लव डावांडोल


तीन साल से वो विशाल से एक तरफ़ा प्यार में थी। वो रात दिन जुनून की तरह उसके दिलो दिमाग पर छाया हुआ था। पर विशाल न उसे खुल के हाँ बोलता और न मना करता था। बस वो इस उम्मीद में थी कि शायद एक दिन विशाल लौट आये और उससे शादी करे। विशाल लौटा ज़रूर पर अपनी शादी का कार्ड देने !

रोहिणी तेईस साल की खूबसूरत लड़की थी। घर में उसे छोटी,रूही नाम से पुकारा जाता। बड़ी बड़ी ऑंखें और कमर तक लम्बे बाल जिन्हें वो अक्सर खुले ही रखती थी। घर में माता पिता के अलावा एक बड़ी बहन रमणिका थी। रमणिका एक डॉक्टर थी जिसकी सात साल पहले एक डॉक्टर से शादी हुई थी। विशाल से उसकी मुलाकात तीन साल पहले बरेली में अपनी मौसी के घर हुई थी। विशाल उसके मौसेरे भाई वरुण का दोस्त था। दोनों दिल्ली में इंजीनियरिंग कर रहे थे। छोटी सी मुलाकात में विशाल उसके दिल में उतर गया था, हालाँकि वो देखने में बहुत ही साधारण सा था। दोनों के बीच पत्रों का आदान प्रदान शुरू हो गया। विशाल को पढाई खत्म करते ही अमेरिका से जॉब ऑफर आ गया और वो चला गया। रोहिणी एक साथ कई कम्पटीशन एक्साम्स की तैयारी में लगी हुई थी। कई कई दिनों तक विशाल का कोई खत नहीं आता था, तो उसकी पढाई डिस्टर्ब सी रहती। उसने विशाल से रोजाना संपर्क में रहने के लिए इंटरनेट सीखा, याहू पर अपना अकाउंट बनाया ,उन दिनों इंडिया में नेट नया नया ही आया था, घर पर तो कंप्यूटर नहीं था तो वो रोज़ साइबर कैफ़े जाती । विशाल के लिए अक्सर लम्बे लम्बे मेल लिखा करती। जो बातें रह जाती उन्हें वो चिट्ठी में लिख कर भेजती। बेसब्री से उसके जवाब का इंतज़ार करती। कभी कभी विशाल उसे आधी रात में फ़ोन करता था, पर कभी उसे "आई लव यू” नहीं बोला ।लेकिन उसे यही लगता रहा कोई क्यों फ़ोन करेगा अगर प्यार नहीं करेगा ? वो बहुत शर्मीली थी तो खुल के कभी पूछ भी नहीं पाई ।

एक दिन उसे विशाल ने अपनी अमेरिकन गर्ल फ्रेंड के बारे में बताया। वो उस दिन बहुत रोई । उसका दिल चकनाचूर हो गया। उसने पूरी ईमानदारी से विशाल को प्यार किया पर क्या कहती! विशाल ने तो कभी कहा ही नहीं कि वो उसे प्यार करता है। घर में भी कोई नहीं था जिसे वो अपना दुःख कह सकती। उसकी माँ तो पहले ही उसके विशाल से मेल जोल के खिलाफ थी। कई दिनों तक वो रोती रही। उसने अपने आप को अपने कमरे और किताबों तक सीमित कर लिया। उसके पापा ने उसकी हालत देख के उसे कोचिंग ज्वाइन करने को कहा। इस बीच उसकी पिता का तबादला सीकर से जयपुर हो गया।

***

नए शहर में नए तरीके से सब सेट करना था। पापा उसको हर जगह साथ ले जाते थे। वही उसकी मुलाकात बैंक में काम करने वाले लड़के पवन से हुई। रोहिणी को कई बार बैंक जाना पड़ता था। पवन उस पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान रहता था। वो बेहद हंसमुख सा साधारण लड़का था। रोहिणी को पहले उससे चिढ़ होती, कई बार वो पापा को बैंक जाने से मना भी कर देती पर धीरे धीरे वो सहज होने लगी। इस बीच उसने यू जी सी नेट पास कर लिया। किस्मत से उसी समय यूनिवर्सिटी में पोस्ट्स निकली थीं। उसे बॉटनी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति मिल गयी। उसने पीएचडी भी शुरू कर दी ।

एक दिन सन्डे को हिम्मत कर के पवन घर आया, दरवाज़ा रोहिणी ने ही खोला था

"हेलो ! अंकल हैं ?"

