एग्जाम का आखिरी दिन था. उस रात पंकज के फार्महॉउस में पार्टी का तय हुआ था.  रात के करीब १० बज रहे थे.  पंकज अपनी कार में पहले अवनि फिर जस्सी और राकेश को पिक करने वाला था. अवनि और जस्सी अपने घरो में झूठ बोलकर जा रही थी. गाड़ी में म्यूजिक जोरों से बज रहा था. पंकज का फार्महाउस गुडगाँव के पास था. करीब आधे घंटे का रास्ता बिना बिजली वाला और कच्चा था.

" अरे राकेश, बियर का इंतझाम  कर लिया है न ?" पंकज ने गाड़ी का स्टीयरिंग घुमाते हुए पूछा.

" अरे हा एकदम. सब इंतझाम हो चूका है" उसने अवनि के सामने गंदी सी हँसी देते हुए कहा.

अवनि और जस्सी एकदूसरे के सामने देख कर हँस रही थी. तभी अवनि खिड़की से बाहर देखती हुई बोली ,

"अरे, यह तो अलीगढ वाला रास्ता है न ? यार, इस रास्ते के बारे में बहुत सुना है. कहते है की यहाँ से गुजरने वाले लोग बहुत कम सही सलामत वापस आते है"

जस्सी को अवनि की बात पसंद नहीं आयी. सब हँसने लगे. तभी एकदम झटके के साथ गाडी रुक गई. दिसंबर की सर्दी की वो रात थी. और करीब साढ़े बारह बजनेवाले थे. सब राकेश की और देखने लगे. राकेश ने तिन चार बार गाडी का स्टार्टर लगाया. लेकिन सर्दी की वजह से वो भी चलने का नाम नहीं ले रही थी. सब गाड़ी में से उतरकर बाहर आये. तभी उस अँधेरे और कच्चे रास्ते पर सामने से कोई औरत आती हुई दिखाई दी. अवनि सतर्क हो गई और बोली

"गाइस, चलो गाड़ी में मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है. एसी भयानक रात में कौन इस रास्ते से निकलता है भला."

" अवनि, तुम खामखा डर रही हो. आसपास गाँव है. और सबके घरों में टॉयलेट नहीं होता है " इतना कहकर राकेश हँसने लगा.

फिर भी अवनि और जस्सी गाड़ी की अंदर जाकर बैठ गई. वो औरत सीधी चली आ रही थी. वो सफ़ेद ड्रेस में बेहद खुबसूरत लग रही थी. पंकज गाड़ी की ड्राईवर सिट पर बैठकर स्टार्टर देने की कोशिश कर रहा था. तभी वह औरत राकेश के पास से गुजरी. राकेश सहम सा गया. कुछ ठीक नहीं लग रहा था अब उसे. वो औरत में से अजीब सी दुर्गन्ध आ रही थी. वो औरत उनकी गाड़ी के बिलकुल सामने वाले पत्थर पर जाकर बैठ गयी. अब राकेश भी डर के मारे गाड़ी में आ गया. उसने पंकज को भी अन्दर बुलाकर गाड़ी का दरवाजा बंध करने को बोल दिया. पंकज पहले से ही ये सब बातों को नहीं मानता था. वो गुस्सा हो गया. उसका सारा प्लान फ्लॉप हो रहा था. उसको फार्महाउस पहुँच कर जल्दी से जस्सी को अपनी बाँहों में लेना था.

उसने खिड़की का शीशा नीचे कर जोर से पूछा ", क्या चाहिए बहनजी आपको ? क्यों इतनी रात गए एसे सामने आकर बैठ गई है. आसपास कोई मिकेनिक हो तो बताओ. कमसेकम गाड़ी ही ठीक हो जाए." सब सहम गए. अवनि का रोना भी शुरू हो गया. जस्सी ने पंकज को शांत हो जाने को कहा. राकेश डर का मारा हक्का बक्का रह गया.

तभी वो औरत वहा से खडी हुई और चलकर गाड़ी की और आने लगी. पंकज ने खिड़की का शीशा बंद कर दिया. अब उसको भी डर लगने लगा.

पंकज ने फिर गाड़ी का स्टार्टर लगाया. और तीसरी बार में गाड़ी फ़ूड फ़ूडाती शुरू हो गई. वो औरत एकदम दरवाजे के पास आ गई थी. उसकी कटारसी तेज आँखे ...  तभी पंकज ने फुल एक्सीलेरेटर से गाड़ी को भगाया. वो औरत पीछे छुट रही थी. सब की जान में जान आ रही थी. आधे घंटे तक कोई कुछ नहीं बोला....गाड़ी फार्महाउस के गेट पर आकर रुकी. सब ने अपना सामान निकाला और पार्टी का माहोल बना दिया. म्यूजिक चलने लगा. रामू भैया ने चिकन बना रखा था. खा- पि कर सब अपने अपने कमरों में चले गए. तभी रात के तिन बजे डोरबेल बजा. रामू भैया अपने घर जा चुके थे. पंकज ने ऊपर वाली खिड़की में से देखा तो वही औरत लालटेन लेकर दरवाजे पर खडी थी....

" अवनि उठ ....अवनि उठ यार ..."

" अवनि ......."

" आज तेरी एग्जाम छुट जाएगी वरना " सीमाने चिल्लाते हुए कहा. अवनि पसीने से लथपथ उठ गई. उसने एक गिलास पानी पि लिया. उसने राकेश को तुरंत मैसेज कर दिया  की वो आज पार्टी में नहीं आ पायेगी क्यूंकि उसकी तबियत ख़राब है.......

 

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