डर किस बात का है?

कैसे कहूँ की मैं अभी तैयार नहीं हूँ 
जितने हो उतने भी खो दूँ तो?

अभी तो बस मिंटो प्रयास करने पर 
गले के पानी को निगलती हूँ 

तुम वो टेबल थोड़ी न हो 
जो दो बूंदों में निपट जाओगे 

कैसे बताए जो चीज़ की ख़ोज में हो तुम 
वो मैं बड़े संयम से साध चुकी हूँ 

मैं वो न हूँ अब, मैं कभी नहीं थी वो.
बस जाने दो वह कुछ लम्हो को,
वो लम्हें ही कमबख्त थे
जो मुझे उलझा गए.

एकबार एतबार करके तो देखो 
अगर पछताए तो जान से जाऊं 

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