"जी..हैं। आप बैठिये !"

"पापा ...पवन जी मिलने आये है"

"कौन पवन?" पिता ने अंदर से पूछा

"बैंक वाले पवन जी"

"अरे बेटा आओ ...यहाँ कैसे?" उसके पिता ने सामने वाले सोफे पर पसरते हुए कहा

"नमस्ते अंकल ..वो मैं वृन्दावन गया था। उसी का प्रसाद देने आया हूँ। कई दिनों से आप बैंक नहीं आये तो सोचा मैं ही आ जाऊं आपके दर्शन करने। मेरा घर भी यहीं पास में है"-उसने पैर छूते हुए कहा

"खुश रहो ! अच्छा किया ... घर में कौन कौन है तुम्हारे? अरे छोटी ..ज़रा चाय तो बनाओ"

रोहिणी को बिलकुल पसंद नहीं था कि बाहर वालों के सामने उसे छोटी नाम से बुलाया जाये। छोटी नाम से उसे काम वाली बाई जैसी फीलिंग आती थी। वो थोड़ा तुनकते हुए रसोई में घुस गयी। तभी उनके यहाँ काम करने वाली शांति आ गयी। उसने राहत की साँस ली और चाय की ट्रे शांति के हाथ से भिजवा दी।

"जो भी आ जाये ,उसे पंचायत करने बिठा लेते हैं । चाय बनाओ..नाश्ता लाओ...मैं पूजा के साथ मार्किट जा रही हूँ । शांति आ गयी है उसे बता दो आज रात खाने में जो भी बनवाना है" -वो बड़बड़ाती हुई अंदर आकर अपनी माँ से बोली

"जी ..कॉंग्रेट्स..अंकल ने बताया कि आपका यहीं यूनिवर्सिटी में हो गया है!" - रोहिणी को जाते देख पवन तुरंत खड़ा होते हुए बोला

"थैंक्स ...बॉटनी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर" -उसने ज़ोर देते हुए कहा

"अंकल अब मैं चलता हूँ । कोई काम हो तो फ़ोन कर दीजियेगा"

रोहिणी अपनी स्कूटी स्टार्ट कर ही रही थी कि पवन उसके पास आ कर खड़ा हो गया ।

"ये आपके लिए लाया था" -वो कैसेट देते हुए बोला

उसका दिल धक् से रह गया । इससे पहले वो कुछ कह पाती, वो अपनी बाइक स्टार्ट करके निकल गया। पूजा को आता देख उसने तुरंत कैसेट पर्स में रख ली। पूजा पड़ोस में ही रहती थी और उसकी अच्छी दोस्त बन गयी थी। बाजार से वापस लौट कर वो तुरंत अपने कमरे में घुस गयी। टेप रिकॉर्डर में कैसेट चालू चलाई। कैसेट में जगजीत सिंह की आवाज़ में कुछ रोमांटिक ग़ज़लें थीं। रोहिणी को बहुत तेज़ गुस्सा आया-

"इस तरह के रोमांटिक गाने मुझे देने का क्या मतलब है? शक्ल देखी है अपनी। ज़रा सा ठीक से बात क्या कर लो... छोटे दिमाग के लोग तो पीछे ही पड़ जाते हैं"

एक हफ्ते बाद वो प्राचीन शिव मंदिर गयी तो वहां पवन उसे मिल गया ...

"अरे आप भी मंदिर आती हैं?" वो चहकता हुआ बोला

"कभी कभार"-उसने रुखाई से जवाब दिया

"मैं तो हर सोमवार आता हूँ। व्रत रहता है मेरा, तो बैंक से लौटते वक़्त आ जाता हूँ"

"गाने अच्छे थे ..वैसे मुझे ग़ज़लें सुनने का कोई शौक नहीं"-वो अपना पर्स स्कूटी पर लगाती हुई बोली

वो थोड़ा झेंप गया...

