राज

जाने क्या राज छुपा रखा है?

टूटे शीशे के उसपार,

बेजुबां ये लहू के छीटें ,

चीख चीख कर बता रहे हैं,

छशायद बिन गूंजी किलकारी,

शायद बिन आजादी बचपन,

शायद बंदिश वाला यौवन,

शायद टूटे ख्वाब और अरमान,

शायद छला हुआ विश्वास ,

शायद टूटा अंतिम आश,

जाने क्या राज छुपा रखा है टूटे शीशे के उस पार,

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