मिसिस बजाज की मीठी सी आवाज और शब्दों की गरमाहट शुभांग अपने कानों में महसूस कर रहा था। उसका हाथ मिसिस बजाज के शावर कोट के अंदर था। उसने कस कर मिसिस बजाज को पकड़ रखा था मानो की इसके बाद वह उनसे कभी न मिलने वाला हो। शुभांग का चेहरा अपनी बाँहों में लेते हुए मिसिस बजाज ने थके स्वर में कहा 

 

"काश की मैं पंद्रह साल पहले पैदा हुई होती।"

 

उस रात काम से घर आकर जैसे ही मिसिस बजाज ने लैपटॉप खोला की शुभांग के एक साथ पंद्रह मेसेज आ गए। 

 

" कहा हो? कब से फ़ोन कर रहा हूँ. तुम ठीक होना ?"

 

शुभांग मिसिस बजाज की बेटी की कॉलेज में हाल ही में जुड़े सबसे यंग प्रोफेसरों में से एक था। वो फाइन आर्ट्स मेजर था और दिल बहला देनेवाला चित्रकार।

 

मिसिस बजाज ने दिल पर पत्थर रखते हुए शुभांग को आखिरी मैसेज लिख दिया - 

"तुम जानते हो हमारे बीच में कुछ नहीं हो सकता , समाज हमें कभी स्वीकार नहीं करेगा।  मैं तुम्हारी माँ की उम्र की हूँ , चाहे मैं तुम्हे कितना ही प्यार क्यूँ न कर लूँ कोई फर्क नहीं पड़ेगा। प्लीज़ भूल जाओ वो सारी बातों को और बिताए हुए सारे लम्हों को जो हमें साथ में जोड़कर रखते हैं , भूल जाओ वह कॉफ़ी पर हुई हमारी पहली मुलाकात और फाड़ डालों मेरी सारी तस्वीरें जो रात रात भर जगकर तुमने बनाए थे। यह मेरा आखिरी मैसेज समझना और हो सके तो मुझे माफ़ कर देना मेरी बेटी रिया के लिए।"

 

शुभांग को लगा फिर से मिसिस बजाज के दिल पर दुनिया क्या कहेगी का जूनून सवार हो गया है, शांत होते ही अपने आप वापिस आ जाएगी। लेकिन दो मिसिस बजाज का एक भी मैसेज  नहीं आया न वो शुभांग का फ़ोन उठा रही थी। शुभांग ने व्हाट्सएप्प पर वौइस् मैसेज डाला। 

 

- "समाज की सोचने का वक्त नहीं है अगर तुमने मुझे कभी भी सच्चे मन से चाहा है तो आज बेंड स्टैंड पर वहीँ कॉर्न पार्लर पर तुम्हारा शाम को ७ बजे इंतझार करूँगा। "

 

शुभांग घंटों तक इंतझार करता रहा लेकिन शालिनी बजाज नहीं आयी। न उस दिन... न उसके बाद कभी भी। शुभांग चीजों की गहराइयों को समझता था लेकिन उसने एक सच्चा रिश्ता ही चाहा था और कुछ नहीं। इस बात को वो अपने जहन से निकल नहीं पाया।  लाख कोशिश के बावजूद वह उस हादसे के बाद चित्र नहीं बना पाया। लेकिन कहते है न समय हर दर्द की दवा है।  ऐसा ही कुछ शुभांग के साथ हुआ। कुछ वक्त जरूर लगा लेकिन शुभांग खुद को संभाल पा रहा था। एक दिन वह जुहू के एक कॉफ़ी हाउस में बैठकर कुछ रफ़ ड्राफ्ट्स पर काम कर रहा था तभी उसने शालिनी बजाज को दरवाजा खोल अंदर आते हुए देख लिया। उसने जल्द से अपना मुहँ मेनू कार्ड के पीछे  छिपा लिया। मिसिस बजाज शुभांग के जिगरी दोस्त राहुल के साथ हाथ में हाथ डालें पास वाले टेबल पर एक घंटा बैठी रही। उन दोनों की बातों को सुन शुभांग के पैरों से जाने जमीं निकल गई। वह तुरंत वहां से निकल लिया।  जुहू समंदर के सामने खड़ा वो खुद को प्रश्न पे प्रश्न किये जा रहा था। वो इतना बड़ा बेवकूफ कैसे बन सकता है।  जिस रिश्ते की उसने इतनी कदर की, जिसको भुलाने के लिए सात जनम लग गए वो रिश्ते की बुनियाद ही जूठी थी !!! वो भी उससे दुगनी उम्र की महिला ने उसका इस्तमाल किया। शुभांग की काटो तो खून न निकले वैसी हालत हो गई। 

 

शुभांग के दिल में बदले की ज्वाला जल उठी।  वो मिसिस बजाज के सारे करतूतों को लोगों के सामने लाना चाहता था उनकी प्यारी बेटी को उसकी माँ की असलियत बताना चाहता था। एक उच्च घर की तलाकशुदा औरत कैसे अपने से आधी उम्र के लड़कों का इस्तमाल कर रही है - यह बात वह पुरे समाज और मिसिस बजाज की हाई एन्ड सोसाइटी के लोगों के सामने खोलकर रख देना चाहता था। और यह काम करने में उसने जरा भी देर न की। 

 