"आई ऍम सॉरी...अगर आपको बुरा लगा तो!"

"ईट्स ओके ..बाय"

"अरे सुनिए...अगर आपका नंबर मिल जाये तो .. मैं फ़ोन नहीं करूँगा फिर भी कभी...!"

रोहिणी ने उसे अपना नंबर दे दिया। अगले ही दिन पवन का फ़ोन आ गया-

" हेलो ..मैं पवन ! आपकी यूनिवर्सिटी आया हूँ। मेरे दोस्त को कुछ काम था। अगर आप फ्री हों तो मिल लें ! "

"नहीं मैं लैब में हूँ थोड़ा बिजी हूँ ..फिर कभी "

कुछ दिनों बाद रोहिणी को पवन का मेल मिला ...

रोहिणी जी

आपसे मिलना चाहता हूँ , पर आप मुझ से कटती हैं। मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ। क्या हम एक कप कॉफ़ी के लिए मिल सकतें हैं?

पवन

रोहिणी सोच में पड़ गयी। उसके मन में ऐसा कुछ नहीं था। उसे न पवन अच्छा लगता था न बुरा! उसने जवाब दिया

पवन जी

शायद आपको कोई ग़लतफ़हमी हुई है। मेरे पास कॉफ़ी पीने और लड़कों के साथ घूमने का फालतू वक़्त नहीं। प्लीज आप दोबारा मेल न करें

थैंक्स

पवन का दिल टूट गया। रोहिणी के जवाब में साफ़ न था। उसने कसम खा ली अब फिर कभी उसको फ़ोन नहीं करेगा। रोहिणी ने भी उसे फ़ोन नहीं किया। दो महीने बाद अचानक एक दिन पवन घर आया। घर पर कोई नहीं था, दरवाज़ा खुला ही था, तो पवन अन्दर ही आ गया। वो सोफे पर लेटी हुई टीवी देख रही थी ।

उसे अचानक देख कर वो बुरी तरह चौंक गयी ...

"ओह आप ...अचानक। पापा मम्मी तो मार्किट गए हुए हैं"

"मेरी अगले महीने शादी है। आप ज़रूर आना" -उसने कार्ड देते हुए कहा

"शादी...ओह्ह अच्छा..मुबारक हो आपको"

"मैं बिलकुल खुश नहीं हूँ। मैं तुमसे प्यार करता हूँ रोहिणी। सिर्फ घर वालों की ख़ुशी के लिए शादी कर रहा हूँ। ये दो महीने आपसे बिना बात किये, बिना देखे मैंने कैसे काटें हैं मैं ही जानता हूँ। अब तो पूरी ज़िन्दगी ऐसे ही काटनी होगी"- वो सुबक सुबक कर रो पड़ा। वो हैरान रह गयी, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करें?

"पर मैं इतना खुशनसीब नहीं जो तुम्हारा प्यार पा सकता। मैंने तुम्हें खुद से भी ज़्यादा चाहा। जब तक जिन्दा रहूँगा तुम्हें प्यार करता रहूँगा”

रोहिणी ये सब बातें विशाल के मुँह से सुनना चाहती थी पर जिससे चाहो उससे कहाँ सुन पाते हैं और जिसे सुनने की उम्मीद भी नहीं करते वो कह देता है। तभी बाहर कार रुकने की आवाज़ आई।

"शायद मम्मी लौट आई" -कहते हुए वो बाहर निकल आई

हाथ में बैग लेकर दोबारा कमरे में दाखिल हुई। तब तक वो अपनी ऑंखें साफ़ कर चुका था,

"नमस्ते अंकल, नमस्ते आंटी!" -वो उनके पैर छूने झुका

"खुश रहो बेटे ... छोटी ने बताया तुम्हारी शादी है !"

