प्यार का एहसास जितना मधुर होता है उसके टूटने का दर्द बयां करना बहुत मुश्किल । फिर भी वही समझ पाता है जिसने प्रेम और विच्छेदन दोनों सहन किया है। प्रेम में कुछ भी बुरा नही लगता, जिस से आप नफरत करते है वो भी अगर आपके सामने आ जाये तो भी आप उस से नफरत नही कर पाएंगे।

कोई कभी देखता है रोज सूरज निकलता है, चिड़िया चहचहाती है, पेड़ पौधे झूमते है, आपके घर के सामने से कई जानवर रोज गुजरते है पर प्यार में ये सारी चीजे नयी लगती है। रोज वाला सूरज बहुत सुन्दर दिखता है, पंछी तो मेरे लिए ही गाते है और ये सारे जानवर मेरे लिए ही आते है।

उम्र के 23वे बसंत में मुझे प्यार हुआ था। यूँ तो ऐसे ही मै सारे दोस्तों की लव गुरु बनी फिरती थी और किसी को प्यार में गिरने से पहले सौ नसीहते देती थी, इसलिए मेरा प्यार में गिरना उनके लिय एक बड़ा आश्चर्य था। मै खुद भी चकित थी अपनी खुद की भावनाओ को लेकर। पर क्या कर सकते है प्यार में अपनी मर्जी से कौन गिरता है। वो तो अपने आप होनी वाली भावना है।

हाँ प्यार होने के बाद आपको कुछ भी नहीं सूझता है सिवाय प्यार के। और हर ओर बस वही नजर आता है। सोते जागते, टीवी में, किसी मैगज़ीन के फोटो में, मार्केट में और लगभग सब ओर। जहाँ घर में हमेशा लड़ाई होती थी भाई बहनों से सब बंद हो गया था क्योकि प्यार जो हुआ था।


ऐसे ही सपने देखते दिन बीत रहे थे। अब वापस जाने का समय आ गया था मुंबई में पढ़ती थी ना मै और वो मेरा क्लासमेट था। उम्र में बड़ा था दो साल।

अरे अपना नाम तो बताया नही मैंने। मै आभा और मेरा सपनो का राजकुमार अरुन था। हम दोनों मुंबई से एम बी ए कर रहे थे। वही दोस्ती हुई जो ख्वाबो तक पहुच कर प्यार में बदल गई थी। अरुन की ख़ासियत ही यही थी की वो किसी को भी अपनी बातों से प्रभावित कर सकता था शायद इसलिए मै भी उस से इतनी प्रभावित थी।

अरुन मुझ से पहले मुंबई पहुँच गया था तो मुझे पिक करने वही आया था स्टेशन पर। उसे देखते ही झूम उठी थी मै। शायद वो भी काफी खुश था मुझे देखकर। वैसे तो सेमेस्टर शुरू हो चुके थे पर हम ज्यादातर वक़्त कैंटीन में ही गुजारते थे। अजीब ही समय था, जो इस बात को भी नहीं समझ पा रही थी की घर से इतनी दूर कैरियर बनाने गई हूँ। बाइक में आस पास के सारे स्पॉट छान मारे थे हमने। उसमे भी कुछ दोस्त नही जगह की बातें करते तो वहां भी पहुच जाते। अब एग्जाम का टाइम आ ही गया था और कैंपस सिलेक्शन भी शुरू हो गया था, जिसके लिए आधी रात तक हम सब लाइब्ररी में त्तैय्यारी करते थे और वो खुशगवार दिन भी आ गया जब मेरा सिलेक्शन एक टॉप रैंक कंपनी में हो गया। और थोड़े ही दिनों में अरुन भी सेलेक्ट हो गया था। खुद की जॉब और खुद की आज़ाद जिंदगी की कल्पना ही काफी थी खुश होने के लिय। अब मेरा रोज का उप डाउन शुरू हो गया था क्योकि मेरी कंपनी ने तुरंत जॉब ज्वाइन करने कहा था। अब तो और आज़ादी आ गई थी खुद की जिंदगी की । लगता था क्या सपनो सी खूबसूरत लाइफ है सब कुछ अपनी पसंद की। एग्जाम भी हो गए थे अब सारे दोस्त अपनी अपनी कंपनी की जॉइनिंग की तैयारी में लगे थे। ये क्या अरुन की जॉब लोकेशन कोलकाता हो गई थी उसके नेटिव प्लेस में। मेरा तो बुरा हाल था। कैसे रहूंगी उसके बिन यही सोच सोचकर दिल बैठा जा रहा था। जब उसे जाना था उस दिन तो मेरा रो रोकर बुरा हाल हो गया था। मेरे रोने से सबको जो नहीं जानते थे उनको भी पता चल गया की हमारे बीच क्या था। ट्रेन चलने लगी तब भी मै उसका हाथ थामे ही हुई थी पर हाथ तो छोड़ना ही पड़ा।

