कुत्ता महान है ? -प्रदीप कुशवाहा

कुत्ता महान है ? ----------------- क्या जरूरी है किसी व्यक्ति कों उसके एक दोष के कारण उसे पूरी तौर से खारिज कर दिया जाय ? मैं तों समझता हूँ कि यह कदम जब कोई अपने लिए नही उठा सकता तों दूसरे के प्रति क्यों उतावला रहता है उसकी निंदा हेतु ? आदरणीय गांधी जी का अन्ध भक्त तों नही रहा। पर उनके विचारों से विशेष कर , सूत कातना, बकरी और उनके तीन बन्दर। इन तीनों के संदर्भ में लोगों की अलग -अलग मान्यताएं , अलग- अलग व्याख्याएं हैं , उनसे मेरा कोई लेना -देना नही। मेरी अपनी अलग सोच है. न मैं किसी की बात मानने हेतु बाध्य हूँ न ही अन्य किसी कों ऐसा करने हेतु बाध्य करता हूँ। चूँकि मैं भारतीय हूँ मेरे बाप देसी भारतीय थे इसलिए चार देसी कुत्तों के चित्र के आधार पर शोध कर रहा हूँ। ये चित्र मेरे द्वारा लिया गया है। प्रबुद्ध जनों से सादर गुजारिश है कि जैसे बन्दर , बकरी और खादी के संदर्भ व्याख्याएं दे चुकें हैं इन मासूम कुत्तों के संदर्भ में देने की महती कृपा करेंगे। न जाने आज कल मुझे क्या हो गया है। कभी लगता है मैं कुत्ता हूँ और कभी आदमी और कुत्ता मिला - जुला। फिर सोचता हूँ कि अब मैं आदमी नही रहा, कुत्ता भी नही , ऐसा सोचना कदापि गलत भी नही , कुत्ते -कुत्ते ही रहे - स्वामी भक्त। आदमी के स्वभाव का रुझान कुत्तों की तरफ दिख रहा है- पर ऐसा नही है , भ्रम है , एक छलावा है। अब आदमी और कुत्तों के गुणों में बहुत परिवर्तन हो गया है कम से कम वफ़ादारी के मामले में। आदमी का कुत्ता पना कुत्ते के श्रेष्ठ गुणों का सीधा साधा अपमान ही तों है ? इसलिए बेहतर होगा अब आदमी के मूल्यांकन में कुत्तों के गुण न गिने जाएँ , कुत्ता ज्यादा महान है। मुझे कुत्ते बचपन से ही प्रिय रहे , न जाने क्यों , शायद इनके निश्चल स्वभाव और वफादारी के कारण। ये गुण मेरे में आज भी मौजूद हैं , ऐसा इस लिए भी हो सकता है कि १९७२ में मेरा विवाह हुआ था और इसी वर्ष कुत्ते ने काट कर १४ इंजेक्शनो की सौगात दे कर अपने गुण के बंधन में समेंट लिया था। कुत्ते घर में भी पाले और गली वाले कुत्ते भी प्रश्रय पाए। जिस कुत्ते ने मुझे काटा था शायद वो पागल हो गया था और लगातार भौंकता रहता था। दिक्कत तों तब ज्यादा होती थी की मेरी पत्नी भी उसका साथ देती। कुत्ते कों मैं -त्रेंकुइल -नींद की गोली दे देता था और प्रिय पत्नी की गोली कों मैं झेलता था। जनपद गोंडा , उत्तर प्रदेश निवासी ,पंडित राम प्यारे तिवारी जी रेलवे में कारपेंटर थे परन्तु ज्योतिष के ३२ दाँत वाले प्रकाण्ड विद्वान थे। भविष्य वाणी सत्य होती थी ,मेरे साथ कुछ गवाह अभी शेष हैं। उन्होंने मुझे कुत्ता न पाल कर सांप पालने की सलाह दी थी। १४ कुत्तों की कब्र अपने हाथ से , १४ आकस्मिक अवकाश, और इन दिनों पूरा