एक लम्बी कहानी: पहला भाग

वो चुपचाप शांत सा, गोद मे कॉलेज बैग लिये बैठा था और आटोरिक्सा अपनी सामान्य रफ्तार से शहर के यातायात से दूर शांत सी एक सड़क पर चला जा रहा था कि अचानक आटो में ब्रेक लगने से वो एक झटके से आगे की ओर झुक गया और बैग जो अब तक उसकी गोद मे था वो नीचे गिर गया, और एक पहचानी सी आवाज बडे तीखे स्वर में सुनाई दी, "चलो नीचे उतरो अमन, तुम्हे तो समझ नही आता ना, और ना ही तुमसे पाँच मिनिट इन्तजार किया जाता" अमन चुपचाप उतरा और शिवानी के पीछे उसकी स्कूटी में बैठ गया, और अब शिवानी ने शान्त सड़क मे अपनी स्कूटी की रफ्तार बढा दी, और कुछ ही देर में दोनो कॉलेज की पार्किंग में थे रास्ते मे शिवानी ने ना जाने क्या क्या कहा, अमान तो जैसे किसी प्रतिमा की तरह चुपचाप बैठा रहा।

अमन इस इंजीनियरिंग महाविद्यालय में तृतीय वर्ष का छात्र था और शिवानी अभी प्रथम वर्ष मे ही थी.....
क्रमश:


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