कुछ दिनों में शुभांग ने मिसिस बजाज की लाडली बेटी रिया के साथ पहचान बढ़ा ली। एक महीने से कम के समय में उसने रिया का विश्वास जीत लिया। यहाँ तक की रिया सब कुछ छोड़कर शुभांग के साथ भाग जाने को भी तैयार थी। दोनों खूब घूमें बहुत एन्जॉय किया। और ढेर सारी पार्टियां अटेंड करने लगे। दारू पीकर एक दूसरे में खो जाते।  लेकिन यह पुरे समय शुभांग सिर्फ मौके की तलाश में था। उसने कभी रिया को प्यार भरी नजरों से नहीं देखा था। हर बार जब रिया मुस्कुराती तब शुभांग को उसका दर्द याद आता और इस किस्से को अंजाम देने के लिए और भी ज्यादा मक्कम हो जाता। 

 

एक दिन रिया ने शुभांग को अपने घर बुलाया यह कहकर की आज उसकी मोम - शालिनी बजाज अपने दोस्तों के साथ बाहर गई हुई है।  शुभांग ने सोचा की यही सही मौका है । वह रात शुभांग ने रिया के सामने उनके प्रेमालाप को रंग देने का प्रस्ताव रखा।  उसने रिया को उन दोनों की नजदीकियों को कैमरे में कैद कर लेने की व्यवस्था करने को कहा। चित्रकार के प्यार में पागल रिया ने इस प्रस्ताव को ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार किया। दोनों की बेढंगी, नग्न तस्वीरें खींची गई। सुबह जल्द शुभांग एक चिठी छोड़कर वहां से चला गया। उसने लिखा था की वह कुछ काम को लेकर कुछ दिन रिया को नहीं मिल पायेगा। 

 

 यह बात को कुछ दिन बीते होंगे। रिया कुछ बेहाल सी रहने लगी थी।  शालिनी बजाज ने अपनी बेटी के बर्ताव में आए बदलाव को नाप लिया और रिया को सबकुछ सच सच बताने को मना लिया। रिया ने सबकुछ सिरे से बताया। और यह भी बताया की अब उसका बॉय-फ्रेंड उसके फोन कॉल्स और मेसेजस का जवाब नहीं दे रहा है।  हमेशा यही बताता है की वह बिजी है। शालिनी बजाज से अपनी बेटी का दुःख देखा नहीं गया और उसके बॉयफ्रेंड को मिलने के लिए घर पर बुलाने की बात करी। शुभांग को पता था की शालिनी बजाज उसकी बेटी को जान से ज्यादा चाहती है और यह मौका जरूर आएगा। जब रिया ने शुभांग को  बताया की उसकी मोम उसे मिलना चाहती है तो शुभांग ने झट से आने का वादा कर दिया। 

 

दूसरे दिन शाम सात बजे वो रिया के घर के सामने खड़ा था। डोर-बैल बजाई तो मिसिस शालिनी ने दरवाजा खोला।  शुभांग को अपने सामने देख उनके होश उड़ गए। वो कुछ भी समझ पाती उससे पहले रिया दौड़कर आयी और शुभांग को गले से लगा लिया। शुभांग ने रिया को बाँहों से पकड़कर उठा लिया और शालिनी बजाज के सामने उसको चूमने लगा। शालिनी बजाज ने शुभांग को घर में आने को आमंत्रित किया। एक अजीब सी चुप्पी में सब ने साथ में डिनर लिया। रिया शुभांग की बातों से बाहर नहीं आ रही थी। शालिनी ने रिया को इतना खुश पहले कभी नहीं देखा था।

 जब डिनर के बाद रिया सबके लिए ड्रिंक बनाने गई तो मसिस बजाज ने जल्द से शुभांग को अपने कमरे में ले जाकर पूछा - 

 

"क्या है यह सब ? क्यों मेरी बेटी की जिन्दगी ख़राब करने पर तुले हो। तुम्हे और कोई नहीं मिला था प्यार करने को?"

 

शुभांग ने तुरंत जवाब दिया "शालिनी बजाज, तुम्हे लोगो की जिन्दगी से खेलना इतना पसंद है तो किसी और को नहीं हो सकता क्या ?"

 

शुभांग ने शालिनी बजाज को गर्दन से पकड़ते हुए कोने में जकड लिया और बोला -

"अगर २४ घंटों में अपने निकम्मेपन को लोगो के सामने फेसबुक पर नहीं रखा तो मैं रिया की नंगी तस्वीरें इन्टरनेट पर अपलोड कर दूंगा। चौबीस घंटे का समय है आपके पास " इतना कह कर शुभांग वहां से रिया को मिले बिना ही निकल दिया। 

 

रिया जब ड्रिंक्स बनाकर लेकर आयी तो उसने अपनी मोम को फर्श पर रोते हुए पाया। उसके हाथ से ट्रे गिर गई और वो दौड़ कर मोम के पास आयी।माँ को संभाल कर बिठाया।  टूटी हुई शालिनी ने सारी बातें रिया को बता दी।  रिया की काटो तो खून न निकले ऐसी हालत हो गई। उसने तुरंत ही उसकी माँ ने पकड़ा हुआ हाथ छुड़वा लिया और भागकर अपने कमरे में चली गई। उसने कमरा अंदर से लॉक कर दिया। उसके दो सबसे ज्यादा करीबी लोगों ने उसको धोखा दिया था। वो रो भी नहीं पा रही थी। नादान सी रिया के लिए यह धोखा खतरनाक साबित हुआ। 

 

दूसरे दिन सभी अख़बारो में पहले पेज पर बड़ी हेडलाइन में लिखा हुआ था -

" माँ और उसके पुराने प्रेमी ने मिलकर ली बेटी की जान"

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