नींद में गुलाब और फूल

नींद में गुलाब

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पश्चिम की तरफ सरकते सूरज की रौशनी में तीनों सुनहरे हो रहे थे | बालकनी के गुलाब , लड़की के सर के चांदी के तार और दीवार पर गुलाबों की एक पेंटिंग |

लड़की और गुलाब इस वक्त एकसार हो चुके थे |

बालकनी में घर के बहुत से सामानो के बीच कई रंगो के गुलबों के गमले थे जिसमे खिलते गुलाब को देखते हुए लड़की के चेहरे पर मुस्कान खिल जाती थी और उसे हर एक गुलाब में एक गार्डन नज़र आने लगता था |

वो स्कूल में याद किया ‘गार्डनिंग-माय हॉबी’ की पहली से लेकर अंतिम लाइन तक अपने भीतर बुदबुदाने लगतीं | हर लाइन के साथ वे उम्र की सीढियां उतरने लगतीं | और अपने बचपन के आँगन में जा पहुँचती |

जहां सालीवाड़ा बस्तर में पिता फारेस्ट गार्ड थे |

आंवला अमरुद इमली के पेड़ों के साथ गुलाब का एक छोटा सा बागीचा था | उस बागीचे में खेलते हुए एक लड़की सोचा करती कि दुनिया को एक गुलाब का बागीचा होना चाहिये |

लड़की स्कूल में पढ़ती तो कक्षा के बाहर खिले गुलाब को देखती और सब सबक भूलकर सिर्फ इतना याद रख पाती दुनिया को गुलाब का बागीचा होना चाहिये |

लड़की जब बड़ी हुई और कालेज पढ़ने गयी तो बेहद ऊदास हुई कि इतने बड़े कालेज में एक भी गुलाब नहीं है |

लड़की ने जब नौकरी पर गयी तो और उदास हो गयी कि पूना में तेरहवी मंजिल पर उसके आफिस में एक गुलाब के खिलने की कोई जगह नहीं थी |

लड़की ने शादी बनायी तो अपने पति से पहला सवाल किया ‘आपको गुलाब पसंद हैं ?’

इस शहर से उस शहर लड़की ने तीन शहर और सात फ्लेट बदले लेकिन कहीं भी गुलाब खिलाने की जगह नहीं बना पायी |

लेकिन लड़की के सपनों में बराबर गुलाब का गार्डन आता जिसमे में वो सुबह दरवाज़ा खोलते ही उतर जाती |

लड़की का यह सपना पूरा हो पाता कि लड़की का पति किसी और के साथ सेटल हो गया |

उस भीषण समय में भी लड़की के सपने में गुलाब का बागीचा आता, जो कहता “मै हूँ ना“ |

दिन बीतते रहे लड़की अपनी एक लड़की के साथ नौकरी के बीच गुलाब खिलाने लायक जगह ढूढती रही |

उसी दौर में उसने बाज़ार से गुलाबों की एक पेंटिग खरीद कर अपने दीवार पर टांग ली और दिल बहलाने लगी | साल गुजरते रहे लड़की के सर पर चांदी के तार खिचते गये |

लड़की की अपनी लड़की पढ़-लिख कर ‘सेटल’ हो गयी |

सब जिम्मेदारियों मुक्त होकर पश्चिम बालकनी वाला यह फ्लेट जमा पूँजी से इसलिये खरीदा कि सपनों के गुलाब खिला सके |

सफ़ेद –पीले –लाल-गुलाबी-केसरिया कितने रंग होते हैं गुलाब में लड़की गुलाबों को देखते हुए सोचती |

और उसके भीतर गुलाब का एक गार्डन महकने लगता |

लड़की मदहोशी में सब भूल जाती यहाँ तक कि यह भी कि रिपोर्ट में केंसर आया है और शायद गुलाब का अगला बसंत वह नहीं देख पाये |

हाँ लड़की कभी कभी एक सपना दिखाई देता है कि गुलाब के बागीचे में टहलते हुए वो आखरी में सम्मोहक गहरे काले गुलाब के करीब पहुँच गयी है | पास पहुँचते ही काले गुलाब की बड़ी-बड़ी पंखुरियाँ पिंजरे की शक्ल में बंद हो गयी हैं | बाहर खिले गुलाब उसे नाम लेकर बुला रहे हैं लेकिन इस पिंजरे से वो फिर बाहर नहीं आ पाती कभी भी |

बालकनी में अन्धेरा पसरा हुआ है |

गुलाब नहीं दिखाई दे रहे |

सामने के फ्लेट से आती रौशनी में लड़की के चेहरे का एक हिस्सा दिख रहा है वह जैसी थी वैसी बैठी दिख रही है |

वो गहरी नींद में दिख रही है |

गहरी और शायद कभी ना टूटने वाली ||


फूल

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बड़ी देर भटकने के बाद वो फूल तक पहुंचा |

उसने उसके चारों तरफ घूमकर यकीन करना चाहा कि वो एक फूल ही था |

बड़ी हिम्मत कर उसने उसे छुआ और सूंघा भी |
आखिर में हारकर तसल्ली करने के लिए उसने गूगल में टाइप किया "फूल" और सर्च किया |
फूल के बारे में वो बड़ी देर तमाम बाते पढ़ते रहा..तमाम चित्र देखते रहा |
उधर फूल जब उब कर थक गया एक उसांस लेकर झड़ गया ||


||हनुमंत किशोर||

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