बात उन दिनें की है जब एक नव यौवना के पति उत्तर प्रदेश के एक सुविख्यात चीनी कारखाने में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे थे वह अपने पति के घर भविष्य के अांचल पर खुशहाल जिन्दगी के तरानें की धुनों को प्रतिध्वनित करते हुए पति के सच्चे अनमोल मोहब्बत के एहसासों के अद्भुत मनमोहक जादुई पाश में बंधी प्रिय मिलन के मधुर आशा के सहारे अपनी छोटी सी दुनियां में अपने प्यारे प्यारे दो बच्चोंके संग जिन्दादीली के साथ खुशी से जीवन यापन कर रही थी !

उसे याद आता है जीवन का वह दौर भी क्या था प्यार की मस्ती में चूर ,सच्ची मोेहब्बत के नशे के सुरूर में नवयैवना का मधुमासी चमन जैसा खिला बदन , प्रेमोल्लास में बेला के पुष्प सा महमहाता सुगन्धित हवा के संग सुवासित मन पति की यादों में इश्क की खूशबू समेटे अपने धुन में दुनियादारी निभाते हुए -----------------

उनके आने का दिन उंगलियों पर गिन रही थी ा दिन तो कट जाता थी रातें पहाड बन जाती थी बिना पति के नागिन सी डसती रहतीं थीं !

किन्तु समय की एक खुबी है चाहे जैसे भी हो आखिर कट जाता है ा एक दिन दूर भाष पर पति ने खुशखबरी दी कि वह आ रहे हैं अवकाश मिल गया है कल चल कर परसो शाम तक अपनी दिलरूबा के पास पहुंच जायेगे ! अब उनके आने की खुशी सम्भाले नहीं सम्भल रही थी !

दिन ढला शाम हुई जाडें की अमावस्या की काली लम्बी रात थी कल प्रिय को आना था ! वह बहुत खुश थी पति के यादों के मधुर ख्वाबों रात कट ही जायेगी !

दोनो बच्चे रात को भोजन करने के बाद

रोज की तरह पापा के आने के बारे में बात करके खुश होकर इस निश्चितता से सो गये कि पापा कल हमारे पास होंगे ! बच्चों की खुशी अलग तरह की होती है !

" पापा मेरे लिए ये ला रहे हैं पापा मेरे लिए वो ला रहे हैं "

दोनो इस तरह की बातों के दौरान निद्रा देवी के आगोश में हो गये ! बच्चों की मां की कल्पनाओं की उडान अवर्णनीय थी मन में अप्रतीम हर्षोल्लाश के साथ अभिलासषाओं के भी पर लग गये ! पति की मधुर मधुर यादों के संग मचलता तन मन कब सुसुप्तवस्था में आया पता ही नहीं चला !

और फिर शुरू हो गया ख्वाबों का अनोखा संसार जिसमें कुछ भी असम्भव नहीं होता

आप आसमान में उडने लगेंगे या पेडों पर पहाड हो सकते हैं ! नदी सागर बन सकती है ! कोई राछस राजकुमार बन सकता है ! यहां कुछ भी होन लाजिमी है सपने में !

वह भी सपनो के उडन खटोले पर विचरने लगी ! अचानक ! वह चीखते हुए उठकर रोने लगी !

बच्चे छोटे थे जगने पर भी नहीं जगे ! पति की लााश घर कुुछ लोग लेकर आये हैं ऐसा विभत्स सपना देखी थीी वह ! अब थोडा सम्भलकर बैठी व किसी अनर्थ की आशंका से कांप गयी ! निर्विचार निर्रप्रवाह दिल दिमांग व मन से सपने विचर करने लगी ! नहीं ऐसा कुछ नहीं हो सकता मन को दिलाशा दिया ा बहुत देर तक विचारों में डूबते उतराते बैठी रही .

आज उनके आगमन के दिन का इन्तजार का वक्त जैसे सूरसा के मुंह के आकार की तरह बढता ही जा रहा था मोबाइल तब था नहीं की हर घंटे की खबर मिल जाती ! वह व्यग्रता के मनोभाव में घुली आशा की नयी किरण का दामन पकडें इंतजार के एक एक पल का बदला लेने की खुशी मे विह्वल एक एक पल काट रही थी !

दूसरे ही पल दिल में सपनें का समाया डर निकलने का नाम ही नहीं लेता था " न जाने क्या होगा " शाम पांच बजे तक आने वाले थे रात दस बज गये अभी नहीं आये ! बच्चे फिर समय से सो गये अब विस्तर जाने की हिम्मत नहीं हो रही बार बार वही सपना आंखों पर नाच उठता था ! वह पूरी तरह भयभीत हो जाती थी !

आखिर हुआ वह जो नहीं होना था दो अनजान लोग रात के ग्यारह बजे पति को पकडें हुए बाहर से आवाज दिये जो इनको आइडेन्टी कार्ड पर लिखे पते के सहारे घर पहुंचे थे !

जो सुना कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था , वे ट्रेन में जहरखोरी के गैंग के शिकार हो गये थे पूरा शरीर नीला पड गया था !

कुछ भी बता पाने की स्थिति में नहीं थे उन दोनो अजनवी भलेमानस की वजह से उनकी जान बच गयी थी उन मौत के सौदागरों जहरखुरानों को कोसते हुए पत्नी दहाडे मारने लगी ! बच्चे भी जग गये

दोनो उठकर मां का रोना देख रोने लगे !

पडोसी रोना सुनकर आये ढांढस बंधाया कि जान बच गयी ठीक हो जायेंगे ! फिर भी उन दो अजनवी लोगों का शुक्रिया अदा करना नहीं भूली वह !

फिर वह अपने देखे विभत्स सपने का सच होने के इतना नजदीक होने के बारे में सबको बताया ! " " न जाने क्यों ऐसा होता है ? "

वह बार बार सोच रही थी ! सच्चे प्रेम में ऐसा होता हो उसका दिल कह रहा था !

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