उसके पिताजी के गुजरने के बाद तो जैसे सब कुछ बदल ही गया था..।भगवान का शुक्र है कि मां को पेंशन मिल रही थी। एक बेटे की चाह में आज पांच लड़कियों का बोझ सर पर आ पड़ा...। वक्त किसी तरह निकलता गया, चार बहनों की शादी हो गई । परिवार वाले भी मुंह मोड़ चुके थे , यह सोचकर की संपत्ति तो बुढ़िया अपने पांचों बेटियों को ही देगी । अब कुसुम ही बची थी, जिसकी चिंता मां को खाए जा रही थी। मां नेे बड़े दामाद से कुसुम के लिए लड़का ढूंढने को कहा, जवाब मिला- मैं ही क्यों ढूंढु ...? क्या संपत्ति मुझ अकेले को ही मिलेगी ? बाकी तीनों दामाद से भी कहिए । बस हो गया बवाल संपत्ति को लेकर, जुट गई पंचायत.. आखिर में फैसला हुआ की संपत्ति सभी बेटियों मे बराबर बांटी जाएगी।

तब तक कुसुम बोल पड़ी -बांट दीजिए संपत्ति इन लोभियों को, मैं नहीं करूंगी शादी!! मैं मां का बेटा बनूंगी.. और यहीं रह कर मां की देखभाल करूंगी।

कुसुम की बात सुनकर सभी की नजरें झुक गई ।।।

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