नशेमन

एग्जाम के जमाने मे जेब मे कम पैसे होते थे और एग्जाम सेंटर बहुत दूर दूर पड़ते थे।खैर पुरे दिन यात्रा करने के बाद रात को पहुँच पाया जहाँ एग्जाम होना था वहाँ ।साथ मे कुछ ख़ास नही होता था एकमात्र टूटी तनी का बैग और उसमे किताबे।जब पंहुचा तो रात अधिक हो गई थी और सारे होटल फुल।अब क्या करे एक अनजान शहर मे रिक्शे वाला आज भी बड़ी अहमियत रखता है।मैंने एक रिक्शे वाले को समस्या बताई की कोई सस्ता होटल बताओ वो बोला हा बाबूजी चलो बता देते है उसने बड़ी लम्बी यात्रा शुरू करदी मैंने पूछा भाई क्या इंडिया गेट जा रहा है ।बोला आप बस बैठे रहो आखिर मिल गया होटल 100रूपये मे कमरा मिल गया लेकिन नाम नहीं लिखा था होटल मालिक ने जब पर्ची काट के दी तो उसपर लिखा था नशे मन दिल धक से हुआ जरूर शराबियों का होटल होगा ।मै अपने कमरे मे आ गया घर से 600किलोमीटर दूर आपका कोई साथी नही होता सिर्फ अपना विस्वास ही साथ होता है।कमरा बाहर से सही से लॉक कर लिया और अब भला नींद कहा खिड़की मे से मैंने देखना शुरू कर दिया अगर कुछ गड़बड़ हुई तो शोर मचा दूंगा।रात के कोई 1बजे दो हट्टे कट्टे आदमी होटल मे घुसे खिड़की मे सब दिख रहा था उन्होंने होटल मालिक के खीच के रह पटा।।थप्पड़।।मारा और बोले साले खाना ले आ मुझे ये सब देखकर जनवरी की रात मे बिलकुल अकेलापन लगा और मन मे सिहरन पैदा कर गया ।मैंने पूरा जग पानी पी लिया जो किताब पढ़ रहा था वो तो पढ़ना ही भूल गया।लेकिन जिस आदमी को मै मालिक समझ रहा था शायद वो मालिक नहीं था क्योकि थोड़ी देर बाद उससे भी भयानक एक आदमी प्रकट हुआ उसने दोनों के दो हाथ मारे बोला तुरन्त निकल लो इससे पहले की मै तुम्हारी बेभाव ठुकाई करु।नशेमन।।।एग्जाम के जमाने मे जेब मे कम पैसे होते थे और एग्जाम सेंटर बहुत दूर दूर पड़ते थे।खैर पुरे दिन यात्रा करने के बाद रात को पहुँच पाया जहाँ एग्जाम होना था वहाँ ।साथ मे कुछ ख़ास नही होता था एकमात्र टूटी तनी का बैग और उसमे किताबे।जब पंहुचा तो रात अधिक हो गई थी और सारे होटल फुल।अब क्या करे एक अनजान शहर मे रिक्शे वाला आज भी बड़ी अहमियत रखता है।मैंने एक रिक्शे वाले को समस्या बताई की कोई सस्ता होटल बताओ वो बोला हा बाबूजी चलो बता देते है उसने बड़ी लम्बी यात्रा शुरू करदी मैंने पूछा भाई क्या इंडिया गेट जा रहा है ।बोला आप बस बैठे रहो आखिर मिल गया होटल 100रूपये मे कमरा मिल गया लेकिन नाम नहीं लिखा था होटल मालिक ने जब पर्ची काट के दी तो उसपर लिखा था नशे मन दिल धक से हुआ जरूर शराबियों का होटल होगा ।मै अपने कमरे मे आ गया घर से 600किलोमीटर दूर आपका कोई साथी नही होता सिर्फ अपना विस्वास ही साथ होता है।कमरा बाहर से सही से लॉक कर लिया और अब भला नींद कहा खिड़की मे से मैंने देखना शुरू कर दिया अगर कुछ गड़बड़ हुई तो शोर मचा दूंगा।रात के कोई 1बजे दो हट्टे कट्टे आदमी होटल मे घुसे खिड़की मे सब दिख रहा था उन्होंने होटल मालिक के खीच के रह पटा।।थप्पड़।।