उसके साथ अब फ़ोन का सिलसिला शुरू हुआ। मोबाइल फ़ोन के शुरुवाती दिन थे । बड़ा सुकून था मन में, उस मोबाइल इजाद करने वाले को तो हर पल दुवाए देती थी। ऐसी ही दो महीने निकल गए। रिजल्ट आ गया था कॉलेज का तो सबको मार्क शीट लेने कॉलेज जाना था। अरुन भी आया दोबारा उस से मिल कर जिंदगी फिर जिन्दा हो गई थी। कितने खूबसूरत दिन थे जिसकी कल्पना हमेशा हर कोई करता था। लेकिन कैसे भी दिन हो बीत ही जाता है। अरुन के वापसी के दिन आ गए फिर से अश्रुओ को आँखों से बाहर आने का मौका मिला। अब तो कोई कॉलेज का साथ भी नही था तो स्टेशन पर लिपट कर तब तक रोती रही जब तक ट्रेन ने जाने की सिटी न बजाई। प्यार के दिन पुरे होने वाले थे।

वापस जाकर कुछ दिन तो अरुन बराबर फ़ोन करता रहा फिर धीरे धीरे उसका फ़ोन कम हो गया। दिन में दस बार फ़ोन करने वाला सिर्फ दो बार काल करता। पूछने पर कह जाता बिजी था ऑफिस में। मै चिंता में घिरने लगी, शरीर तपने लगा जो बिस्तर पकड़ने को मजबूर कर गया। सिर्फ फीवर से पुरे पंद्रह दिन बिस्तर में रही। अरुन सब कुछ जानते हुए भी एक बार आ कर देख भी नही गया तो रहा सहा सारा सब्र टूट गया। कुछ दिनों में दुसरे दोस्तों से पता चला की अरुन की शादी होने वाली है। मेरा मन किसी भी हालत में ये मानने को तैयार नही था की अरुन मुझे छोड़ चूका है।

बदहवास सी मै, ऑफिस में ठीक से परफॉर्म नही कर पा रही थी।अब बुरा होने को कुछ बाक़ी था। रिसेशन शुरू हो गया था पूरी दुनिया में, मै भी उसके चंगुल से न बच पाई और मुझे जॉब छोड़ना पड़ा। लगभग दो महीने अरुन की यादों के साथ नयी जॉब देखती रही, जब पुरे पैसे ख़त्म हो गये तो घर लौटना पड़ा। यहाँ भी अरुन की यादों में ही दिन गुजर रहे थे, लगता था जाने क्या पाप कर दिया है जो किस्मत इतनी रूठी हुई है।

एक छोटी सी मीडिया कंपनी में मार्केटिंग की जॉब मिल गयी थी। वहां का बॉस तो इतना अय्याश था फील्ड में जाने नही देता था और सारा दिन अपनी केबिन में बिठाकर उलटी पुलटी बातें किया करता था। लगता था अरुन होता तो इस बदतमीज को बहुत मारता, पर ये सब अब संभव नही था। किसी तरह दो महीने जॉब खीचा फिर छोड़ दिया। हाय रे फूटी किस्मत न प्यार मिला न जॉब , यही रोना चलता रहा।

मुंबई के बाद छोटी जगह में जॉब करने से जैसे जिंदगी रुक गई। क्या करती जो रोना लिखा था उस से बचकर भाग भी नही पा रही थी। ब्रेकअप और छोटी कंपनी की जॉब से इतनी हतोसाहित हो गई थी। सूख कर काँटा हो गई थी। अब तो खाना पीना सोना रोना कुछ याद नही रहता था बस मशीन सी हो गई थी जिंदगी।

घर में मम्मी पापा लड़के देखते जाते और मै रिजेक्ट करती जाती। अब किसी भी लड़के पे विश्वास नही होता था।

घर में मम्मी काफी बीमार हो गई उनकी देखभाल के लिय जॉब छोड़ना पड़ा क्योकि पापा का ट्रान्सफर कही और हो गया था और मेरी जॉब उतनी मायने भी नही रखती थी ना।

घर आकर तो और भी बेचैन हो गयी। पूजा पाठ की तरफ झुकाव बढ़ गया था। लगता था कही कोई तो है जो मुझे समझता है चाहे वो किसी भगवान की फोटो सही। लगता था साध्वी हो जाऊ, सब कुछ छोड़कर साडी दुनिया से दूर।

एक दिन पड़ोस में रहने वाली मेरी सहेली ने मुझे इतना परेशान देख कर कहा की मुझे योग और ध्यान करना चाहिए। अब ये क्या होता है कौन बताये। टीवी में देखकर योग करती थी।

कुछ दिनों में एक योग शिविर की क्लास का विज्ञापन आया पेपर में। मन न होने के बावजूद सहेली के कहने से योग शिविर ज्वाइन की।

एक वो ही दिन था जिसने मेरी जिंदगी मेरी दुनिया ही बदल दी। मुझे हसना सिखाया, सारे जीव से प्यार करना सिखाया। फिर तो अपनी सारी परेशानी मुझे बौनी लगने लगी।

आज उसी योग और ध्यान के द्वारा मैंने अपने गुरु को पाया जिन्होंने मुझे फिर से जीना सिखाया और अब निकल पड़ी हूँ मेरी तरह और लोगो के जीवन में खुशिया लाने।।

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