घुंघरू की आवाज

जिन्दगी के सफ़र में अनेक राही मिलते है कुछ लम्बे समय तक साथ देते है तो कुछ जल्द ही रास्ता बदलकर अपनी अलग मंजिल की तरफ चल पड़ते है | साथ लम्बा हो या छोटा जिंदगी में तो याद वही आता है जिसका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है या कोई अविस्मरणीय घटना उनसे सम्बंधित होती है | रंगा साहब,हां, हम लोग उन्हें रंगा साहब ही कहकर बुलाते थे | इसलिए नहीं की उनका रंग कुछ विशिष्ट था या स्वभाव् रंगीला था,बस किसी ने नाम रख दिया और वह उनकी पहचान के साथ जुड़ गया | रंगा साहब के साथ भी एक ऐसी ही घटना घटी, जो आज भी मुझे याद है ,जिनसे आज आपको जोड़ने की कोशिश कर रहा हूँ |

रंगा साहब से मेरी मुलाकात एक सुबह तब हुई जब मै अपने एक मित्र हरीश चौधरी जी के साथ टहलने के लिए निकला था | रंगा साहब मेरी ही कॉलोनी में अपने बीबी और दो सुंदर एवम होनहार बच्चो के साथ रहते थे | हरियाणा के रंगा साहब निर्माण कार्य से जुड़े थे और दिन का अधिकांश समय अपने निर्माणाधीन परियोजनाओ की देख-रेख में बिताते थे | कभीकभार उनसे मेरी मुलाकात हरीश जी के मेडिकल शॉप पर हो जाती थी | उनके बच्चो की परीक्षाये समाप्त हो गयी थी इसलिए वे अपने मम्मी के साथ हरियाणा चले गए |

मई महीने का अंतिम सप्ताह ,सूर्य का प्रकोप अपने चरम सीमा पर था | दस बजे के बाद ही धरती और आकाश से निकलने वाली गर्मी ने लोगो का जीना मुहांल कर रखा था | ऐसी ही झुलसती गर्मी में एक दिन रंगा साहब साईट से लौटे और आराम हेतु बेड पर लेट गए | थके मादे रंगा साहब को कब नींद आ गयी उन्हें पता ही नहीं चला | आराम के पश्चात जब रंगा साहब बिस्तर करवटे बदल रहे थे तभी उनका ध्यान एक आवाज पर गया, झुन न .. झुन न झुन न | रंगा साहब ध्यानपूर्वक आवाज को सुनने लगे ,उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके कमरे के बाहर कोई औरत पायल पहनकर टहल रही हो | थोड़ी देर तक आवाज सुनने के बाद रंगा साहब अपने आप पर नियंत्रण नहीं पाए और बाहर निकल पड़े ,लेकिन आश्चर्य वहा कोई नहीं था | रंगा साहब बड़ी सोच में पड गए | अगर यहाँ कोई नहीं है तो वो पायल की आवाज कहा से आयी | थोड़ी देर तक वह इसी उधेड़बुन में पड़े रहे ,फिर वहम समझ अपने अन्य कार्यो में व्यस्त हो गए ,लेकिन लाख कोशिशो के वावजूद इस घटना को दिमाग से नहीं निकल पाए |

रात के खाने के बाद रंगा साहब जल्द ही नींद के आगोश में चले गए ,परिणामस्वरूप सुबह उनकी नींद जल्दी खुल गयी | सुबह के तीन बज रहे थे | थोड़ी देर तक और विश्राम करने का विचार करके वे बेड पर लेट गए | तभी उन्हें पायल की आवाज पुनःसुनायी दी |चौकन्ने रंगा साहब ने कमरे में इधर उधर देखा लेकिन उन्हें समझ में कुछ नहीं आया | अब उनके मन में तरह तरह के ख्याल आने लगे | भूत प्रेत से सम्बंधित तमाम कहानिया उनके मन मष्तिष्क में गूजने लगी | जब कोई समस्या सामने आती है ,तो उसके तमाम कारण दिमाग में आते है | रंगा साहब के भी दिमाग में आने वाले विचारो में कुछ ऐसे भी थे जो डर की उत्पत्ति के कारक बन रहे थे | रंगा साहब ने अपनी समस्या उसी शाम हरीशजी को बताई | भूत प्रेत की कहानियो में विश्वास न रखने वाले हरीश जी ने इसे हलके में लिया और मजकिया तौर पर बताया कि शायद किसी चुड़ैल का साया आपके घर पर हो गया है | तभी मै भी वहा पहुँच गया | सबने रंगा साहब के मन का भ्रम बता इसे बड़े हल्के में लिया और उन्हें समझाने की कोशिश की | लेकिन प्रयास विफल रहा | रंगा साहब पूरे दिन किसी से नहीं मिले ,तब हम लोगो को अहसास हुआ कि रंगा साहब नाराज है इसलिए हम लोगो ने शाम को उनके रूम पर जाने का कार्यक्रम बनाया और थोड़ी देर में हम लोग उनके रूम पर पहूँच गए |

रंगा साहब अपने रूम पर प्रसन्नचित्त मुद्रा में थे और हरीशज जी से मिलने के लिए उनकी शॉप पर आने की तैयारी कर रहे थे | हम लोगो को आश्चर्य हुआ | जब उनकी समस्या के बारे में पूंछा तो रंगा साहब हसने लगे और एक कलेंडर की तरफ इशारा करने लगे | हम लोगो की समझ में कुछ नहीं आया , तो पूंछ बैठे | इस पर रंगा साहब ने बताया कि कैलेंडर पर टगी चाभियो के गुच्छे से ये आवाज आ रही थी | फैन के स्टार्ट होने पर कैलेंडर में हलचल होती थी जिससे चाभियो के गुच्छे में लगे घुंघरू आवाज निकाल रहे थे | घुंघरू की आवाज का रहस्य जान हम सभी हँस पड़े |

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लेखक : बृज


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