मै अपने स्नातक के दूसरे साल में बीकानेर के इंजीनिरिंग कॉलेज में अध्यन कर रह था , एक दिन कमरे पर बैठा अपने व्हाट्सएप्प कॉन्टेक्ट देख रहा था |

जब मोबाइल बंद करने ही वाला था तभी मेरी नज़र एक नंबर पर पड़ी जो किसी संगीता के नाम से सुरक्षित कर रखा था , जो मेरे जयपुर के मित्र की रिश्तेदार थी और ये उसी ने सुरक्षित किये थे | स्वभाविक ही लड़के कब छोड़े ऐसा मौका , बस क्या था मेने भी डाल डाल दिया सन्देश "हेल्लो " लिख के , जबाब में भी "हेल्लो" देख के हिम्मत थोड़ी और बड़ी , दिन बे दिन सिलसिला ऐसे ही परिचय से होता हुआ उस दिन पर जा पहुंचा , जब मुझे पता लगा की उसी शहर में मेरे आगामी दो परीक्षा 7 फरवरी और 14 फरवरी रविवार को जयपुर में होने वाली थी |

बस इसी खुश खबरी के साथ कॉलेज की और निकल पड़ा | रास्ते में ऐसे ही गुनगुनाता जा रहा था , तभी याद आया बेवकूफ़ 7 फरवरी से 14 फरवरी तक तो वेलेंटाइन सप्ताह मनाया जाता है |

शाम को कमरे पर आने के बाद ,

संगीता को सन्देश भेजा , " हेल्लो , क्या कर रही हो ? "

संगीता - "बस कुछ नही बैठी थी " |

मेने फिर सन्देश भेजा " आपको कुछ बताना था "

संगीता - हा बताइये

में - में जयपुर आ रहा हूँ 6 फरवरी को |

संगीता - अच्छा , ये बहुत अच्छी बात है ,

उस रात बाते ऐसे ही होती रही | कुछ दिन निकलने के बाद आखिर 6 फरवरी का दिन आ गया जिस दिन मुझे जयपुर जाने के लिए रेलगाड़ी पकडनी थी | रास्ते में जाते हुए ऐसा लग रहा था की ,मै परीक्षा देने नही , किसी अपने से मिलने जा रहा हूँ |

सुबह आँखे खोली तो देखा रेलगाड़ी जयपुर स्टेशन पर रुकी हुई थी |


"गुलाबी नगरी " जयपुर राजस्थान जो पर्यटको के आकर्षण का केंद्र है , जी हा ! मेरी कहानी भी इसी शहर से शुरू होती है | 7 फरवरी की सुबह , जयपुर की गुलाबी आभा को निहारता हुआ और अतीत के सपने देखता हुआ , मै जा पहुंचा अपने परीक्षा केंद्र पर |

2 घंटे बाद , जब घंटी बजती है , तभी मेरे दीमाक की घंटी एक साथ बजती है | क्यों ना , आज संगीता से मिलने के लिए पूछा जाये

बस पकड़ी और मै पहुँच गया अपने दोस्त के कमरे पर , जो लालखोठी कृष्णा मार्ग पर रहता था |

संगीता को फ़ोन लगाया "हेल्लो मै योगेश ! कहाँ पर हो तुम ?

संगीता - "क्या हुआ , मै तो अपने कमरे पर हूँ |

मै - " मुझे तुम से मिलना है , बताओ कहाँ मिले |"

संगीता - " ह्म्म्म आप बताओ कहाँ हो फ़िलहाल ?"

मै - मै फ़िलहाल लालखोठी कृष्णा मार्ग पर हूँ |

संगीता - " अरे ये तो बहुत अच्छी बात है , में भी उसी साइड रहती हूँ |" आप एक काम करो विधान सभा के पीछे एक पार्क है , वंहा आ जाओ |

बस क्या दोस्तों मै भी सजधज के और एक प्यारा सा गुलाब लेकर निकल गया अपने एक प्यारे से नए चेहरे से मिलने |

10 - 15 मिनट का इंतज़ार करने के बाद , संगीता का फ़ोन आता है , संगीता - हेल्लो कहाँ हो तुम ?

