याद आता है वो बचपन जब ठंडियों से ही गर्मियों की छुट्टियों का इंतज़ार रहता था

याद आता है वो बचपन जब महीनो पहले से ही त्योहारों का पता रहता था

याद आता है वो बचपन जब छुट्टी की घंटी सुनते ही दौड़ के घर जाना रहता था

याद आता है वो बचपन जब काम न होने पर नया बहाना तैयार रहता था

याद आता है वो बचपन जब दोस्त के लंच बॉक्स से खाना गायब करते थे

याद आता है वो बचपन जब दोस्तों का होली का गुद्दा खा लिया करते थे

याद आता है वो बचपन जब दोस्तों की कुल्फी गिरा कर हँसा करते थे

याद आता है वो बचपन जब दोस्तों के साथ मेरी वाली तेरी वाली किआ करते थे

याद आता है वो बचपन जब टेस्ट के दिन स्कूल न जाने के लिए बुखार आता था

याद आता है वो बचपन जब सबसे ज्यादा नंबर लाने पर भाव आता था

याद आता है वो बचपन जब कम नंबर लाने पर सर का हाथ मेरे कानो पर आता था

याद आता है वो बचपन "पार्थ" जब डांट खाने के बाद भी हँसना आता था .


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