22 नवम्बर, 2010

BCA कर रहा था मैं उस वक़्त, एक सर पढ़ाते थे उस वक़्त हमें ........सर.

उनकी शादी तय हुई थी 22 नवम्बर, 2010 को. तो पढाई से ज्यादा अब वो प्यार मोहब्बत की बाते करते थे. हमारे कोर्स में एक किताब था मोरल साइंस का जो वो बड़े मन से पढ़ाते थे क्युकी उसमें भी वही प्यार मोहब्बत की ही बाते थी. अब उस समय हलकी ठंडी और उनकी बाते. तो मोहब्बत की खुमार चढ़ना तो बनता ही था.

हमें भी लगने लगा थी की हमारी भी एक होनी चाहिए.

खैर कालेज में तो केवल हम लड़के ही थे,तो सवाल ही नहीं उठता था.

खैर सर ने हमें भी बारात में चलने को कहा था,पर मेरा मन जाने को न था कारण सब मोबाइल पर ही बिजी रहते थे आपने -२ सेटिंग के साथ,तो हम वहां खडे हो कर केवल उल्लुओं की तरह देखने के सिवा करते ही क्या??

सो हमने मना कर दिया पर ये दोस्ती जो ना करवा दे,खैर केवल एक मित्र बारात जाने को तैयार हुआ. अब क्लास रिप्रेजेन्टेटिव होने की वजह से मुझे भी उसके साथ जाना पड़ा. खैर अब जब आ ही गया तो उदास होने का क्या मतलब? तो मन को वहां लगाने लगा. सर हमें देखकर बहुत खुश हुए. बारात ........के लिए निकल पड़ी. चूकिं उस समय मुझे बस का सफ़र सूट नहीं करता था तो मई चुप-चाप बैठा था और मना रहा था कि जल्दी से हम पहुंचे.खैर दो घंटे में हम ........ पहुँच गए. मैं तुरंत हैंडपंप की ओर लपका मुँह धोने के लिए. वहां पर एक लड़की अपना मुँह धो रही थी,शायद लड़की वालों की तरफ से थी. पर बहुत समय लगा रही थी. बहुत ही गुस्सा आ रहा था उसके ऊपर उस समय पर कुछ बोल भी नहीं पा रहा था मै.तभी मेरा मित्र मुझे खोजते हुए वहां पर आ गया और बोला अरे यार सर बुला रहे है सबको स्टेज पर. यह सुन कर वो लड़की अपना मुहँ उठा कर हमें देखने लगी. साबुन या शायद कोई फेस वाश लगाया था चेहरे पर उस समय सो चेहरा नहीं देख पाए हम लोग. मुझे लगा शायद वो मुस्कुराई थी. उसके मुस्कराहट में कुछ अलग ही नजर आया मुझे. पर अब मुझे गुस्सा आने लगा था अब पर मेरे कुछ बोलने से पहले ही वो हैंडपंप छोडकर एक किनारे हो गयी.खैर मैंने जल्दी से अपना मुहँ धोया और स्टेज की तरफ चल पडा. वहां पंहुचा तो सर आपने सालियों में मस्त थे तो हम भी स्टेज के एक किनारे जा कर खडे हो गए.मेरा मित्र तो सभी के साथ घुलमिल गया पर मै एक अजीब से उलझन में था शायद. तो मै चुप ही रहा हालाकिं कुछ ने बात करने की कोशिश की पर कोई रिस्पांस ना पाकर वो भी इधर उधर हो गयी.

कुछ समय बाद जयमाल की रस्म शुरू हुई. आप तो जानते ही है इस समय कुवांरे लड़के-लडकीयाँ अपना-अपना खोजना शुरू कर देते है. मै भी यही सोचकर आया था पर पता नहीं क्यों अब कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था. खैर जयमाल था तो लोग आते आशीर्वाद देते,फोटो खिचवाते और चले जाते.हमें भी अंत में बुलाया गया तो हम भी स्टेज पर गए तभी लड़की पक्ष की तरफ से कुछ लड़कियां भी स्टेज पर आई,तो हम सभी चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी. दूल्हा-दुल्हन पर फूल फेकनें के साथ-२ आपस में भी फूलों का आदान-प्रदान होता रहा पर मै आपने में. ही खोया था तभी एक फूल मेरे चेहरे से टकराया मैंने लडकियों की तरफ देखा तो एक लड़की मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी. मुझे लगा कि मैंने ये मुस्कराहट पहले भी कहीं देखी है पर कहाँ ?? वो लड़की भी फुल मेकअप में थी तो मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्युकी मुझे मेकअप पसंद नहीं है. पर उसकी ड्रेस अच्छी थी.