मैं - अरे यार मैं तो कब का पार्क में बैठा आपका इंतज़ार कर रहा हूँ |

संगीता - " अच्छा बताओ कहा पर बैठे हो , मै भी पहुँच गयी हूँ |"

मैं - गेट के बिलकुल सामने वाली बेंच पर |

2 मिनिट बाद , एक 5'5 फ़ीट लंबी ,सूंदर , और जीन्स -टॉप में एक लड़की मेरे सामने खडी थी |

मै - हेल्लो ऍम ई राईट , संगीता ?

संगीता - ह्म्म्म , हा जी मै ही संगीता हूँ |

मैं - गुलाब देते हुए ," हैप्पी रोज डे " संगीता .....आपका , अपना योगेश |

संगीता - हँसते हुए , थैंकू सो मच ,योगेश ...पहली मुलाकात और 20 रुपए का ख़र्चा भी कर डाला |

मैं - नही , बस इस सप्ताह जितना करवा सकते हो ,करवा लो फिर तो सोचना भी मत |

संगीता - अच्छा ऐसी बात है , वैसे भी योगेश मुझे किसी के पैसो से पार्टी करना ये पसंद नही है |

मैं - चलो यंहा से शुरू करते है , और क्या क्या पसन्द है आपको ?

संगीता - पढ़ना , बस खूब पढ़ना , और पढ़ लिख के एक दिन बहुत बड़ी अफसर बनना |

मै - अच्छा , ऐसा क्या , वैसे क्या बनना चाहते हो ?

संगीता - मैं आईपीएस अधिकारी बनना चाहती हूँ , क्योकि ये मेरे भाई का सपना था , जो आज इस दुनिया में नही है , जिसकी विगत 5 साल पहले कैंसर से मौत हो गई |

मै - ( दुखी मन से ) हम्म , भगवन आपकी हर इच्छा पूरी करे |

उस दिन ऐसी ही बाते होती रही , कुछ टाइम बाद हम दोनों अपने अपने कमरे पर आ गए |

खाना पीना खाके , मेने संगीता को फ़ोन लगाया , कुछ टाइम बाद सोते समय , अगले दिन सुबह 11 बजे का नेहरू गार्डन में मिलने का बोल के सो गया |

आज 8 फरवरी मतलब प्रोपोज़ डे का दिन का था, हमेशा की तरह मै सजधज के निकल पड़ा नेहरू गार्डन की तरफ , जंहा संगीता मेरा इंतज़ार कर रही थी |

आज उसे देख के मेरी आँखे चंकाचौन्ध सी गयी थी , क्योंकि आज उसने पंजाबी संस्कृति की पोशाक सलवार -कुर्ता पहन रखा था , बड़ी ही सूंदर लग रही थी |

प्रोपोज़ डे था , हम रह गए लड़के स्वभाविक सही बात है , जाते ही

मैं - " जिससे होती है दिल में हलचल , वो धडकन वो जान हो तुम , जिसे पाने की चाहत है मुझको .......हम्म्म्म (सर खुजाते हुए )

संगीता - लगता है , भूल गए कोई ना मेरा ख्याल तो नही था ऐसा , क्या करे भूल गए आधा प्रोपोज़ हम भी आपको कर देते है |

संगीता - " जिससे होती है दिल में हलचल , वो धड़कन वो जान हो तुम , जिसे पाने की चाहत है मुझको ,वो आरजू वो अरमान हो तुम ...

