रे बदरा !
तुझसे बात करूं
या मुलाकात करूं ,
चाहती है धरती
इश्क़ का आग़ाज करूं |१|

ख़ाब मेरे सारे हसींन हैं
उन उभरते बॉदलों मे कहीं,
तुमसा दूजा कोई मिला नहीं
क्यूं रीझूं तुझसे, तू कोई गैर नहीं |२|

रे बदरा !
तुझसे बात करूं
या मुलाकात करूं ,
चाहती है धरती
इश्क़ का आग़ाज करूं |३|

ख़ुशनुमा मौसम आया
चल आसमां की सैर करते हैं ,
बेरुख़ी झोंको की चोट खाई
वन्दिसों को अब दूर करते हैं |४|

रे बदरा !
तुझसे बात करूं
या मुलाकात करूं ,
चाहती है धरती
इश्क़ का आग़ाज करूं |५|

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