‘‘आइये मिसेज भल्ला मै इंतजार कर रही थी कि आप आये |’’ - नीला ने कहा।
मिसेज भल्ला अपने बालों को झटकते हुये बोलीं - ’’ अरे क्या बताऊं ब्यूटी पार्लर में इतनी भीड़ थी ,मेरा नम्बर ही नही आ रहा था ,आखिर में मुझे कहना पड़ा कि पहले मेरा मेकअप कर दो नही तो मैं जा रही हूं तब जा कर उसने मेरा आउट आफ दी टर्न मेकअप किया ; फिर आ पाई। वैसे तुम्हारी साड़ी बहुत सुन्दर है नई है न ?‘‘
’’ हां मेरे हसबैंड ने गिफ्ट दी है ,साड़ी सेन्टर की है।ं मुझे तो वहीं की साड़ियां पसन्द आती है।‘‘
मिसेज भल्ला ने नहले पर दहला मारा - ’’ मैं तो केवल बुटीक से साड़ी लेती हूँ | कम से कम यह भरोसा होता है कि वैसी कोई दूसरी नही होगी ।’’
मीना बोली - ’’ क्या यार तुम लोग हमेशा कपड़ों और ज्यूलरी की बातें करती हो | हम महिला कल्याण समिति की मीटिंग मे आये हैं ।‘‘
’’ इसी लिये तो महिला कल्याण की बातें कर रहे हैं | ‘‘ कांता ने कहा और समवेत हंसी का स्वर गूंज उठा। गप-शप को विराम दिया सुनंदा जी के आगमन ने।
हड़बड़ाते हुये उन्होने कहा - ’’ सॅारी बहनो, मुझे देर हो गई।‘‘
कांता ने पूछा - ’’ कोई परेशानी है क्या?‘‘
’’अरे मेरी काम वाली बाई ने परेशान कर रखा है रोज बीमारी का बहाना,इस महीने वह चार दिन नही आई तो आज मैंने उसके पैसे काट कर निकाल दिया। पीछे पड़ी थी कि पूरे पैसे दे दो। ‘‘ - सुनंदा ने घड़ी देखते हुये आगे कहा - ’’ अभी मीडिया वाले नही आये मैने तो उन्हे चार बजे का समय दिया था ।‘‘
कांता ने धीरे से कहा - ’’ उनकी भी काम वाली परेशान कर रही होगी | ‘‘

और एक दबी दबी हंसी की लहर दौड़ गई।
तभी रश्मि ने सूचित किया - ’’ लो आ गया मीडिया।‘‘
सुनंदा जी ने तुरंत स्थान ग्रहण किया और माइक थामते हुये बोलीं - ’’ आज हमारी महिला कल्याण समिति की विषेष बैठक है । आज हमें महिलाओं के प्रति होने वाले अन्याय के बारे में सोचना है और उनके कल्याण के बारे में कुछ ठोस निर्णय लेने हैं । सच तो यह है कि आज भी महिलाओं की समाज में कोई अच्छी स्थिति नही है ।आज भी उन्हे दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है। समाज भूल जाता है कि उनका बराबरी का हक है ।‘‘
मिसेज भल्ला बीच में बोली पड़ीं - ’’ मैं तो कहती हूं कि हमें आंदोलन करना चाहिये।‘‘

मिसेज भल्ला क इस प्रस्ताव से महिला - मंडली में खुसुर - फुसुर हों लग |
सुनंदा ने आकर्षण का बिन्दु अपने से दूर जाते देख सबको शांत करने का प्रयास करते हुये कहा - ’’ बहनों कृपया शांत हो जाइये हमें जोश से नही होश से काम लेना है । आज हम अपनी समिति की सदस्याओं से अनुरोध करते हैं कि हमे कुछ बुराइयों को समाज से दूर करने का प्रयास करना होगा। पहला बिंदु तो यह है कि दहेज प्रथा हमारे समाज में बीमारी की तरह फैली है इसके चलते न जाने कितनी बेटियाँ कुंवारी रह जाती हैं कितनी दहेज न ला लाने के कारण जला दी जाती हैं । ....और दूसरी समस्या है कि हम दिन भर घर में काम करते हें पर हमें उसका कोई पारिश्रमिक नही मिलता ।हम उसके लिये भी आवाज उठांएगे। ‘‘