मारा और बोले साले खाना ले आ मुझे ये सब देखकर जनवरी की रात मे बिलकुल अकेलापन लगा और मन मे सिहरन पैदा कर गया ।मैंने पूरा जग पानी पी लिया जो किताब पढ़ रहा था वो तो पढ़ना ही भूल गया।लेकिन जिस आदमी को मै मालिक समझ रहा था शायद वो मालिक नहीं था क्योकि थोड़ी देर बाद उससे भी भयानक एक आदमी प्रकट हुआ उसने दोनों के दो हाथ मारे बोला तुरन्त निकल लो इससे पहले की मै तुम्हारी बेभाव ठुकाई करु।नशेमन।।।एग्जाम के जमाने मे जेब मे कम पैसे होते थे और एग्जाम सेंटर बहुत दूर दूर पड़ते थे।खैर पुरे दिन यात्रा करने के बाद रात को पहुँच पाया जहाँ एग्जाम होना था वहाँ ।साथ मे कुछ ख़ास नही होता था एकमात्र टूटी तनी का बैग और उसमे किताबे।जब पंहुचा तो रात अधिक हो गई थी और सारे होटल फुल।अब क्या करे एक अनजान शहर मे रिक्शे वाला आज भी बड़ी अहमियत रखता है।मैंने एक रिक्शे वाले को समस्या बताई की कोई सस्ता होटल बताओ वो बोला हा बाबूजी चलो बता देते है उसने बड़ी लम्बी यात्रा शुरू करदी मैंने पूछा भाई क्या इंडिया गेट जा रहा है ।बोला आप बस बैठे रहो आखिर मिल गया होटल 100रूपये मे कमरा मिल गया लेकिन नाम नहीं लिखा था होटल मालिक ने जब पर्ची काट के दी तो उसपर लिखा था नशे मन दिल धक से हुआ जरूर शराबियों का होटल होगा ।मै अपने कमरे मे आ गया घर से 600किलोमीटर दूर आपका कोई साथी नही होता सिर्फ अपना विस्वास ही साथ होता है।कमरा बाहर से सही से लॉक कर लिया और अब भला नींद कहा खिड़की मे से मैंने देखना शुरू कर दिया अगर कुछ गड़बड़ हुई तो शोर मचा दूंगा।रात के कोई 1बजे दो हट्टे कट्टे आदमी होटल मे घुसे खिड़की मे सब दिख रहा था उन्होंने होटल मालिक के खीच के रह पटा।।थप्पड़।।मारा और बोले साले खाना ले आ मुझे ये सब देखकर जनवरी की रात मे बिलकुल अकेलापन लगा और मन मे सिहरन पैदा कर गया ।मैंने पूरा जग पानी पी लिया जो किताब पढ़ रहा था वो तो पढ़ना ही भूल गया।लेकिन जिस आदमी को मै मालिक समझ रहा था शायद वो मालिक नहीं था क्योकि थोड़ी देर बाद उससे भी भयानक एक आदमी प्रकट हुआ उसने दोनों के दो हाथ मारे बोला तुरन्त निकल लो इससे पहले की मै तुम्हारी बेभाव ठुकाई करु।नशेमन।।।एग्जाम के जमाने मे जेब मे कम पैसे होते थे और एग्जाम सेंटर बहुत दूर दूर पड़ते थे।खैर पुरे दिन यात्रा करने के बाद रात को पहुँच पाया जहाँ एग्जाम होना था वहाँ ।साथ मे कुछ ख़ास नही होता था एकमात्र टूटी तनी का बैग और उसमे किताबे।जब पंहुचा तो रात अधिक हो गई थी और सारे होटल फुल।अब क्या करे एक अनजान शहर मे रिक्शे वाला आज भी बड़ी अहमियत रखता है।मैंने एक रिक्शे वाले को समस्या बताई की कोई सस्ता होटल बताओ वो बोला हा बाबूजी चलो बता देते है उसने बड़ी लम्बी यात्रा शुरू करदी मैंने पूछा भाई क्या इंडिया गेट जा रहा है ।बोला आप बस बैठे रहो आखिर मिल गया होटल 100रूपये मे कमरा मिल गया लेकिन नाम नहीं लिखा था होटल मालिक ने जब पर्ची काट के दी तो उसपर लिखा था नशे मन दिल धक से हुआ जरूर शराबियों का होटल होगा ।