एक दिन

समाजवाद मंच पर खड़ा होकर गरीबॊं का पक्ष लेकर भाषण पर भाषण झाड़ रहा था. शायद वह रामराज्य लाने के चक्कर में था. जनता ने उसे खूब उछाला, गले से लगाया. यहाँ तक उसके पैर भी पड़े.

दूसरे दिन

एक दमदार नेता ने उसे दावत पर बुलाया. स्काच पिलाया, मुर्गमुस्सलम भी खिलाया और अपनी पार्टी का महामंत्री भी बना दिया.

तीसरे दिन

देश के सभी समाचार पत्रों में यह खबर मोटे-मोटे अक्षरों मे प्रकाशित हुई कि समाजवाद ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है.

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