प्यार पर वक़्त की गर्द जम चुकी थी। कॉलेज टाइम में हमारी जोड़ी रोमियो जूलियट के नाम से मशहूर थी। मुझे अच्छी तरह याद है जब पहली बार मैंने उसे गुलाब दिया था, उसने बड़ी बेशर्मी से उसे डस्टबीन में फेंक दिया। मेरी आँखों में पानी था। मैं बिना कुछ बोले लौट आया उसे हमेशा के लिए भूलने की कसम लेकर। लेकिन शाम के वक़्त मेरा दरवाजा खट से बज उठा और इसी के साथ बज उठी प्रेम की वो बांसुरी जिसकी धुन पर हम तीन साल तक लगातार थिरकते रहे। हमने साथ जीने मरने की कसम खाई। एक दूसरे में डूबते तैरते रहे। लेकिन वक़्त कब किसका हुआ है, जो हमारा हो पाता। वक़्त ने किस्मत पलटी। वो M.B.A. के लिए विदेश चली गई, इस वादे के साथ कि जल्द ही लौट कर आएगी और शादी मुझसे ही करेगी। मैं इंतजार करता रहा, उसने अपनी पढ़ाई समाप्त की और कैंपस इंटरव्यू से एक मल्टीनेशनल कंपनी में सेट हो गई। मैं इंतज़ार से थक हार कर ज़िन्दगी की रवानी में बहता चला गया। शादी की, बच्चे हुए और समय के साथ साथ उस लड़की की यादें मस्तिष्क के कब्रिस्तान में दफन हो गई।

और आज पता नहीं कहाँ से ये ऐसी हवा आ गई। पहली बार तकनीक से साक्षात्कार हुआ था। बेटा दसवीं कक्षा में पढ़ रहा था लेकिन कंप्यूटर चलाने में उसे महारत हासिल थी। उसी ने ऑरकुट से मेरा साक्षात्कार कराया। यह मेरे लिए एक नई दुनिया थी। एक आभासी दुनिया जहाँ पुराने दोस्तों को ढूंढा जा सकता था, उन्हें स्क्रैप भेज सकते थे, पुरानी यादें बांट सकते थे। मैं चकित था कि दूरियां इतनी ज्यादा नहीं है जितनी दिखती है। सब अपने आस पास ही है चाहे वह गांव में हो या शहर में, चाहे देश में हो या विदेश में। और मैं बौखलाया हुआ देख रहा था अतीत को मेरे वर्तमान के द्वार पर दस्तक देते हुए। ऑरकुट की दुनिया में टहलते हुए मस्तिष्क के कब्रिस्तान में दफन मुर्दे उखड़ने लगे। उन यादों की बसंती हवा पुनः ज़िंदगी में दस्तक दे रही थी, वो कॉलेज की कैंटीन, चाय की चुस्कियां, ढाबों पर सुलगती हुई सिगरेट और लड़कियों की बातें। डस्टबिन में फेंका हुआ गुलाब जैसे वापिस खिल उठा था, उसकी सुगंध डेस्कटॉप की स्क्रीन से आती प्रतीत होती थी। मुझ पर मदहोशी छाने लगी और मैं अधीर हो उठा, कॉलेज के दिनों में लौट जाने के लिए।

ऑरकुट की दुनिया में कदम रखते ही एक अज्ञात भय भी असीम आनंद के समानांतर चलता जा रहा था। और सर्च के चौकोर डिब्बे में मेरे द्वारा जो पहला नाम लिखा गया था वो था, जाह्नवी।

जाह्नवी जिसके साथ मैंने मेरी कॉलेज लाइफ के यादगार पल बिताए थे, जो एक बार जाने के बाद वापिस कभी लौट कर नहीं आई, जिसकी यादें आज भी परेशान करती थी जब मैं भीगी हुई रातों में रातरानी के पास बैठा हुआ होता, लगता उसकी देह की खुशबू से ये फूल महक रहे है। और अब वो ऑरकुट की इस आभासी दुनिया में मुझे फिर से अपनी और खींच रही थी।

और आखिर मैंने उसे ऑरकुट की दुनिया में ढूंढ ही निकाला। उसका प्रोफाइल देखा। साड़ी पहने उस महिला में वो अल्हड़ सी लड़की कहाँ मिलती। कॉलेज टाइम की एक पतली छरहरी काया वाली लड़की मोटी सी महिला में बदल चुकी थी। जिसकी गुलाबी टीशर्ट पर मैं दिलोजान से फिदा था, गुलाबी साड़ी में आज वो उतनी खूबसूरत नहीं लग रही थी। उसे आभूषण इस कदर नापसंद थे कि चांदी की एक अंगूठी पहनने के लिए भी उसे बहुत मुश्किल से तैयार किया था, वो आज आभूषणों से लदी हुई थी। उसकी आंखों की वो चमक गायब थी जिसने कभी मेरी रातों के अंधेरों में भी रोशनी भर दी थी। क्या ये वो लड़की थी जिस से मैं प्यार करता था? नहीं ये तो कोई और ही महिला थी जो गृहस्थी के बोझ से लदी हुई दिखती थी। ऑरकुट की दुनिया ने मुझे गहरी निराशा से भर दिया था। मैं सोच रहा था काश मैंने उसे ऑरकुट पर नहीं ढूंढा होता। मैं निराश था लेकिन उस से पुनः दोस्ती करने का लोभ नहीं त्याग सका और उसने जल्द ही मेरी दोस्ती स्वीकार कर ली। एक औपचारिक सी बातचीत शुरू हो गई थी,

“हाय”

“कौन”

“क्या बात है? मेरी जान ने मुझे नहीं पहचान।“

“कुछ तो याद दिलाओ।“

“याद करो वो कॉलेज लाइफ। हमारा प्यार। रुठना, मनाना।“

“ओह!”

