आज एक 4 साल पुराने मित्र से 6-7 महीने (लगभग) बाद मुलाक़ात हुई। साथ में इनकी माता जी भी थी।
हालांकि इनसे सोसल मिडिया के माध्यम से हाल चाल हो जाती थी लेकिन पिछले कुछ महीनो से इनका रिप्लाई आना कम हो गया । मैंने भी सोचा लगता है अपने भविष्य को लेकर चिंतित होगा (जैसे ग्रेजुएशन के बाद अक्सर लोग होते है) इसलिए पढ़ाई लिखाई में ज्यादा ध्यान दे रहा होगा ,अतः मैंने भी मैसेज न करना ही ठीक समझा।
वैसे ये महाशय कुंभकर्ण टाइप के थे अगर निद्रा में है तो मजाल किसी की बात सुन ले , भूकम्प आने पर भी ये बन्दा नींद में ही था ,बस सोने का मौका मिलना चाहिए । लापरवाही तो कूट कूट के भरी थी न घर की चिंता न पढ़ाई की , इनकी माँ हमेशा इन्हें नालायक कहती थी फिर भी इनका जीवन बहुत अच्छे से और ख़ुशी के साथ बिना किसी टेंसन के आगे बढ़ रहा था।
इतने दिनों बाद मुलाक़ात हुई तो अलग ही ख़ुशी थी। दोस्त और उनकी माता जी को घर ले आया । नास्ता , भोजन होने के बाद उनकी माता जी यानि मेरी ऑन्टी जी कुछ देर बात करने के बाद आराम करने लगी।
लेकिन हमारी बात कहाँ खत्म होने वाली थी । ऑन्टी से बात करते समय बातों बातों में ये पता चला की लापरवाह और एक नम्बर का सुत्तकड(ज्यादा सोने वाला) लड़का बदल चुका है। अब सुबह जल्दी उठ जाता है टहलने जाता है घर का भी काम करता है और आज कल तो माँ से खाना पकाना भी सीख रहा है, और भी कई अच्छे बदलाव हो रहे है इसकी जिंदगी में।
ऑन्टी तो नींद में थी । हमारी बातें शुरू हुई बात बात में पता चला की महाशय की महाशय ने एक गर्लफ्रेंड बना ली है दोनों एक दूसरे को शिद्दत वाला प्यार करते है एक साथ जीने और मरने की कसमें भी खा चुके है। कुछ समय बाद(शायद जॉब मिलने के बाद) शादी का भी प्लान था।
दोनों सुबह सुबह एक साथ टहलने जाते है , हाल ये है कि हमारे परम् मित्र जो किसी के जगाने से नही उठते थे आज कल खुद सुबह फोन करके अपनी मैडम को जगाते है।
उसने बताया कि मेरी मैडम को खाना पसंद है इसीलिए मै थोड़ा बहुत बनाना भी सिख रहा हूँ।
और भी कई बातें हुई जिसमें महाशय केवल मैडम की बड़ाई ही करते नजर आ रहे थे ,मैडम को ये कलर पसन्द है, मैडम को ये ड्रेस पसन्द है ,मैडम को पढ़ना पसन्द है मैडम को नौकरी करना पसंद है तमाम तरह की खूबियां बता रहे थे जैसे बाकि बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड की बताते है।
मै चुपचाप उसकी बातें सुन रहा था तभी अचानक से उसने पूछा की क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड बनी?
मैंने कहा 'नही मित्र '। अभी तक कोई मिली नही। फिर मैंने ये बात टाल दी।
तमाम तरह की और भी बाते होने लगी और इन्ही बातों से लगा वास्तव में काफी बदलाव हो गया है इसमें। इसी बीच ऑन्टी की नींद खुल गई शाम भी हो चुकी थी दोनों को अभी घर भी जाना था। मेरी माता जी भी ड्यूटी से लौट चुकी थी । उन्होंने भी दोनों से मुलाक़ात की।
मैंने भी ऑन्टी से पूछा की इसकी शादी कब करवा रही है । तो उन्होंने मित्र को दुलारते हुए बोला की एक ही लायक बेटा है जॉब लग जाए तब शादी कर दूंगी। फिर मैंने उनकी माँ के और उसने मेरी माँ के पैर छू कर आशीर्वाद लिए और दोनों चले गए।
उनका मित्र को दुलारना और लायक बोलना मेरे दिल को छू गया । मैंने मन ही मन उसकी देवी समान गर्लफ्रेंड को दिल से धन्यवाद दिया जिसकी वजह से कभी नालायक, लापरवा बोलने और हमेशा सबके सामने डाटने वाली माँ अपने बेटे को दुलारते हुए और लायक बोलते हुए मन ही मन में फूली नही समा रही थी।
आज ये बात वास्तव में सही लग रही थी कि एक आदमी की सफलता या बदलाव के पीछे एक महिला का हाथ होता है।

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