रिक्शा वाले अंकल

"पूजा बिटिया, इतना दूर क्यों बैठी हो? यहाँ आ जाओ...इधर, मेरे पैरो पर...हाँ ...बस बिलकुल एसे ....हररोज यहाँ ही बैठना है तुम्हे ...ठीक है ?"

ग्यारह साल की पूजा कुछ भी बोली नहीं. उसे रिक्शा में आगे बैठना जरा भी पसंद न था. वो जल्द ही घर आने का इतंजार कर रही थी. आज भी हमेशा की तरह वो स्कुल छूटते ही भाग कर रिक्शा स्टेंड पहुंची थी जिससे उसे पीछे सिट पर अच्छे से बैठने को जगह मिले. लेकिन हर बार की तरह आज भी राजू अंकल ने उसे पहले अन्दर नहीं जाने दिया.

" बच्चों, आप सबमे मुझे सबसे ज्यादा पूजा बिटिया पसंद है. पता है क्यूँ ? "

" हा ..हा ...नहीं ..अंकल ...आप ही बता दीजिये" पीछे से कोई बोला.

" क्यूंकि, पूजा बिटिया मेरा हर कहा मानती है. है न पूजा ?" इतना कहकर राजू अंकल ने मुहं पर उड़ रहे पूजा के बालों की लट को कानों के पीछे किया.

पूजा राजू अंकल के कर्कश स्पर्श से सहम गई. पर कुछ भी बोली नहीं.

उस दिन उसने घर जाकर खाना नहीं खाया और होमवर्क ख़तम करके सो गई. पूजा की माँ नीता को उसका बर्ताव अजीब लगा. नीता ने पूजा के बेडरूम में जाकर उसको ब्लेंकेट ओढाया और लाईट ऑफ करके वहा से चली गई.

दुसरे दिन नीता के बहुत बार उठाने के बाद जाकर वो तैयार हुई. आज पी.टी. का पीरियड था. आज स्कर्ट और ब्लाउस पहनना था. सात बजते ही रिक्शा आ गई.

" अरे वाह, आज भी पूजा बिटिया हररोज की तरह टाइम से तैयार है .... आ जाओ बिटिया रानी" नीता ने हँसते हुए पूजा की वाटर बोतल राजू को दे दी.

राजू ने पूजा को अपने दोनों पैरो के बिच में बिठा दिया. पी.टी. की स्कर्ट छोटी होने की वजह से हवा में घुटनों के ऊपर तक उड़ रही थी. पूजा के दूध से सफ़ेद पैरो पर राजू की नजरे टिकी हुई थी. पूजा अपने दोनों हाथ टाइट करके बैठ जाती फिर भी राजू के हाथ कभी न कभी तो उसके कंधो के निचे पहुँच ही जाते.

एक दिन शाम को स्कुल की घंटी बज गई तब जोरों से बारिश हो रही थी. रिक्शा से जानेवालों में सिर्फ दो ही लोग बचे थे. बाकि बच्चों के पेरेंट्स उनको खुद लेने आये हुए थे. पूजा ने अपने मम्मी पापा को ढूंढने की कोशिश की लेकिन फिर उसको याद आया की पापा तो चेन्नई गए हुए है और मम्मी की कार गराज में दी हुई है.

वो चुपचाप से जाकर रिक्शा में पीछे बैठ गई. राजू अंकल ने दिनेश को उसके घर पहले उतार दिया जबकि हररोज उसका घर बाद में आता था. राजू अंकल बार बार उसे आइने में से देख रहे थे. डर के मारे पूजा रोने जैसी हो गई थी. तभी एक दुकान पर राजू ने ऑटो खड़ा कर दिया.

" पूजा बिटिया, मैं अभी आया "

थोड़ी देर में राजू वापिस आ गया और ऑटो को दुसरे रस्ते मोड़ लिया.

" अंकल, यह कौनसा रास्ता है ? इस रास्ते से हम पहले कभी गए नहीं है. "

"बिटिया , आगे बहुत पानी भर गया है इसलिए हम इस रास्ते से जा रहे है."

राजू ने ऑटो एक घर के पास रोक दी. वहा आसपास कोई भी मकान नहीं था.

"बिटिया , आ जाओ. मुझे एक छोटा सा काम है वो ख़तम होते ही हम आपको घर ले चलेंगे."

