हैं, ये हमारा सौभग्य है। ’’पारू के चेहरे से खुशी व आत्म सन्तोंष टपक रहा था।

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