हो गया जनाब ....क्या बोल रहे थे अब अपना भी बता दो क्या कहने वाले थे आगे ( हँसते हुए ) ...|

मैं - ह्म्म्म , हैप्पी प्रोपोज़ डे आईपीएस संगीता (मुस्कराते हुए )

संगीता- अच्छा , फिर तो पूरा नाम लो डॉक्टर आईपीएस संगीता कुमारी क्योकि मुझे पढने का शोक है तो स्वभाविक सी बात है , डॉक्टरेट करके ही दम लूंगी |

उस दिन आधा दिन उसको सुनता रहा और आधा दिन में उसको सुनाता रहा , ऐसे ही शाम के 7 बज गए पता भी नही चला |

जाते टाइम , संगीता - अच्छा , पेपर देने आये थे योगेश जाकर थोड़ा पढ भी लेना आखिर आज एक आईपीएस को प्रोपोज़ करके जा रहे हो (प्यारी सी मुस्कान के साथ ) |

हम भी ठहरे इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र , कब पढ़ने वाले थे , जाते ही खा पीके और आईपीएस के सपने देखते हुए सो गए |

फ़ोन की घण्टी बजती है , देखा तो ये संगीता का फ़ोन था |

फ़ोन उठा के , मैं - हेल्लो , सुप्रभात डॉक्टर आईपीएस संगीता जी | ( हँसते हुए )

संगीता - वैरी गुड़ मॉर्निंग मिस्टर योगेश कुमार , पता ही होगा आज चॉकलेट डे और मुझे चॉकलेट काफी पसन्द है तो अपने 80 रुपए खर्च लेना बस ज्यादा नही , डेरी मिल्क में नट वाली चॉकलेट ले आना और ह्म्म्म जल्दी आना मेँ आपका वेट कर रही हूँ उसी विधानसभा वाले पार्क में ( ऐसा बोल के उसने फ़ोन रख दिया ) |

क्या था दो दिन हो चुके थे , सोचा आज बिना नहाये ही चलते है , जाते टाइम एक शॉप से 80 रुपए भी ख़र्च लिए |

पार्क में पहुँच के , सलूट मारते हुए योगेश कुमार हाज़िर है , एक 80 रुपए की चॉकलेट के साथ ,

और ह्म्म्म अरे आज ( दीमाक पर जोर देते हुए ) हैप्पी चॉकलेट डे |

संगिता - ह्म्म्म , हो गया ले आयो अब ( हँसते हुए ) |

ऐसी ही बाते करते हुए , आधा दिन हो गया |

फिर अचानक उसे याद आया उसे किसी जानकर को मिलने जाना था जो हस्पताल में भर्ती था |

अलविदा बोल के मैं भी अपने कमरे पर आ गया |

उसे कॉलेज में काम होने की वजह से हमारे टेडी डे , प्रॉमिस डे , हग डे और यहाँ तक की चुंबन वाला दिन भी फ़ोन पर मनाए गए |

14 फरवरी के दिन मेरा एग्जाम था , जिसके बहाने में जयपुर संगीता से मिलने आया था , बिना किसी तैयारी की एग्जाम देने चला गया |

शाम को कमरे पर आके संगीता को फ़ोन लगाया , मैं - हेल्लो , आज का क्या प्रोग्राम है आईपीएस जी ?

संगीता - कुछ नही , 2 मिनिट रुक के , अच्छा खाना नही खाया होगा , मेँ लेके आ रही हूँ आप मुझे नेहरू गार्डन में मिलना ,फिर आपसे ढेर सारी बाते भी करनी है और बाकि बाद में देखेंगे मिल के | ऐसा बोल के उसने फ़ोन रख दिया , फ़ोन रखते ही , मेरे मन भी ख्यालो का झरना सा बहने लग गया ,

क्योकि मैं अपने वो तीन शब्द उसके और मेरे मुह से बोलते हुए देखने वाला था और दुनिया के सबसे अच्छे वैलेंटाइन डे मना लेने के सपने देख रहा था |

कमरे से निकलने के बाद , संगीता का फ़ोन आता है ...संगीता - हेल्लो , योगेश पता है , मै आपके लिए क्या बना के लेके आ रही हूँ ?

