घर मे घुसते ही विनय ने पत्नी को घूरते हुए कहा-"शांति मैं ये क्या देख रहा हूँ"

शांति-" क्या देख लिया तुमने?"

विनय-"बाहर इतनी सर्दी है,और तुमने माँ को ओढ़ने के लिए कंबल दे रखा है"

शांति-"तो ओर क्या दूं?"

विनय-क्यों घर मे रज़ाई नही है क्या?"

शांति-"फालतू तो कोई नहीं"

विनय-"फालतू ?अभी कल ही तो नई रज़ाई भरवा के लाया था!"

शांति-"अजी तुम जाओ अब मेरे कान न फोड़ो, किसी आये गए महमान के लिए रज़ाई चाहिए कि नही,वह मैंने उठा कर रख दी है।"

विनय को लगा, बरामदे में सफेद कंबल ओढ़े माँ की लाश पड़ी है।


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