मेरी तरफ से कोई जवाब न पाकर शायद वो उदास हो गयी और स्टेज से नीचे चली गयी. मैंने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया.पर मुझे उसकी मुस्कान परेशां कर रही थी. अब खाना चलने लगा था तो हम भी टेबल खली होने का इंतजार करने लगे, इस दौरान सब अपनी-२ स्टेज पर की गयी हरकतों पर चर्चा कर रहे थे पर मै अब भी लगभग खोया ही था. खैर टेबल खली होते ही सब कुर्सी पर कब्ज़ा करने लगे तो मै भी जैसे जगा. मैंने भी एक कुर्सी हथिया ली. हम खाना परोसने का इंतज़ार करने लगे तभी कुछ लड़कियां भी खाना खाने के लिए हमारे सामने की टेबल पर बैठी. अब सब लड़के उधर ही देखने लगे. एक लड़की उसमे उदास सी दिख रही थी.

तभी मित्र ने कहा अबे वो उदास सी लड़की बार-२ तेरी ही तरफ देख रही है. मैंने देखा तो वो सही था. वो लड़की रह-२ के मेरी तरफ ही देख रही थी पर एक अजब की उदासी के साथ. मुझे लगा कि मैंने उसे कही देखा है पर कहाँ?? अब मुझे आपने उपर खीझ सी होने लगी कि कितना पागल हूँ मै. मजा लेने के बजाय खुद को सजा दे रहा हूँ मै फालतू की बाते सोचकर. तो मैंने एक बार उस लड़की की तरफ ध्यान से देखा और फिर सर झटककर खाने पर ध्यान देने लगा. पर अभी भी कुछ परेशां सा कर रहा था मुझे....

अचानक दिमाग में एक धमाका सा हुआ. मै कहते हुए एकाएक रुक गया. अब सब कुछ साफ़ हो चूका था.

मैंने फिर से एक बार उस लड़की की तरफ ध्यान से देखा पर अब मुस्कुराते हुए. मै पहचान चूका था उस ड्रेस को जो उस उदास लड़की और स्टेज की फूल वाली लड़की की थी. मै पहचान चूका था उस मुस्कराहट को जो उस साबुन वाले चेहरे के पीछे और उस स्टेज वाली लड़की के चेहरे पर था पर इस समय वो चेहरा उदास था. वो मेकअप उतार चुकी थी गजब की खुबसूरत लग रही थी. भगवान ने मेरी सुन ली थी....या शायद सबकी सुन ली थी क्योकि अब सब उसी को देख रहे थे,पर साथ-२ मुझे भी क्योकिं उसकी नज़रे बार-२ मुझे ही देख रही थी. अब उसके चेहरे पर मुस्कान वापस आ चुकी थी क्योकिं अब मै भी मुस्कुरा रहा था.

अब मै चाहता था कि ये रात कभी ख़त्म ना हो हम यूँ ही एक दुसरे को देखते ही रहे...आज तक मै किसी भी शादी में रातभर नहीं जगा था पर आज की रात कुछ खास थी. मेरे दोस्त पीने का प्लान बनाने लगे पर मुझे तो होश में रहना था तो मैंने नींद आने का बहाना किया,वो सब चले गए तो मै उस लड़की को खोजने लगा. मैंने देखा कि वो मंडप में सब साथ बैठी है पर बिलकुल उदास.

मै धीरे से उसके पीछे बैठ गया और उसे निहारता रहा जी भरके..पर वो एकदम खामोश,दुनिया से अनजान बैठी थी. तभी कोल्डड्रिंक चलने लगा मैंने ले ली अब जब वो लेने के लिए पीछे मुड़ी तो मुझे जस्ट आपने पीछे देख उसके चेहरे पर वही मुस्कान आ गयी,कुछ पाने की ख़ुशी, कुछ पूरी होने की ख़ुशी........

क्रमशः ...................................................



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