तालियां बजती हैं ।
सभा के बाद कांता ने सुनंदा जी के पास आ कर कहा - ’’मैं बहुत दिनों से आप से कुछ कहना चाह रही थी | ‘‘
सुनंदा - ’’ अरे तो कहिये न हम सब तो एक परिवार है आपस में हिचक कैसी ? ‘‘
कांता - ’’ आज आप का दहेज उन्मूलन पर भाषण सुन कर मेरा साहस बढ़ गया ।मेरी बेटी मान्या ने इसी वर्ष इंजीनियरिग पूरी की है, सुंदर भी है | पर , मेरी पूरी जमा पूंजी उसकी पढ़ाई में खर्च हो गयी अतः मैं दहेज नही दे सकती । ‘‘
सुनंदा - ’’ अरे इतनी लायक बेटी के लिये तो कोई भी लड़का मान जाएगा । दहेज का तो प्रश्न ही नही उठता । ‘‘
कांता को अपने कानों पर विश्वास नही हुआ | उसने सुनंदा जी का हाथ थामते हुए कहा - ’’वही तो मैं सोच रही थी कि आपके बेटे सुमित और मेरी बेटी मान्या का विवाह हो जाये तो कैसा रहेगा ?‘‘
सुनंदा जी का तार सप्तक का स्वर अचानक मध्यम पर आ गया उन्होने कहा - ’’ हां.... क्यो नही बताइयेगा और बताइये आपने पेपर में मेरा लेख पढ़ा? ‘‘

hयह बोलते हुए वे सोच रही थीं ' हद है कांता का तो दिमाग ही खराब हो गया ? हिम्मत देखो मेरे हीरे जैसे बेटे को मुफ्त में हथियाना चाहती हैं । '
उन्होने घर आ कर अपने पति विकास जी को बताया तो वो बोले - ’’ बात में लाजिक है , तुम्हारा तो नाम हो जाएगा पेपरों में फोटो आ जाएगी ।और तुम्हे क्या चाहिये?मैं तो कहता हूं इतना अच्छा मौका चूको मत।‘‘
’’ देखिये आप अपनी नेक राय अपने पास रखिये।एक तो मेरा अकेला बेटा है | वह भी इतना लायक | अरे उसकी शादी किसी प्रभावशाली व्यक्ति की बेटी से करेंगे । सोसायटी में एक जगह बनेगी और दहेज तो बिना मांगे ही वह अपनी बेटी को काफी दे देंगे ।कहने को होगा कि मांगा नही।‘‘
तभी सुमित आ गया उसने बात का सिरा थामते हुए ’’ममा वैसे सुना है कांता आंटी की बेटी बहुत सुन्दर है ।‘‘
’’ खबरदार उसका नाम भी मत लेना। वे लोग फकीर हैं ।‘‘
फिर अपने पर्स से एक लिफाफा निकालते हुए बोलीं - ‘‘बेटा सुमित देखो चन्द्रा जी ने अपनी बेटी का प्रपोजल तुम्हारे लिये भेजा है । बायोडेटा और फोटो देख लो ।‘‘
सुमित वहीं से बैठे बैठे बोला ’’ वह छोड़ो | लड़की का क्या करना है ? मम्मा यह बताइये, चन्द्रा जी कितने करोड़ की बोली लगा रहे हैं ।‘‘
सुनंदा ने आँखें तरेरते हुए कहा - ’’ क्या बेवकूफी की बात कर रहे हो ?‘‘
सुमित ने गंभीर हो कर कहा ’’ मम्मा आप जानती हैं कि दहेज लेना देना कानूनी अपराध है ?‘‘
सुनंदा ने कहा ’’ कानून तो बहुत से हेंं। पर मैंने कितना खर्च करके मेहनत से तुम्हे बनाया और अब ऐसे ही किसी की बेटी को सौंप दे?‘‘
सुमित ने कहा‘‘ हुम्म, तो आप मेरे ऊपर किया गया खर्च वसूलना चाहती हैं?अच्छा छोड़ो यह तो मजाक था | मम्मा ये बताइये अगर कोई लड़की सुन्दर भी हो और दहेज भी मिले तो आप शादी कर लेंगी ?‘‘
सुनंदा बोलीं ‘‘ अंधा क्या चाहे दो आंखें |’’फिर उत्सुकतावश उठ कर सुमित के पास आ गई और धीरे से पूछा - ‘‘क्या कोई तुम्हारी नजर में है ?"
सुमित ने उनकी व्यग्रता का मजा लेते हुए धीरे से कहा - ’’ है तो |’’
’तो अब तक चुप क्यो बैठा था ?’’