राजू पूजा को वो घर के अंदर ले गया और फिर आधे घंटे बाद दोनों बाहर आये. राजू ने पूजा को उसके घर छोड दिया. नीता ने राजू को थेंक्स भी बोला. लेकिन उस दिन से पूजा सहम गई थी. पूजा के मुहँ से हंसी चली गई. उसका ध्यान पढाई से हट गया. टीचर्स से कंप्लेंट आने लगी.

हर शनिवार को स्कुल में हाफ डे होता था और आधा दिन राजू पूजा को वही घर में ले जाता था अब वह रूटीन हो गया था.

इसबार मिड टर्म एग्जाम में मैथ्स के पेपर में पूजा फ़ैल हो गई. वो डर गई. डर के मारे उसकी जान निकल गई. मम्मी पापा को वो क्या जवाब देगी .वह उस दिन ऑटो स्टेंड नहीं गई. वो स्कुल छुटते ही मुख्य दरवाजे से बाहर पैदल चली गई. ९ नंबर की सिटी बस में वो बैठ गई, मम्मी ने जो पैसे स्केल खरीदने दिए थे उससे उसने टिकट ले लिया. वो यमुना ब्रिज बस स्टॉप पर उतर गई. उसने एक मूवी में देखा था की जब कुछ पता नहीं चलता है तब एक आदमी पुल पर आता है और पानी में कूद जाता है.

उसने पहली बार यमुना को ब्रिज के ऊपर से देखा. ठंडी हवा चल रही थी.उसके बाल हवा में उड़ रहे थे. उसको बड़ा मजा आ रहा था. वो सोच रही थी इतनी अच्छी जगह से लोग पानी में क्यूँ कूदते होंगे. लेकिन तभी उसको याद आया की वह फ़ैल हुई है और घर नहीं जा सकती है....

पूरी रात निकल गई. नीता ने अमित को फ़ोन कर अभी दिल्ली आ जाने को कहा. अमित के आते ही दोनों ने पुलिस कंप्लेंट भी करवा दी. लेकिन कही से कुछ पता नहीं चल रहा था. नीता का हाल रो रो कर बुरा हो गया था.

रात के दो बजे टेलीफोन की घंटी बजी. दोनों को पुलिस स्टेशन बुलाया गया था. पुलिस ने फ़ोन पर कुछ भी बताने से इंकार कर दिया. दोनों दुसरे ही पल पुलिस स्टेशन पहुंचे. वहा उनके लिए जिप तैयार थी. पुलिस ने बताया की हमें फ़ौरन यमुना ब्रिज पहुचना है. वहा से किसीने हमें फ़ोन किया है. अमित और नीता एक दुसरे का हाथ थामे बैठे थे. सर्दियों के दिन में उनकी सर्दी उड़ गई थी.

यमुना ब्रिज के बिलकुल बगल में पुलिस की जिप रोक दी गई. सबने देखा तो सामने एक भिखारी सा दिखाई देनेवाला बच्चा जिसने सिर्फ फटी हुई पुरानी पेंट पहन रखी थी, वो सामने आया.

" ओ साब, आप आपकी बच्ची का इतना भी ध्यान नहीं रख सकता है ? कूद जाती तो ? अगर अपुन ने सही समय पर उसका हाथ नहीं खिंचा होता तो..."

"और मेमसाब, आपको इतना भी समझ में नहीं आया की वो राजू रिक्शावाला निकम्मा है..हरामी साला आपकी बेटी को इत्ता परेशान कर दिया की वो कूदने आ गई..पूजा ने मुझे सब बता दिया है. आइए वो मेरे घर पर है. अम्मा के पास छोड़ कर आया हूँ. उसके लिए भी दाल रोटी बनवाई है"

नीता और अमित बोखला गए. पुलिस के साथ सब उसके घर पहुंचे. पूजा मम्मी पापा को देखकर डर गई.

" पूजा, डर मत. मैं ने राजू अंकल के बारे में सबकुछ उनको बता दिया है..."

नीता ने दौड़कर पूजा को गले से लगा लिया. नीता ने उस बच्चे को भी गले से लगा लिया. अमित पुलिस को लेकर राजू को गिरफ्तार करने निकल गया. नीता ने वही बैठकर पूजा को अपने हाथों से साथ दाल रोटी खिलाई.

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