मै अपने कमरे मे आ गया घर से 600किलोमीटर दूर आपका कोई साथी नही होता सिर्फ अपना विस्वास ही साथ होता है।कमरा बाहर से सही से लॉक कर लिया और अब भला नींद कहा खिड़की मे से मैंने देखना शुरू कर दिया अगर कुछ गड़बड़ हुई तो शोर मचा दूंगा।रात के कोई 1बजे दो हट्टे कट्टे आदमी होटल मे घुसे खिड़की मे सब दिख रहा था उन्होंने होटल मालिक के खीच के रह पटा।।थप्पड़।।मारा और बोले साले खाना ले आ मुझे ये सब देखकर जनवरी की रात मे बिलकुल अकेलापन लगा और मन मे सिहरन पैदा कर गया ।मैंने पूरा जग पानी पी लिया जो किताब पढ़ रहा था वो तो पढ़ना ही भूल गया।लेकिन जिस आदमी को मै मालिक समझ रहा था शायद वो मालिक नहीं था क्योकि थोड़ी देर बाद उससे भी भयानक एक आदमी प्रकट हुआ उसने दोनों के दो हाथ मारे बोला तुरन्त निकल लो इससे पहले की मै तुम्हारी बेभाव ठुकाई करुअचानक मेरे दरवाजे पर किसी दस्तक दी अब तो सिहरन और बढ़ गई आवाज आई भाई दरवाजा खोलो क्या एग्जाम देने आये हो मै भी एग्जाम देने आया हूँ।मैंने कहा एडमिट कार्ड दिखाओ खैर जब मुझे विस्वास हो गया दरवाजा खोला उसने अपना नाम इमरान बताया।फिर बोला तुमने देखा पर्ची पर क्या लिखा है क्या करे दोस्त हम लोग तो फंस चुके है इमरान भी घबराया हुआ था।मैंने कहा भाई एक ही कमरे मे लेट जाते है।वो भी बैग उठा लाया उस दिन अल्लाह ईश्वर दोनों को साथ साथ याद आ रहे थे।15 min बाद दरवाजे पर धप्प की आवाज आई मैंने दरवाजे की सांख से देखा कोई चहलकदमी कर रहा है।एक अजीब सी सिसकारी भरी आवाज आई जान हलक मे आ गई इमरान ने फुसफुसा कर कहा अब क्या होगा भाई।मैंने संकेत से कहा पता नही होटल वाली सड़क बिलकुल सुनसान हो चुकी थी झिगुरो की आवाज और डरा रही थी।थोड़ी देर बाद वो राक्षस नुमा इंसान खिड़की से दिखाई दिया वो पहली मंजिल पर था और हमारा कमरा दूसरी मंजिल पर ।उसकी अट्टहास भरी आवाज भयभीत कर रही थी।इमरान और मै आज के इस भयंकर रात के साथी थे।इमरान बेड के नीचे कुछ इशारा कर रहा था और उसका चेहरा पीला पड़ चुका था।जब मैंने देखा तो हाल बेहाल हो गया बेड के नीचे खून की लकीर बनी हुई थी।अचानक लाइट चली गई bhiiसड़ सन्नाटे मे इमरान की चीख निकल गई।धीरे धीरे किसी की पदचाप की आवाज आ रही थी हम लोग दरवाजे से सटे बैठे थे।अचानक फुसफुसाहट की आवाज मे किसी महिला की सुनाई दी।यही रूम है और दरवाजे पर खरोच जैसी आवाज आने लगी ।पसीने से तरबतर हम दोनों ने सोचा अब मालिक के हाथ मे ही थी हम लोगो की जिंदगी।अचानक पदचाप दूर होती प्रतीत हुई।सबेरा भी अब होने लगा था।रूम का दरवाजा खोला कोई नही था सब जगह हड्डिया बिखरी पड़ी थी।सामने वाली दीवार पर क्रास"" लाल रंग से बना था उर्दू मे कुछ लिखा था।पूरा होटल सुनसान था।हिम्मत जुटा कर जैसे तैसे हम लोग बाहर निकले।बाहर आकर मैंने पूछा इमरान से क्या लिखा था।उसके चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगी बोला"'शिकार तो है लेकिन आज शिकारी नहीं""समाप्त||

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