पुरुष नहीं रोते

अमिय चटर्जी की अंग्रेजी कविता का अनुवाद


मुझे रोना आता था

जब किया अलग उन्होंने मुझे

मेरी मां से

मैं रोया और खूब रोया

दिनों तक

महीनों तक

और फिर मै चुप हो गया


दिन के उजालों ने मुझे सिखाया

कैसे नहीं रोया जाता है

उन चीज़ों के लिए जिन्हें आप चाहते हैं


मेरी किशोरावस्था में

कहा मेरे पिता ने

पुरुषोचित वार्तालाप में

"बेटे, "पुरुष नहीं रोते",

मैंने इस बात को दोहराया हर दिन

गुणा तालिकाओं की तरह

बौद्ध मंत्र की तरह


दोस्तों की मृत्यु हो गई, मर गए मेरे माता-पिता,

नहीं रोया मैं, "पुरुष नहीं रोते"


उस दिन जब ढो रहे थे

छह मृत पुरुष

मिनती के ताजा जीवित शरीर को

श्मशान में,

पंचम सुर में गा रहे थे हजारों पक्षी

कहते हुए "आप सुंदर हैं"

मैं नहीं रोया, क्योंकि

"पुरुष नहीं रोते",


आज मैं देख रहा हूं होते हुए सामूहिक दुष्कर्म

उद्योगपतियों और कंपनियों द्वारा

अपनी धरती मां का

सूख रही हैं उसकी नदियाँ

जल रहें हैं उसके जंगल,

रौंदे जा रहे उसके पहाड़,

मैं देख रहा हूं अपनी मां को नग्न और बंजर,

हँस रहे हैं उसके बच्चे उसके चहुँओर,

मैं अब भी नहीं रोता क्योंकि

"पुरुष नहीं रोते"

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