यह घटना 1993 की है I यह घटना मेरे पिता जी के साथ घटी थी I उनको ऑफिस के कार्य से एक बार राँची जाना पड़ा I वहाँ पर वे एक गेस्ट हाउस

में रुके थे जो की सुनसान ओर बेहद डरावना था I और वहाँ लगभग सारे कमरे खाली ही थे I यह देख मेरे पिता जी ने सोचा की किसी और गेस्ट हाउस में रात बिताइ जाए परंतु आस-पास कोई और गेस्ट हाउस नहीं था I उन्होंने वहीँ रात गुजारी और वे सो गए I अचानक रात ठीक 12:30

बजे उनकी नींद पानी के गिरने की आवाज से टूटी और उन्होंने बाथरूम में जाकर देखा की कहीं नल तो खुला नहीं छूट गया I सारे नल बंद थे I

पिता जी अपने बिस्तर पर सो गए और उनकी आँख लग गई I फिर वही पानी के गिरने की आवाज से उनकी नींद टूटी I ऐसा लगभग 3 से 4 बार हुआ

तब उन्होंने वॉचमैन को बुलाया और कहा की देखो की कहीं बगल वाले कमरे में नल खुला तो नहीं रह गया I फिर वॉचमैन ने जाकर देखा तो कमरे में

दो लोग सो रहे थे और कोई नल नहीं चल रहा था I उसने पिता जी को बताया की दो लोग सो रहे थे और कोई नल नहीं चल रहा था आप भी सो जाइए I उसके बाद पिता जी अपने बिस्तर पर आकर सो गए I आधे-एक घंटे फिर से वही आवाज I पिता जी ने फिर उस गेस्ट हाउस के मेनेजर को बुलाया और सारी घटना बताया और कमरा बदलने को कहा I कमरा बदलने के बाद यह आवाज आनी बंद हो गई I

आज भी जब मेरे पिता जी जब मुझे या बच्चों को यह घटना सुनाते है I तो उनके मुँह से अनायास ही निकलता है की वहाँ उस रात कुछ तो था I

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