मैं - नही | संगीता - "आलू के पराठे " जो मुझे बहुत ज्यादा पसन्द है ....

मैं - जल्दी आओ , मुझे भारतीय लड़को की तरह वो तीन खूंखार शब्द भी बोलने दिल से .. जो अक्सर लड़के अपनी औपचारिकता के लिए बोलते है ...(हँसते हुए )

संगीता - अच्छा जो भी बोलना है , मै आ रही बोल देना , बाबा ....(जल्दी जल्दी में ) मैं फ़ोन रख रही हूँ और मुझे रोड क्रॉस भी करना है |

मै पागलो की तरह उससे मिलने को आतुर पार्क में इधर से उधर चक्कर काट रहा था |

5 मिनिट बाद , रोड की तरफ एक दम काफी शोरगुल सुनाई दिया (स्वभाविक ही रोड की तरफ भागा हुआ चल दिया )

रोड पर पहुँच के देखा , बहुत सारी भीड़ एकत्रित हो रखी थी , वहाँ खड़े एक लड़के से पूछा क्या हुआ भाई भीड़ कैसे है ;

पता लगा किसी रोड क्रॉस करती हुई लड़की को एक कार वाले ने टक्कर मार दी है और लड़की की मोके पर ही मौत हो गयी है |

थोडा रुक के , भीड़ चिर के देखा तो आँखों के आगे अँधेरा छा गया , वो लड़की कोई और नही मेरी संगीता थी , आज भी गत दिनों की तरह सलवार कमीज पहने हुए बाल खुले और हाथ में टिफ़िन लिए हुए रोड के एक तरफ पड़ी थी , सिर से लगातार खून बह रहा था , इतने में पुलिस और एम्बुलेंस भी पहुँच चुकी थी , उठाने के लिए जैसे तैसे हिम्मत जुटाई तभी किसी पुलिस वाले ने धका देके पीछे कर दिया .. रोता बिलखता वहीँ कोने में घुटने टेक के खड़ा रहा ( कुछ टाइम बाद ) जब एम्बुलेंस वाले चद्दर से ढक लेके जाने लगे तो बस बड़ी मुश्किल से हाथ उठे उसे सलूट करने , वो हमेशा कहती थी बडी होके आईपीएस अफसर बनूगीं और सब सलूट करंगे |

5 मिनिट बाद ऐसे ही रोता हुआ पार्क में एक बेंच पर आके बैठ गया , देर रात तक ऐसे ही बैठा रहा है बेजुबान बन के , जैसे कोई मोम का बना हूँ | बार - बार बस उसी का वो प्यारा सा चेहरा , वो प्यारी मुस्कान और वो उसके आईपीएस वाले डायलॉग मेरे सर को कौंध रहे थे , और उसके साथ साथ उसका खून से लथपथ चेहरा भी अँधेरा पैदा कर रहा था | एक बूत की तरह , उसी रात बीकानेर की गाड़ी पकड़ के बीकानेर आ गया | काफी दिन बस उसी ख़यालो में पागल सा अंदर ही अंदर रोता हुआ , बेचैन सा रहने लगा | कहते है , समय के साथ सब को सब को चलना पड़ता है , बुला तो नही पा रहा था , वो सब पर क्या करता कोई चारा भी नही था | दिन बितते गए ; आज उस बात को एक साल हो गया , न ही तो मेने जयपुर अपना एग्जाम सेंटर भरा है , न ही कभी जयपुर जाने की हिम्मत जूटा पाया हूँ |

तैयारी के लिए जयपुर आने वाले था वो स्थागित कर दिल्ली आ गया हूँ ....उस दिन से मेरे लिए 7 फरवरी से 14 फरवरी एक सप्ताह है हर महीने की तरह |

हा , आज भी उसकी याद में आलू के परांठे खा लेता हूँ एक आध टुकड़ा और किसी पास के हॉस्पिटल जाके ब्लड डोनेट कर आता हूँ |








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