मेरी बहु - फुटबॉल चैम्पियन

बूढ़ी माँ बेटे से --

बेटा, अब, बूढ़ी हो गयी हूँ , तुझसे अब एक बात कहूँ ,

नहीं होता, घर का काम ये मुझसे, लादे मुझको, एक बहू ,

सब्जी खरीदने से लेकर, खाने बनाने तक का, सारा काम,

मेरी भी, अब उमर हो चली , मुझे भी अब चहिये, आराम !


बेटा माँ से -

मै भी, ये चाहता था माँ की , तुझसे मै एक, बात कहूँ ,

सोच रहा था, अकेली है तू , ला दूँ तुझको एक बहु

मेरी पसंद की, जो है प्यारी, चैम्पियन है खेले फुटबॉल

(शरमाते हुए) मुझको भी, बड़ी जल्दी पड़ी है , बुक कर दे, शादी का हॉल


माँ ने सुना, तो सर पकड़ लिया , तू कहे, तो मै ही बुलवा दूँ

फुटबॉल वाली, का क्या करेंगे , अपने गाँव से ही लड़की, ढुँढवा दूँ

बेटा - माँ ,आज के, समय को समझो, और समझो उसका टैलेंट

स्टेडियम में मैच खेल के, लायेगी , घर में पेमैंट

माँ ने समझाया , बेटा , मत कर ये नादानी ,

बेटे ने, माँ की एक न सुनी, कर ही बैठा, मनमानी


लड़की ब्याह के घर आई, पैर लगाना था, चावल भरा कलश ,

हलकी सी, किक से कलश जो उछला , माँ के लगा माँ गिरी फरश

बहु बोली, डोंट वर्री, मै सब ठीक, कर सकती हूँ ,

एक्सीडेंट केसेस के लिए, फर्स्ट ऐड बॉक्स, साथ में रखती हूँ


अगले दिन, वो बोली सास से, सब काम करेंगे, लगा के मन

सारे काम, कुछ ऐसे करेंगे , कि हो जाए, थोड़ा सा फन


माँ बोली - बेटा ,अकेले काम करते करते, मेरी कमर भी दुख जाये

चल सामने की दूकान से, घर में कुछ सब्जी लायें

बहु-- चिंता मत करो, मै सब ठीक कर सकती हुँ

कमर दर्द के लिए, फर्स्ट ऐड बॉक्स साथ में, रखती हूँ

सास -- बात बात पे बॉक्स निकाले , येसब मुझको पसंद नहीं

कब किससे क्या कुछ कहना है , इतनी भी तुझको अकल नहीं

खाने के टाइम से पहले जाकर के सब्जी ले आयें

सब्जी काट के खाना बनाएं , और फिर सब मिल कर खायें


(बहु सामने की दुकान पर चढ़ कर बोली, माँ तुम सामने खड़ी रहो ,

मै यहाँ से कैच मतलब सब्जी देती हूँ )

माँ, तुम्हारी तो कमर दुखे है , मै ही, दुकान पे चढ़ जाऊँ

अब हम कैसे, फन करेंगे, ये मै तुमको समझाऊँ


सब्जी खरीदने के बहाने, खेलेंगे हम छोटे मैच

सब्जी मै थ्रो करूँगी , सारी सब्जी तुम करना कैच

पहले पन्द्रह टमाटर फेंके , उसके बाद फेंके आलू

सास कैच करे, और ये सोचे , ये तो अब हो गयी चालू

सोच रही थी, सास कि, उससे हो गयी , एक बड़ी मिस्टेक

टोकना चाहती थी बहु को , मिस किया, बड़े आलू का कैच


मार डाला री , तोड़ दिया मुँह, क्या कर डाला इसने भगवान

कैसा आलू मारा मुँह पे, बना दिया, मुँह का मैदान

खड़ी खड़ी ऊपर दूकान पे, मिला रही यूं , क्या सुर ताल

मेरा मुँह यूं देख रही क्यूँ , अपना फर्स्ट ऐड बॉक्स निकाल


बहु-- मांजी आप तो, गुस्सा होतीं , बॉक्स की जब मैं, करती बात

घर पे मैने बॉक्स छोड़ दिया, समझ के आप के ये जज़बात

घर पे चलो मैं दवाई लगाऊँ , छोटा मत करो अपना मन

दर्द में भी ,तुम्हे ये समझाऊँ , कैसे कर लें थोड़ा सा फन


सास-- बात बात पे फन चाहे, कैसे मूरख को समझाऊँ

फन से ही तुझे डसवाऊं, जंगल से कोबरा ले आऊँ

घर पे, पहुँच के सोचे सास ये, कैसी मुसीबत आन पड़ी

अब क्या बनाऊँगी खाना, आज तो बस, बना दूँ खिचड़ी


अगले दिन फिर सास ये बोली, चल मिल कर कुछ ले आयें

सब्जी काट कर खाना बनायें , और फिर सब मिल कर खायें

बहु - सासु माँ ,कोई मैच नहीं , आज थोड़ा कर लो, वार्मअप

दोनों जॉगिंग करते करते, पहुँचें सब्जी दूकान पे अब

पूरे रस्ते जौग करेंगे, लगा रहेगा हमारा मन ,

वार्मअप करते करते ही बस, कर लेंगे थोड़ा सा फन !


सास चली जॉगिंग करती , अचानक हुआ, सब मटियामेट

रास्ते में, पैर जो फिसला , वहीं सड़क पे हुई, लम्बलेट

बहु बोली, डोंट वर्री, मै सब ठीक कर सकती हूँ ,

आप, जब भी, साथ में हों, फर्स्ट ऐड बॉक्स साथ में, रखती हूँ


अगले दिन, माँ बोली बेटा, मै जाकर, सब्जी लाती हूं ,

तब तक, बहू नहा लेगी,

बेटा बोला , इसे साथ में लेजा, तू अकेले कैसे काम, संभालेगी

माँ बोली, बेटा चिंता मत कर, मैं सब मैनेज कर लूंगी

छोटे मोटे काम हैं घर के, मै अकेले ही, कर लूँगी !!!!

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