"जी हाँ ..कार्ड देने आया हूँ.. ज़रूर आइयेगा "-उसने एक कार्ड उनकी ओर बढ़ा दिया

"बैठो...लड़की कहाँ की है? छोटी चाय बनाओ"

रोहिणी का मूड ख़राब हो गया-

“पापा को क्या पड़ी है इतनी पूछताछ करने की... कहीं की भी हो”

"नहीं अंकल। अभी जल्दी में हूँ और भी कई जगह कार्ड देने जाना है"-कहता हुआ वो निकल गया

रोहिणी के मन में तूफ़ान मच गया-

“वाकई कितना कमज़ोर हो गया है, कितना रो रहा था"

वो अपने बिस्तर पर जाकर लेट गयी। पवन के बारे में सारी बातें सोचने लगी।

“मैंने उसे कभी मौका ही नहीं दिया। शायद साथ मिलती-जुलती, घूमती तो मुझे भी उसे प्यार हो जाता। कितनी अकेली और खाली हूँ। विशाल को प्यार करती रही और उसने कहीं और शादी कर ली। अब ये मुझे इतना चाहता है तो मैं इसे नहीं चाहती"

उस रात उसने खाना भी नहीं खाया। तबियत ख़राब होने का बहाना बना कर जल्दी लेट गयी। पर नींद आँखों से कोसों दूर थी। उसे लगने लगा कि अब जो उसे इतना चाहता है वो भी उसकी जीवन से चला जायेगा। उसके लिए लड़का देखा जा रहा था।

“दीदी तो खास खुश नहीं हैं, दोनों को काम से फुर्सत नहीं, बस नोट छापने में लगे हैं । मुझे तो एक ऐसा साथी चाहिए जो मुझे दीवानों की तरह प्यार करें । मुझे समझे । छोटी छोटी बातों में रोमांस हो...” –उसने गहरी सांस ली

फिर उसे “दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे” फ़िल्म का डायलाग याद आ गया- "शादी उससे करनी चाहिए जो आपको चाहे, उसे नहीं जिसे आप चाहो"

पर अब बहुत देर हो चुकी थी । उसे बीता हुआ समय याद आने लगा। विशाल से प्यार करना, फिर उसका अमेरिका जाना। शादी कर लेना। अपना अकेलापन। घर की उदासीनता। वो भाग जाना चाहती थी ,सुकून की तलाश में। आज उसने फिर महसूस किया- वाकई वो कितना टूट गयी है विशाल के जाने के बाद , उसको प्यार और देखभाल की ज़रूरत है जो पवन उसे दे सकता था।

“उसकी आँखों में मेरे लिए कितना प्यार था ...कितना दर्द था!”

उसने घड़ी देखी रात के साढ़े बारह बज चुके थे। उसने पता नहीं क्या सोच कर पवन का नंबर मिलाया। एक ही रिंग में उसने फ़ोन पिक कर लिया

"रोहिणी ...!"

"पवन... आई ऍम सॉरी इतनी रात में फ़ोन किया। वो मुझे कुछ बात करनी थी .."-उसने हड़बड़ाते हुए कहा

"बोलो न ... मैं तो तुम्हारी आवाज़ सुनाने को तरसता हूँ ...!"

"पवन ...आई लव यू! तुम ये शादी मत करो !" पता नहीं वो किस भावना में बह कर बोल गयी

"क्या... सच कह रही हो...?"-वो चौंक गया

"हाँ ... मुझे ऐसा ही लगता है। मैं नहीं रह पाऊँगी तुमसे दूर"

"अगर ऐसा है तो ठीक है। मैं सब छोड़ दूंगा तुम्हारे लिए"

"मैं कल बात करती हूँ। अभी किचन से आवाज़ आ रही है। शायद माँ जग गयी हैं"

"सुनो तो.. एक बार फिर कहो .."

"क्या.."

"देट यू लव मी!"

