हम तीनों मित्र हैं। हमारे नाम हैं क ख ग । जब हम छोटे बच्चे थे ,तब अन्य बच्चों की भाँति स्कूल जाते ।स्कूल में पढाई इतना समझ नहीँ पाते और घर में अँग्रेजी माध्यम की पुस्तकें मुश्किल ही कोई पड़ पाता हो , फिर पढ़ने में सहायता करता ,ही कौन ! कहीँ परीक्षा में उत्तीर्ण न हो पाए, तब साल कॊ बचाया नहीँ जा सकेगा । अत: माताजी ने हमें कुछ अतिरिक्त सहायता दिलवाने के उद्देश्य से हमारा टयूशन लगा दिया ।हम तीनों मित्र अब मैडम के घर जाकर टयूशन पढ़ने लगे।अब क ख ग रोज़ पढ़ने लगे । पढ़ने कॊ पड़ता था जाना , मगर हाल वही था. . . न पढाई में मन लगाना, न कुछ समझ में आना । क का क्लासवर्क अकसर ही पूरा नहीँ होता था । ख कॊ भूख बहुत लगती थी । अब रहा ग । वह गाता बहुत था ।थोड़ी देर पढ़ते ही , स्वर उसके गले से ध्वनि बनकर कंठ से बहर आने कॊ मचलने लगते । मैडम शायद 'बिना पिटाई किए पढाने पर शोध ही कर रही होंगी । वह रोज़ नए प्रयोग आजमाया करतीं थीं।



जब क का क्लासवर्क पूरा नहीँ होता तब वहकहतीं, " चलो बगीचे में चेयर रखो। वहाँ बैठ कर लिखना ।" तब थोडी देर बाद कोई बहाना बना, गवहाँ पहुँच जाता । दोनों में किसी न किसी बात परविवाद हो जाता जो पलक झपकते ही महभारत कारुप धारण कर लेता। मैडम के बगीचे के गमले उनकी मध्यस्थता का प्रयत्न करते तो उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता ।मैडम रो तो नहीँ सकती थी मगर उनकी आत्मा रो पड़ती। तब मैडम ग की पीठ पर जोर से एक घूँसा जमा देतीं । ग के स्वर सधते तो वह गाता ..आ..आ..आ....। मैडम कहतीं ,"तुम लड़ाई क्यों करते हो ?"दोनों अपराधी सिर झुका कर खड़े हो जाते ।कहते ,"मैडम सॉरी । माफ कर दीजिए।गलती से टूट गया ।हम आइन्दा ध्यान से खेलेंगे , मतलब पढ़ेंगे ।" इस प्रकार समय बीतता जा रहा था



और परीक्षाएं और अधिक नज़दीक आती जा


रही थीं । मैडम ने छुट्टी के दिन कक्षा चलाने का

फैसला किया । कक्षा में मुनादी पिटवा दी गई

कि रविवार के दिन दो समय का टिफिन ले कर

आना है । बच्चे सुबह आए। मैडम ने उन्हें पढ़ाना प्रारम्भ किया । थोड़ी देर बाद बच्चों कॊ स्नेक्स ब्रेक

मिला । क ख ग ने खूब आनंद मनाया । फिर कक्षा

पुन: लगाई गई । मैथ्स के सवाल जैसे बच्चों की जान लेने के लिए ही बनाए गए हों । क ख ग को

1 2 3 कदापि न भाते । और इसीलिए तो बच्चों के मैथ्स मॆ नम्बर हैं कम आते । कभी बच्चे

गुणा भाग गलत कर देते तो कभी पहाड़े भूल जाते।

इससे अच्छा तो हिन्दी है, उसमें सिर्फ क ख ग ही

होते हैं। क ख ग को क ख ग पढ़ने मॆ बड़ा आनंद आता ।

जैसे तैसे पढ़ते लिखते लंच टाईम हो गया ।

मैडम ने कहा ," आधा घंटे का लंच ब्रेक।"

" क्या हुआ ?" मैडम ने पूछा।

" मैडम ! हमें घर भेज दीजिए।" हम ने कहा ।

"क्यों?"

" खाना नहीँ है।"

तब मैडम ने क ख ग कॊ आडे हाथों लिया ।

" तुम्हें खाना चाहिए? हम देखते हैं ।"मैडम कह

रही थीं । तब मैडम ने खाना बनाया । क ख ग

कॊ खिलाया । तब ब्रेक ओवर हुआ । क ख ग

मन लगा कर पढ़े।

अगले दिन मैथ्स का पेपर था। इसी तरह सब

परीक्षाएं हुईं । आखिर रिज़ल्ट का दिन भी आ पहुँचा । बच्चों की मेहनत रंग लाई थी। क ख ग

सम्मान पूर्वक उत्तीर्ण हुए । मैडम ने अगली कक्षाओं में प्रगति हो, का आशीर्वाद प्रदान

किया ।

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