“आज भी तुम्हें बहुत मिस करता हूँ।“

“और याद दिलाओ न हमारे पुराने दिनों के बारे में।“

“क्या जानु! कॉलेज कैंटीन में हमारा घंटों तक बतियाना भूल गई क्या? क्या तुम्हें याद नहीं वो गुलाब का फूल जो तुमने डस्टबिन में फेंक दिया था। क्या तुम भूल गई जब मैंने तुम्हें पहली बार कर कर गले लगाया था? जब पहली बार तुम्हारे होंठों को चूमा था? क्या तुम सब कुछ भूल गई।“

“नहीं, नहीं। ऐसी बात नहीं। मुझे सब कुछ याद है। बस सुनकर अच्छा लग रहा है। अपना पूरा पता तो भेजो।“

उसके बात करने का अंदाज़ बहुत बदल गया था। मैं अपना पता टाइप करने ही वाला था कि मेरी बीबी आ धमकी। मैं और कुछ काम का दिखावा करने लगा। उसने बड़े प्यार से मुझे कॉफ़ी सर्व की। मैं बीबी के सामने सदैव मर्दाना अकड़ में रहता था, लेकिन उसकी तरफ से कभी कोई शिकायत नहीं आई। उसमें मुझे कभी जाह्नवी जैसी कशिश नजर नहीं आई। मैंने मन को समझा दिया था, अरैंज मैरिज से तो ऐसी ही पत्नी मिलनी थी। घरेलू काम के बोझ से दबी हुई, पसीने से तरबतर, चौका चूल्हा संभालती, पत्नी। गर्लफ्रैंड और पत्नी का फर्क मुझे सदैव परेशान करता रहा। तभी जाह्नवी की यादों ने कभी पीछा नहीं छोड़ा। पत्नी बाल संवारती, मुझे जाह्नवी की हेयर स्टाइल याद आती। पत्नी करवा चौथ पर सजीधजी मेरे सामने होती, मैं सोचता इसकी जगह जाह्नवी होती तो कितनी सुंदर दिखती। यहां तक कि बच्चों की शक्ल में भी मैं जाह्नवी को ढूंढता।

मुझे काम में व्यस्त देख वो लौट गई। मैंने वापिस ऑरकुट पर अपना मोर्चा संभाला। लेकिन जाह्नवी ऑफलाइन हो चुकी थी। और उसके बाद में महीने भर तक उसके ऑनलाइन आने का इतंजार करता रहा। और एक दिन मेरे ख्वाबों में भूकंप की तरह मेरा मोबाइल बज उठा...

“हेलो! कौन?”

“आप सौरभ बोल रहे है।“

एक जानी पहचानी नाजुक सी आवाज़ सुनकर मेरा रोम रोम प्रफुल्लित हो उठा। मैंने झट से पहचान लिया। ये जाह्नवी ही थी।

“हा। मैं सौरभ ही हूँ जाह्नवी।“

“इडियट। क्यों मेरी जिंदगी में आग लगा रखी है।“

मैं चौक उठा। ये क्या बात हुई? मुझे जैसी उम्मीद थी वो कोयल सी मीठी आवाज़ कहां गई? लग रहा था कानों में किसी ने पिघला सीसा उड़ेल दिया हो। मैं तकरीबन मिमियाते हुए बोला,

“क्या हुआ जानु?”

“जानु माय फुट। ऑरकुट पर तूने चैटिंग की थी क्या मेरे पति से। उन्होंने ही ऑरकुट प्रोफाइल बना रखी है मेरी। उन्होंने ही चैटिंग की तुमसे। मेरी शादी शुदा जिंदगी क्यों बर्बाद करने पर तुले हो। कॉलेज लाइफ में भी मेरे पैसों पर तुमने बहुत ऐश किया है ना। जितने रुपये चाहिए ले लो, अपना बैंक एकाउंट नंबर दो। में भेजती हूँ रुपये। जितने चाहे मांग लो। लेकिन अपना मुंह बंद रख।“

मैं जैसे आसमान से धरती पर आ गिरा। मैं एक साधारण से परिवार से था। कॉलेज टाइम में जेब अमूमन खाली ही रहती थी। आज याद आया, कैंटीन का बिल जाह्नवी ही चुकाती। मेरी आर्थिक सहायता भी बहुत करती थी लेकिन मुझे वो अहसान नहीं लगा। मैं बस प्यार के ख्यालों में खोया हुआ था। आज पहली बार मुझे मेरी गरीबी का अहसास हुआ जबकि अब तो मेरे पास अच्छी नौकरी थी। आर्थिक स्थिति भी काफी हद तक सुधर चुकी थी। मैं अपने अतीत पर शर्मिंदा था। अगर हो सकता तो सब हिसाब कर ब्याज समेत जाह्नवी के मुंह पर पैसे फेंक आता। लेकिन उसकी शादीशुदा जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहता था। उसने एक झटके में ही मुझे वास्तविकता का धरातल दिखा दिया था। और मैंने क्या किया?

मैंने अपना ऑरकुट एकाउंट हमेशा के लिए डिलीट कर दिया। और अश्कों से भरी हुई आंखों से मेरी पत्नी को देखा। आज मुझे वो दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत लगी। मैंने उसे कसकर गले लगाया और उसकी बाहों में फूट-फूट कर रोने लगा। बिना कुछ जाने वो मुझसे भी ज्यादा रो रही थी। आज मुझे मेरा सच्चा प्यार मिल गया था।



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