"आई लव यू पवन"

फ़ोन काटने के बाद वो सारी रात पवन के बारे में सोचने लगी। उसे अपने अंदर प्यार जगता हुआ महसूस हुआ।

रात भर न सो पाने की वजह से उसका सिर भारी था। यूनिवेर्सिटी जाने का मन नहीं कर रहा था। माँ चाय लेकर कमरे में आई। खिड़की का पर्दा हटाते हुए उसे आवाज़ लगाई

“उठो छोटी, आठ बज गए”

पर्दा हटते ही तेज़ धूप उसके चेहरे पर पड़ी..

वो चिल्ला उठी-

"माँ कितनी बार बोला है, सुबह सुबह पर्दा मत हटाया करो... मुझे सोना है "

"क्यों बेटा आज जाना नहीं है... तबियत तो ठीक है तुम्हारी "

"थोड़ा बुखार है माँ..प्लीज सोने दो"

माँ चाय रख के चली गयी। उसने तुरंत उठ कर दरवाजा अंदर से बंद किया। मन तो कर रहा था एक बार पवन को फ़ोन लगाये पर हिम्मत नहीं हो रही थी। उसका दिमाग उधेड़बुन में था कि उसने रात सही किया या नहीं !

दोपहर बाद पवन का फ़ोन आ गया-

"मैं सारी रात सो नहीं सका ..तुम्हे मिस करता रहा"

वो चुप रही। पता नहीं रात में किस आवेश में आ कर सब कह गयी थी। अभी तो वो कुछ महसूस ही नहीं कर रही थी।

"बहुत हंगामा खड़ा हो गया है। मैंने शादी को मना कर दिया है। लड़की के घर वाले शाम तक पहुंच रहे हैं !”

"अब क्या होगा?"

वो खुद को अपराधी महसूस करने लगी। उसने सोचा भी नहीं था कि इतना बड़ा हंगामा खड़ा हो जायेगा।

"हेल्लो..तुम बोल क्यों नही रही...?"

"कुछ गड़बड़ तो नहीं होगी न! पुलिस केस..? मेरा नाम नहीं आना चाहिए"

"परेशान मत हो। ऐसा कुछ नहीं होगा। तुम जानती नहीं सुबह से कितनी बातें सुन चुका हूँ। मैंने तो साफ़ कह दिया...मैं मर जाऊंगा पर शादी नहीं करूँगा! तुम मेरे साथ हो तो मुझे अब कोई डर नहीं डार्लिंग!"

उसके मुँह से “डार्लिंग” सुनकर रोहिणी को बड़ा अटपटा लगा। वो बहुत उलझी हुई थी।

"तुम मेरे साथ हो न जान!"

"हाँ ..!"-बड़ी मुश्किल से उसके मुंह से बोल फूटे

उसे समझ नहीं आ रहा था खुश हो या परेशान। पता नहीं अचानक से ये कैसा मोड़ आ गया ज़िन्दगी में।

पवन कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर चला गया। काफी समझाने-बुझाने के बाद लड़की वाले मान गए। रोहिणी का मन बड़ा अनमना रहता था। पवन से उसकी बात अक्सर रात में ही हो पाती थी। रोहिणी को लगने लगा था उसने कोई गलती कर दी है। न युनिवेर्सिटी में मन लगता न घर में ।

***

जब वो वापस लौटा तो वो दोनों एक रेस्टोरेंट में मिले। पवन ने उसका हाथ थाम लिया पर रोहिणी के मन में कोई भाव ही नहीं था। उसने पहली बार पवन को गौर से देखा तो उसे वो बिलकुल पसंद नहीं आया। बेहद साधारण सी कद काठी, बैंक में मामूली सा जॉब, उम्र में उससे नौ साल बड़ा ! उम्र उसे अभी अभी पवन का आई डी कार्ड देखने से पता लगी थी जब उसने रोहिणी को उसका फोटो दिखाने को पर्स पकडाया था। सब कुछ सोच कर रोहिणी का मन बुझ गया।

“इतनी उम्र तो नहीं लगती थी इसकी ...अगर पापा मम्मी को पता चला तो मुझे मार ही डालेंगे!” उसने सोचा

पवन उसके लिए एक अंगूठी लाया था। उसने अनमने मन से वो लेकर पर्स में रख ली।

"अरे पर्स में क्यों रखी ..? मैं तुम्हें पहनता !"

