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दिन सुहाना था, धूप भी बहुत मद्धम थी , और हल्की हवा भी चल रही थी, अचानक वह मेरे सामने आई थी। रेशमी बाल ठीक करते हुए उसने पूछा, "बोटनी विभाग कहां है? मैं कुछ भी नहीं कह सकता था। उसकी प्यारी आँखें उसके गुलाबी होंठ , मैं उसे इस तरह देखना चाहता था। फिर से उसने पूछा मैंने कहा, "दाहिने हाथ से एकदम सीधे ," वह थैंक्स कह कर चल गयी , लेकिन मैंने उसी स्थिति को खो गया , मैंने आज किसी लड़की क आंख उठा कर नहीं देखा था , और आज मेरी आँखें इस लड़की पर आ कर ठीक गयी जैसे एक चित्रकार को एक तस्वीर बनाने के लिए उनकी प्रेरणा मिल गई हो । जैस ही मैं क्लास में गया लड़कियों के साथ वो भी बैठी थी मैं समझ गया ये मेरी क्लास में ही नया अड्मिशन है । सारे स्टूडेंट्स बात कर रहे थे तब तक सर आ गए और सब का इंट्रो शुरू हुआ । जब उसकी बार आयी उसने अपना नाम समीक्षा बताया ।

अगली सुबह जब मैं तैयार हो रहा था, मैंने खुद को शीशे म अच्छे से देखा, मैंआज बहु अच्छा लग रहा था । मैंने एक नया ड्रेस पहना था और आज एक अलग सी ख़ुशी थी मेरे दिल में । मैं आज जल्दी ही कॉलेज पहुंच गया और समीक्षा का इंतज़ार करने लगा तभी वो सामने से आती दिखाई दी वो आज और भी सुन्दर लग रही थी । वाइस तो मैं लड़कियों से बात करने में बहुत शर्मीला था पर मैंने किसी तरीके से उस से पूछा"क्या हम फ्रेंड्स बन सकते है?"

उसने हाँ में सर हिलाया और हम दोनों की दोस्ती हो गयी । हम रोज़ ही साथ में क्लास में जाते और कॉलेज में भी साथ ही रहते । देखते ही देखते हमारा कॉलेज पूरा होने को आ गया ।

आज हम दोनों के कॉलेज का आखिरी दिन था।जब मैं उदास बैठा था, तो समीक्षा आई और मेरी आँखों में देख का बोली "क्या तुम मुझे भूल जाओगे ?" मेरी आँखों में आंसू थे। उसने कहा," क्या कोई अपने इतने प्यारे दोस्त को भूल सकता हैं?

यही हमारी अब तक की आखिरी मुलाकात थी आगे कभी मिलेंगे भी पता न था ।

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