चल भाई , खाना खाते हैं भूख लग गयी , ऑफिस के केबिन से बाहर आते ही मैंने दिवाकर को बोला,

"सर, मैं वो...!!

"क्या वो ? भूख नहीं क्या तेरे को ? " हलाकि मैं बॉस था पर सबका दोस्त भी

"सर, वो आज ऑफिस आते हुए गर्लफ्रेंड की टिफ़िन साथ खा लिया था, ... सो भूख नहीं है " शरमाते हुए दिवाकर बोला ?
"ओह्हो बेटा, क्या गुल खिला रहे हो ? " अब तो तेरे को हफ्ते भर भूख नहीं लगेगी " मैंने हँसते हुए दिवाकर को छेड़ा और कैंटीन की तरफ बढ़ा गया, सहकर्मी इंतजार कर रहे थे , मैं भी बैठ गया , वेटर सहित स्टाफ अलर्ट हो गया पानी सलाद इत्यादि रखना चालू हुआ , मैं अचानक ही ३ साल पहले के अतीत में चला गया


स्थान :जयपुर, एक बड़ी कंपनी का प्रोडक्शन इंजीनियर ड्यूटी पर है , सुबह का वक्त, फोन बजता है ,
"हेलो.. आप फ्री हो क्या थोड़ी देर के लिए ? " उसकी दबी कोयल जैसी आवाज जैसे कोई अपराध हुआ हो,,