"मैं खुद पहन लूंगी..!"

पवन का मुँह उतर गया। वो एकदम से चिढ़ के बोला

"क्या मैं तुम्हें पसंद नहीं? इस तरह से क्यों बीहेव कर रही हो?"

उसकी आवाज़ में तल्खी थी। आस पास बैठे जोड़े उन्हें देखने लगे। रोहिणी को बुरा लगा और खुद पर थोड़ा गुस्सा भी आया।

"मैंने खुद ही तो बोला था कि मुझे तुमसे प्यार है और आज मैं इतना अनकमफ़रटेबल हो रही हूँ। इसका जॉब और शक्ल देख रही हूँ? क्या करूँ !"-वो मन ही मन खुद से बातें कर रही थी

ये स्थिति पवन के लिए असहनीय थी। वो पहले ही उसकी लिए इतना बड़ा कदम उठा चुका था। उसकी और उसकी परिवार की काफी बदनामी हुई थी। वो तैंतीस पार कर चुका था, ऐसे में उसका शादी न करना और गायब हो जाना चटकारे का विषय बन चुका था। अब रोहिणी और वो पहली बार प्रेमी प्रेमिका के रूप में मिले तो वो अजनबियों जैसा व्यवहार कर रही थी जैसे उसे जबरदस्ती बैठा दिया गया हो। रोहिणी के घर से बार बार फ़ोन आ रहा था तो वो फिर मिलने की बात कह कर चल दी।

अगले दिन सुबह ही पवन का फ़ोन आ गया। उसका प्यार मुहब्बत जताना रोहिणी को अजीब सा लग रहा था। जब कुछ महसूस न हो फिर भी केवल सामने वाले को खुश करने को प्यार का इज़हार करना खुद को तकलीफ देता है।

"देखो पवन ..प्लीज बुरा मत मानना पर तुम्हें मेरे लिए बैंक ऑफिसर बनना होगा वरना मेरे पेरेंट्स हमारी शादी को कभी राजी नहीं होंगे..! मेरी दीदी और जीजा जी दोनों ही बहुत फेमस डॉक्टर हैं और मैं यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर"

"आई अंडरस्टैंड डिअर! हमारे बैंक में डिपार्टमेंटल एक्साम्स होते हैं। मैं क्लियर कर लूंगा। मुझे भी बहुत जल्दी है तुम्हें अपनी दुल्हन बनाने की"

धीरे धीरे वो रोज़ मिलने लगे। वो रोज़ लंच टाइम पर यूनिवर्सिटी आ जाता। रात रात भर दोनों बात करते। रोहिणी को भी अब उससे प्यार हो गया था। वो उसकी बहुत केयर करती, घर से छुपा कर उसके लिए खाना ले जाती। उसको लम्बे लम्बे लव लेटर्स लिखती। पवन भी लव लेटर्स लिखने में पीछे नहीं था। मंदिरों में जाना , मन्नतें मांगना , पवन तो ज़्यादा ही धार्मिक था। उन्होंने अपने बच्चों के नाम भी सोच लिए थे जैसा अक्सर प्रेमी जोड़े सोच लिया करते हैं। रोहिणी के लिए तरह तरह के गिफ्ट लाना , उसे सरप्राइज देना पवन को बहुत पसंद था। उसकी बहुत इच्छा होती कि रोहिणी और वो कहीं अकेले में मिलें, एक रात कहीं साथ बिताएं। एक दो बार उसने हिम्मत कर रोहिणी को कहा तो रोहिणी ने साफ़ मना कर दिया-

"देखो किस और हग से आगे की सोचना भी मत। जब तक शादी नहीं हो जाती हमारे बीच कुछ नहीं हो सकता। वरना तुम मुझे खो दोगे। मुझे चलती बिंदास लड़की मत समझ लेना"