फिर धीरे से बोलीं - ’’ पर बेटा दहेज की बात संभल कर करना किसी को पता नही चलना चाहिये ‘‘ ।
’’ माँ मैं आप का बेटा हूं आप हाँ कर दें तो मैं अपने लेवल पर डील कर लूंगा। दरअसल वे भी दहेज की बात बताने में विश्वास नही करते;इसलिये सब कुछ सादे ढंग से हो जाएगा और पैसा मेरे अकाउंट में आ जाएगा।‘‘
’’ अरे वाह तब तो सबके सामने मेरा नाम हो जाएगा । कितने तक की बात तय की है ?‘‘
’’पचास लाख तो पक्का समझो ‘‘।
‘‘ पचा......स ला...ख‘‘ सुनंदा की आंखें फटी की फटी रह गयीं ।
’’ मम्मा धीरे बोलिये दीवारों के भी कान होते हैं ,तो कल मिलवाऊं रिया से ?‘‘
‘‘हुम्म तो रिया नाम है उसका ’’ फिर सुमित को धीरे से चपत मारते हुए बोलीं ‘‘तू तो बड़ा छुपा रुस्तम निकला‘‘।
सुनंदा ने विकास जी से पूछा - ‘‘ आप की क्या राय है ?’’
वे सदा की भांति निर्लिप्त भाव से बोले - ‘‘ बात में लाजिक है,पर सोच समझ लेना’’।
सुनंदा जी ने उनकी बात को अनसुना कर दिया।
एक सादे समारोह में सुमित और रिया का विवाह सम्पन्न हुआ। लोग सुनंदा जी की भूरी - भूरी प्रशंसा कर रहे थे।
नीला ने कहा -‘‘ सुनंदा जी आपने जो कहा करके दिखा दिया | आप उनमें से नही हैं जिनके खाने के दाँत दूसरे होते है और दिखाने के दूसरे - आप कितनी महान हैं ’’।
सुनंदा जी ने विनम्रता से दोहरे होते हुए कहा - ’’ अरे नही मैं महान वहान नही हूँ बस अपने को समाज सेवा के लिये समर्पित कर के आत्मिक सुख मिलता है मुझे’’।
तभी सुमित ने कहा - ’’ मम्मा मीडिया वाले आये हैं आपसे मिलना चाहते हैं ’’।
‘‘ अरे मीडिया को किसने बुला लिया‘‘?
‘‘मम्मा फूलों की सुगंध स्वयं ही फैलती है |’’- सुमित ने मम्मा के कंधे पर हाथ रख कर कहा।।
सुनंदा ने धीरे से सुमित के कान में कहा - ‘‘ देखो किसी को असलियत की कानों कान खबर न हो’’।
‘‘ चिल मम्मा‘‘ - सुमित ने उनका हाथ दबाते हुए आश्वस्त किया।
अगले दिन महिला कल्याण समिति की अध्यक्षा सुनंदा जी की प्रशंसा में समाचार पत्रों के पन्ने रंगे हुए थे। एक ओर सुंदर बहू पचास लाख का दहेज और सोने पर सुहागा - उनकी प्रशंसाओं से महिमामंडित उनका यशगान | वे स्वयं को सातवें आसमान पर अनुभव कर रही थीं ।
अगले दिन सुबह आँख खुलते ही उन्होने नयी नवेली बहू को चाय ले कर खड़े पाया । वे हड़बडा कर उठीं और बोली‘‘ यह बंसी कहां गया पहले दिन ही तुम काम क्यों करने लगी’’?
रिया ने कोमलता से कहा - ‘‘ मम्मी जी मेरे होते आप बंसी काका के हाथ की चाय पियें यह अच्छा नही लगता | इसलिये मैंने ही उन्हे मना किया था चाय बनाने को ’’।
सुनंदा जी को मन संतुष्टि से भर गया | अभी वे इस परम आनन्द की अनुभूति कर ही रही थीं कि उन्होने देखा रिया घर की सफाई कर रही है । वे चिल्लायीं - ‘‘ रमिया कहाँ गई ? बहू क्यों झाड़ू लगा रही है?’’
रिया ने उन्हे टोकते हुए कहा - ‘‘ मम्मी जी मैंने ही उसे मना किया है।’’
सुनंदा ने अपने पति विकास से कहा - ‘‘बहू कितनी सुशील है ! हम कितने भाग्यषाली हैं कि सुंदर बहू ,इतनी संस्कारी और पचास लाख कैश भी ।’
‘‘ हाँ बात में लाजिक है, तुम्हारा इतना इतना नाम जो हुआ सो अलग | अब तो बस तुम मीटिंग करो समाज सेवा करो |‘’-विकास ने कहा।
सुनंदा जी आनंद से हंस दीं - " हाँ वैसे मीडिया ने तो मेरी प्रशंसा के पूल ही बांध दिये | इसको कहते हैं साँप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे।"