"नहीं , बोलो ना क्या बात है ?" मेरा वही उखड़ा सा मूड , जो शायद कभी ठीक ही नहीं रहता था,
"ओके, जब फ्री होना तो एक मेसेज कर देना, और लंच जरूर कर लेना प्लीज "
यार, क्या लंच-लंच लगा रखा है ? अभी मेरे पास बहुत सारा काम है, करने को , प्लीज डोंट डिस्टर्ब मी " मैं बिफर पड़ा .…
"ओके नहीं करुँगी , पर प्लीज खाना जरूर खा लेना " भरभराई सी आवाज बता रही थी की आँखों की सीप में मोती जरूर आ गये होंगे,
मैंने गुस्से में फोन कट कर दिया , इस बीच उसके ३-४ मेसेज आएं , खाना खाया या नहीं ? गुस्सा शांत हुआ ? मैंने कोई भी जवाब नहीं दिया, किसी कलीग को मेसेज करने के लिए व्हाट्सअप खोला , उधर से मेसेज आया " व्हाट्सप्प यूज़ कर लेना पर खाना खा लो पहले i love u baby "
"उफ्फ्फ , पका दिया है तुमने तो , मुझे अब मेसेज किया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा " मैंने गुस्से में १०० की स्पीड से टाइप किया , और अपनी कल्पना में मैं उसका गला भी दबा चूका था !
"ओके स्वीटहर्ट :) नहीं करुँगी , जाते हुए एक मिनट के लिए मिल लेना प्लीज "
"मैं कोई नहीं मिलने वाला," सोचना भी मत अभी , प्रोडक्शन टारगेट बहुत है, बॉस जीना मुश्किल कर रखा है सबका " मेने इरिटेशन में जवाब दिया
"But i know, u can achieve all target whatever u think... My babu.. i will wait for u on road near VKIA Road no 9 bye miss u " इतना कह कर ऑफलाइन हो गयी
मैं सोचने लगा , "ऐसी की तैसी " इतना टाइम कहाँ ? अभी वैसे ही लेट निकलूँगा, फिर २५ किमी ड्राइव करना , घर जा कर नहाना ,धोना और फिर उफ्फ … मैड भी छुट्टी पर है , खाना भी खुद बनाना होगा या फिर होटल पर ,… ना ना खुद ही बनाऊगा , ज्यादा ऑयली खाने को जिम वाले ट्रेनर मना करते हैं,
५ बज गए, सेलफोन जेब से निकाला तो उसका मेसेज था
" कब निकलोगे ? ५ बज गए हैं, प्लीज इतना हार्ड वर्क ठीक नहीं "
मैंने इग्नोर कर दिया
६ बज गए, फिर मेसेज " क्या हुआ, ? I m on 9 No, waiting for u"
"it will take half an hour to arrive me there" मैंने रिप्लाई किया , उसकी जान में जान आई। Smily emocon के साथ हार्ट का सिंबल भेजा !
मैं ऑफलाइन हो गया।
६.३० हो गए, बॉस ने रिपोर्ट के लिए बुला लिया , मन ही मन गुस्सा आरहा था ३० प्रतिशत बॉस पर ३० प्रतिशत "राधिका" पर और ४० प्रतिशत मुझे खाना बनाना पड़ता इस पर "
७ बज गए, ऑफिस की टाइम मशीन से लॉगआउट किया और जल्दी जल्दी पार्किंग में जा कर बीच में फंसी बाइक को निकाला , ७. १५ हो गए थे, मैं बाइक को विमान बना देना चाहता था, उड़कर VKIA 9 no पहुचना चाहता था , मगर ऐसा संभव नहीं था, जयपुर में शाम का ट्रैफिक लोगो को ब्लड प्रेशर का मरीज बना देता है ,
मैं फटाफट दूसरे रास्ते से 9 no आया , बाइक किनारे पार्क किया, हेलमेट उतारा और हिम्मत ना होते हुए भी श्याम जूस सेंटर की तरफ देखा, सुनहरे ड्रेस में वो किसी रियासत की राजकुमारी को मात दे रही थी, उसकी सुन्दर आँखे लगातार उस रोड पर थी जहाँ से मुझे आना था, इस क्षण को मैं देख पा रहा था की मेरा इन्तजार करते हुए वो कितनी खूबसूरत लग रही है, अनायास ही उसके उड़ते बालों ने उसे विपरीत दिशा में देखने को मजबूर किया , जहाँ मैं उससे महज ७-८ मीटर दूर खड़ा था , मुझसे नजरे मिलते ही, अचानक उसकी चेहरे लाखों सुर्ख गुलाब जैसे हो गए, उसके चेहरे की मुस्कान और झक सफ़ेद दांत जैसे हजारों जुगनुओ को दीपक दिखा रहे थे , दौड़ कर मेरे पास आई , मैं भी ३-४ कदम उसकी और बढ़ गया !
"क्या है ? क्यों मिलना था ?"
"कितनी देर कर दिया " इतना काम क्यों करते हो ? मेरे सीने पर मुक्के के प्यार भरे प्रहार पड़े,
"क्या करूँ ? जॉब छोड़ दूँ ? तुम्हरी तरह मेरी कोई इंडस्ट्री नहीं " मैंने उसको छेड़ा
"सच , मशीनो के बीच रह कर आप भी मशीन बन गए हो " इमोशंस ख़त्म हो गयी हैं आपकी , उसकी आवाज में इमोशन्स झलक रहा था !
"चलो पीछे घूमो " उसने मुझे मोड़ दिया और पीठ पर टंगे लैपटॉप बैग की ज़िप खोल कर कुछ डाल दिया
"क्या है ये " मैंने मुड़ते हुए पूछा
"कुछ नहीं है , ज्यादा नाटक मत करिये आप "
"हम्म , ओके मैं जाता हूँ , आज मैड भी नहीं आएगी "
"ओके , बेबी , टेक केयर ऑफ़ यू प्लीज " और फ्री होते ही मेसेज करना , खाना बनाने से पहले बैग जरूर चेक कर लेना " -एक साथ इतने निर्देश
"ओके ओके" , बाइक स्टार्ट करते हुए मैंने कहा, और एक नजर उसे देख कर गियर लगा दिया !!!
वो सुदूर तक देखती रही , जहा तक शायद मैं हूँगा,
घर आने के बाद, सबसे पहले मैंने बैग खोला,
"रेड टेप के बैग में २ टिफ़िन बॉक्स "
मैंने धीरे से खोला, गोल बॉक्स में मेरी मनपसंद भिन्डी मसाला सब्जी , और सोने पर सुहागा दूसरे में आलू के पराठे "
आश्चर्यमिश्रित खुशी मेरे पुरे शरीर में दौड़ गयी थी, मैं निशब्द था , कितना ख्याल है उसे मेरा ? मेरी पसंद का ? और एक मैं ? …कितना स्वार्थी ?? क्या मैं सचमुच मशीनो के बीच रहकर दिल को मशीन बना चूका था.?

"सर … सर , कहा खो गए " एक सहकर्मी के आवाज से मैं अतीत से वर्तमान में आया ,
"कुछ नहीं , सोच रहा था की , खाने में भिन्डी मसाला और आलू के पराठे होते हो कितना अच्छा होता"
हाहाहा , जोरदार ठहाका कैंटीन में कलीग्स के बीच और सब खाने में मस्त हो गए !!

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