यादों के झरोखे से. ...

मुझे याद आती है….

तुमसे पहली मुलाकात

एक नज़र तेरा देखना

मेरा लूट जाना…


वर्षो तक हमसफर रहना

खट्टे-मीठे लम्हों

का कारवां चलना

और अचानक टूट जाना


वक्त और मेरा थम जाना

याद आता है तेरा

मन्द-मन्द मुस्कुराना..


कंधे पर पड़ा दुप्पटा मेरा

उसे खिंच कर छुप जाना

मैंने कुछ न किया बोलकर

शरारत से मुस्कुराना

मुझे याद आता है….


मेरे माथे की सिलवटों को

तेरा पढ़ जाना..

मान-मनुहार कर सारी

बातें जानकर मेरी

चिंता मिटना

मुझे याद आता है….


होठों को सी कर

नजरों से बातें करना

मेरी हर बात का

ख्याल रखना..

मुझे याद आता है….


मेरी खिंचाई करना

सच्चे-झूठे वाकिये

सुना -सुनाकर

महफ़िल में मुझे छेड़ना

मुझे याद आता है….


मुकेश का गाना

(आफत गले पड़ी है

उसको निभा रहा हूँ)

सुना,फिर छेड़ना..

और मेरा खिलखिलाना

मुझे याद आता है….


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