मै रमन कुमार पेशे से पत्रकार हू और मुझे पुरानी जगहों पर घुमने का शौक है साथ में जासूसी उपन्यास पढना बहुत पसंद है|

हाँ एक बात और मुझे घटनाओं का पूर्वानुमान होता है या फिर किसी जगह पर जाता हू तो ऐसा लगता है की पहले भी यहाँ आ चूका हूँ|कई बार तो मैंने सामने बोलने वाले की बात उसके पहले ही पूरी कर दी तो लोगो ने उसे मेरी चतुराई समझा |घर वालो को बोला तो उन्होंने भुत प्रेत का साया समझकर झाड़ फूंक करायी ,दोस्तों को बोला तो उन्होंने मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखने की सलाह दे डाली|

लेकिन मै परेशान था की आखिर ऐसा क्यों ??? मुझे स्वप्न में ही घटनाओ की जानकारी हो जाती है प्रकृति मुझको क्यों क्यों बता रही है सब??|मेरी कम्पनी में नई इन्टर्न आई थी मै वैसे तो किसी से बात नहीं करता था लेकिन जब वह दिन में चार बार आ कर सर ये बताओ ,ये कैसे होगा पूछती थी तो बरबस ध्यान आ जाता था ,हल्का सिंदूरी रंग गोरे गा्ल ,बड़ी बड़ी आंखे और माथे पर आ जाने वाली एक बालो की उलझी हुई लट,ऐसा लगता था की उपर वाले ने चुटकी भर सिन्दूर मलाई में घोल कर उसे बना दिया है ,और उसकी खनकती हंसी तो मानो मेरे कानो में सितार बजा देती थी|

और पिछले दोदिनों से मुझे उसके बारे में ही स्वप्न आ रहे थे ,ऐसा लग रहा था की कोई मुझसे उसका हाथ खीचकर ले जा रहा था या उसकी शादी किसी से हो रही हो और मंडप में भागदौड़ मची हो | या वो किसी कढाई में गिर कर काली पड़ गयी हो और उसका अधजला चेहरा रमन ....रमन पुकार रहा था |मै बड़े धर्मसंकट में था की दो चार दिन की मुलाकात में मै उसके बारे में एसी बात कैसे कर सकता था| मुझे लगा की मेरा उसके प्रति आकर्षण है जिससे सपने आ रहे है लेकिन मै ही जानता था की पिछले पच्चीस वर्षो में मेरा एक भी स्वप्न कभी गलत नहीं हुआ| मै बहुत बेचैन था |

मै इस बात से इतना परेशान था की मैंने अपने मित्र डॉ.मुनीश यादव जो की रायपुर में एक प्रसिद्ध दिमाग का डॉक्टर है मिलने का फैसला किया|आज मै मुनीश के सामने बैठा था |यार मुनीश मुझे होने वाली घटना का स्वप्न में पता लग जाता है और मै कोई चीज देखता हू तो लगता है मैंने इसे पहले भी देखा या सुना है|और ये मेरे बचपन से है परन्तु जब घटना हो जाती है तो मै उसे समझ कर पछताता हू |मुनीश बोला भाई काम टेंशन लिया कर तुझे देजा वू जैसी फीलिंग आ रही है ,थोडा आराम करो मै कुछ दवाइयां दे रहा हू एक हफ्ते में आराम हो जाये तो ठीक है वर्ना मुझे तुमको सम्मोहन के जरिये ठीक करना पड़ेगा|


एक हफ्ते में कुछ खास आराम नहीं हुआ और मुझे सम्मोहन चिकित्सा देने के लिए बुलाया गया साथ में मेरी माँ और बीबी रुक्मिणीथी |एक अँधेरे कमरे में डॉक्टर ने मुझे अर्ध चेतन स्थिति में ला दिया और बोला क्या दिख रहा है, उस समय मै अपनी सात वर्ष की अवस्था में था मेरे घर में कोई नहीं था मेरे मम्मी पापा गाँव गए थे मै तो फील्ड में खेलता रहता था मेरे साथ मेरे बगल एक पांडे जी की लड़की खेलती थी मै बेचारा प्रेम को तरसने वाला बच्चा उसके साथ खेल कर खुश रहता था वो घर से खाने को लाती और मुझे खिलाती थी और मेरा हाथ पकड कर कहती थी मुझे मत छोड़ना मै कहता था कि कभी नहीं छोड़ पाउँगा |फिर मै गर्मी की छुट्टी पर गाव चला गया दो महीने बाद वापस आया तो उसका परिवार शहर छोड़ कर जा चूका था

और मै उसे ढूंढता रह गया|

फिर मुनीश ने मुझे अपनी वर्तमान अवस्था के दो दिन पहले तक सम्मोहन से पहुचाया |

कुछ लाइने स्फुटित हुई –

जग रहा है कौन धनुर्धर जबकि भुवन भर सोता है|...

मृत्यु लोक मालिन्य मेटने स्वामी संग जो आयी है |

तीनो लोक की लक्ष्मी ने यह कुटी आज अपनाई है|”


इसका विश्लेषण मेरी पत्नी रुक्मिणी ने किया --पहली पंक्ति में में कातिल का नाम है जो निशानेबाज है जिसका नाम अर्जुन है दूसरी पंक्ति में भुवन और लक्ष्मी जो की पति पत्नी है घर में सो रहे थे घात लगा कर गोली मर दी और लाश गायब कर दी |यह काव्य मैथिलीशरण गुप्त द्वारा लिखा हैअर्थात कोई गुप्ता जी ने किलर को सुपारी दी थी |और यह घटना चिरगाव की है |

बाद में पुलिस ने तफ्तीश की तो ये पता चला की पाण्डेय जी की लड़की की शादी चिरगाव उत्तर प्रदेश में भुवन मिश्र के साथ हुई थी , किन्तु उसके सामने मेडिकल स्टोर चलने वाले मिथिलेश गुप्ता की निगाह लक्ष्मी पर थी और उन्होंने अपने एकतरफा प्रेम के कारण भुवन का करियर बर्बाद कर दिया फिर जब उनकी बात नहीं बनी तो उन्होंने अपनी हताशा में पति पत्नी को मरवा कर घर में दफना दिया था.|

अब प्रश्न था की मेरे आफिस में आने वाली इंटर्न और लक्ष्मी का क्या सम्बन्ध था |

इसको जानने के लिए मै पुलिश टीमके साथ चिरगाव गया तो वहा उसके परिवार जानो से मिलकर लक्ष्मी की तस्वीर देखि ..ये बिलकुल मेरी इंटर्न वंदना जैसी थी |मैंने ऑफिस फ़ोन किया तो वहा रिसेप्सनिस्ट ने बताया की इस नाम की कोई इंटर्न थी ही नहीं सी.सी.टी.वी. फुटेज में मैं खुद से बाते कर रहा था |......

मै समझ गया की यह लक्ष्मी की आत्मा थी जो मेरे जरिये अपने कातिल को सजा दिला चुकी थी और अपना अंतिम संस्कार करवा चुकी थी| फिर भी प्रश्न है की इतने बड़े विश्व में लक्ष्मी ने मुझे चुना ... आखिर क्यों ....न जाने क्यों ?????????????


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