घर शोक मग्न , उपवास करता था। इन १३ कुत्तों में से मात्र एक कुत्ता शेर सिंह ४ वर्ष जीवित रहा जों एक दुर्घटना में मारा गया। शेर सिंह की पदवी मैने इसकी बहादुरी और वफादारी पर दी थी। वर्ष १९७२ में ब्याह कर जब मेरी पत्नी घर आयीं तों , महिला संगीत में मुहँ दिखाई की रस्म के दौरान गाना गाने का हुक्म पत्नी जी कों सुनाया गया। अन्यथा की दशा में मेरे प्यारे स्ट्रीट डाग -भोलू --के चरण छूने थे. अब भला आप ही बताइये इन कुत्तों के ममत्व से कैसे दूर रहा जाय। जब भी मैं अपने चित्रों , लेखों , कविताओं या सामान्य बोलचाल के दौरान कूकुर गान करता हूँ तों मित्र गण बुरा मानते हैं। १९८० में लायन्स क्लब की तर्ज पर इंटर नेशनल डाग्स क्लब स्थापित किया जों कागज पर मूर्त रूप न ले सका। कुत्तामित्र - कुत्ता और मित्र यानि -मित्रकुत्ता की परिभाषा में अब काफी अंतर है। वर्षों पहले कुत्तामित्र से घर के सामान आदि कों क्षति पहुँचने की सम्भावना तों बनी रहती थी परन्तु मित्र किसी सीमा तक लाभ कर और निष्ठावान थे। आज परिस्थिति भिन्न है, देर सवेर इसे लोग स्वीकार भी कर रहे हैं कि अब सुदामा और कृष्ण जैसे मित्र स्वप्न मात्र हैं। कुत्ते जैसे वफादारी असम्भव। मित्रकुत्ता अधिक हो गए हैं। शायद यही वो बड़ी वजह है मुझ से नाराजगी की। देशी आदमी विदेशी कुत्ते पालता है। देशी कुत्ते बेचारे सर्दी - गरमी , लात - घूंसा सब झेलते हैं। अपने ही देश में अपनों के द्वारा शोषण करने पर कोई भी कुछ नही बोलता , सब मौन। न जुलुस , न कोई धरना ना ही कोई प्रदर्शन। अपराधियों कों पुनर्वास सुविधा ? मेरे मित्रों कों अब ये आपत्ति है कि जिस गली में आप रहते हैं उस गली के नाम करण , नाम के पत्थर के लगाने में काफी झगड़ा हुआ। फिर भी गली कैंसर अस्पताल के नाम से जानी गयी।गली के असली के नान से नही। इसी गली कों अब कुत्ते वाली गली के नाम से बगैर प्रचार के जाना जा रहा। ये कुत्ते लगे हुए पत्थर कों यदा कदा धोते रहते हैं। अब बताइये इसमें भी मेरा दोष। कुत्तों के शौर्य , सेना , पुलिस अन्य क्षेत्रों में इनकी योग्यता कों कोई नकार नही सका। आदमी जों कार्य नही कर सकता ये कुत्ते करते हैं , मतलब आदमी कों जरूरत पड़ती है इन कुत्तों की न कि कुत्तों कों आदमी की। फिर इनसे ईर्ष्या का प्रश्न ही कहाँ ? ये वातानुकूलित वाहन में घूमें या शानदार बंगले में रहें। इनका भाग्य। मैं क्या कर सकता हूँ , कोई मैं अकेला तों नही कुत्ता प्रेमी। अब तों मैने एक भी नही पाले हैं, न ही घर वाले कुत्ता पालने की इजाजत दे रहे हैं। वे कुत्ते गली की चौकी दारी करते हैं और अब मैं घर की , क्योंकि अब मैं रिटायर जों हो गया हूँ.

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा

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