तभी रिया ने उन्हे कागज थमाते हुय कहा - ‘‘ मम्मी जी ये मेरे काम का बिल’’।
‘‘ बिल ,कैसा बिल’’?
‘‘ जी मेरा दिन भर के काम का पारिश्रमिक’’- रिया ने कहा ।
‘‘ ये क्या मजाक है तुम घर की बहू हो’’।
‘‘ पर मम्मी जी मैने तो कहीं पढ़ा था कि आप का कहना है , घर के काम का सि़्त्रयों को पारिश्रमिक मिलना चाहिये | यही सोच कर मैने शादी की कि घर बैठे एम्प्लायमेंट मिल जाएगा।’’
‘‘कहा तो बहुत कुछ जाता है पर सब व्यवहार में लागू थोड़े ही न होता है।’’
’’पर आप ये तो मानती है कि हरेक को उसके श्रम का प्रतिदान मिलना ही चाहिये ,अब आप बताइये पापा जी ?’’
‘‘ बात में तो तुम्हारी लाजिक है|’’ - विकास ने कहा।
‘‘ आप तो चुप ही रहिये |’’ - सुनंदा जी ने आँखें तरेरते हए कहा।
‘‘मम्मी जी आज भी तो नारी पत्रिका वाले आपका साक्षात्कार लेने आने वाले हैं न’’? - रिया ने याद दिलाया | उसके इशारे को समझते हुए सुनंदा जी मन ही मन कसमसा उठीं | विवशता में उन्होने उसे बिल के पैसे दे कर छुटकारा पाया | अभी तक उनके मुँह में फैली मिठास अचानक कसैली हो गयी थी।
अब तो स्थिति यह थी कि रिया काम करने को दौड़ती और सुनंदा जी उसे रोकने को। उन्हे भय था कि रिया फिर उन्हे बिल थमा देगी।अतंतः रिया रुंआसी हो कर बोली - ‘‘मम्मी जी अगर आप मुझे काम नही करने देगी तो मैं आपके बेटे का मूल्य कैसे चुका पाऊंगी‘‘।
‘‘ मतलब ?’’
‘‘ सुमित कह रहे थे कि आपने उन्हे इतना पढ़ाया - लिखाया उसका व्यय आपको वापस चाहिये’’।
‘‘ पर बेटा तुम्हारे पापा ने तो पचास लाख दिये हैं न?’’
‘‘क्या पचास लाख ? मेरे पापा के पास तो इतने रुपये हैं भी नही और वे तो दहेज विरोधी है |’’रिया ने कहा।
सुनंदा के पैरों तले धरती खिसक गई उन्होने आवेश में कहा - ‘‘ तुम्हारे पापा को छोड़ूंगी नही उन्होने मुझे धोखा दिया है ।"
रिया ने कहा - ‘‘ मेरे पापा को कुछ मत कहिये , उन्हे कुछ नही पता | वे आपके उसी मुखैटे को सच मानते हैं जो आपने दुनिया के सामने ओढ़ रखा है’’।
’’यह मेरे घर में क्या हो रहा है ’’? सुनंदा जी ने सुमित को आवाज लगायी।
सुमित के आते ही सुनंदा जी ने प्रश्न किया - ‘‘ यह रिया क्या कह रही है ? उसके पापा ने तुम्हे कोई पैसे नही दिये?’’
‘‘मम्मा धीरे बोलिये,अभी कुछ दिनों पहले ही मीडिया ने आप की प्रशंसा के पुल बांधे हैं’’।
सुनंदा जी हताश हो कर बोलीं - ‘‘ तुमने मेरे बेटे हो कर भी मुझे धोखा दिया?’’
‘‘ मम्मा आय एक सारी कि आप से झूठ बोल कर आपका दिल दुखाया | पर मैं मजबूर था। मैं रिया से बहुत प्यार करता हूँ और मुझे पता था कि आप बिना दहेज के शादी के लिये तैयार नही होगी।’’
‘‘मैं पुलिस बुलाऊंगी | ’’ बौखलायी हुई सुनंदा ने कहा।
तभी विकास बोल उठे - " सुनंदा , ये तुम्हारे बच्चे है | माना इन्होने जो किया गलत था पर उन्होने साथ सही का दिया । अब भलाई इसी में है कि जो मुखौटा तुमने समाज के सामने ओढ़ा है उसे सच बना लो । वैसे भी तुम्हारी प्रषंसा का जो परचम लहरा रहा है उसका मान करो। एक बात और ,इनकी बात में लाजिक है ’’।
सुमित और रिया पापा के तकिया कलाम पर हँसने लगे |

सुनंदा जी न धीमी आवाज में कहा - ‘‘बात में लॉजिक तो है.....’’

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