रोहिणी के तेवर देख कर वो मन मार के रह जाता। इस तरह एक साल गुज़र गया। अभी तक उसका प्रमोशन नहीं हुआ था। प्रमोशन ही शादी की बात शुरू करने की शर्त थी। इस बीच रोहिणी की मम्मी को सब पता चल गया। उन्होंने रोहिणी के कमरे की सफाई करते हुए लव लेटर्स देख लिए। घर में बहुत हंगामा हुआ।

"तुम उस क्लर्क से शादी करोगी ? अपने घर का स्टैंडर्ड देखा है। कहीं से वो तुम्हारे लायक नहीं है"- पापा बड़े गुस्से में थे

"मैंने तो पहले ही कहा था आप से...प्रोफेसर बन गयी है अब हाथ पीले कर दो। पर आपको अपने टूर्स से फुर्सत हो तब न"-माँ कर्कश आवाज़ में चिल्लाई

रोहिणी को अपनी माँ की ये आदत सबसे ख़राब लगती थी कि वो ताने बहुत मारती थीं।

“अरे प्यार ही तो किया है। क्लर्क क्या इंसान नहीं होते ? अब जब तक मैं इस घर में हूँ ये ताने मार मार के मेरा जीना दूभर कर देंगे ..!” उसने मन ही मन सोचा

माँ ने पता नहीं क्या क्या सुना दिया।

"वो एक्साम्स दे रहा है...जल्दी ही उसका प्रमोशन हो जायेगा"-उसने हिम्मत कर के कहा

"अरे हाँ..प्रमोशन हो जायेगा! कोई हलवा है .."-माँ गुस्से में बोली

"सुनो...कल बुलाओ उसे... मैं बात करूँगा"-पिता बोले

"कोई ज़रूरत नहीं उस लफंगे को घर बुलाने की। मुझे तो पहले ही उसका आना जाना पसंद नहीं था। अभी छुट्टियां होने वाली हैं इसे कुछ समय रमणिका के घर भेज दो। यहाँ से दूर रहेगी तो इसका दिमाग ठिकाने आ जायेगा। क्या मालूम कोई जादू कर दिया हो..!"

जब अगले दिन यूनिवर्सिटी जाने लगी तो माँ ने टोका

"खबरदार जो उस बाबू से मिली। अपने घर की इज़्ज़त मत डूबोना!"

पर उसे मिलना था तो मिलना था। दोनों ने छुट्टी ले ली और शहर से दूर एक वाटरपार्क में चले गए। वहाँ पूरा दिन साथ बिताया।

"माँ ने घर की इज़्ज़त डुबोने को मना किया था। फिर भी मैं यहाँ वाटरपार्क में आ गयी.. डुबोने !.. देखो तुम्हारे प्यार में मैं कितनी बिगड़ गयी हूँ !"-कहते हुए वो ज़ोर से हंस दी

दो चार दिनों में घर में शांति पुनर्स्थापित हो गयी। रोहिणी ऐसा दिखाने लगी मानो अब कुछ नहीं है। रात में बात करने में ज़्यादा सावधानी बरती जाने लगी। उसका जॉब था, वरना घर से बाहर निकलने पर भी रोक लगा दी जाती।

“कितने दिन हो गए हम सन्डे को कहीं बाहर घूमने नहीं गए”-एक दिन पवन ने शिकायती लहजे में कहा

“एक दूसरे से मिल लेते हैं ये क्या कम है? माँ का बस चले तो मेरे अन्दर एक चिप लगा कर मुझे ट्रेस करती रहे”

यूनिवर्सिटी में छुट्टियां चालू हो गयी थी। दीदी की नन्द की शादी थी। मम्मी को गठिया था तो उनका जाने का खास मन नहीं था। सफर में उनका दर्द बढ़ जाता था । इसलिए उसे ही जाने के लिए ज़ोर डाला जाने लगा। वो जाना नहीं चाहती थी पर घर से किसी का तो जाना ज़रूरी था।

पूजा के साथ जाने के बहाने वो पवन के साथ बाज़ार गयी और खूब शॉपिंग की। पापा को अचानक एक मीटिंग के लिए बाहर जाना पड़ा तो पवन उसे ट्रैन में बैठाने का मौका भी मिल गया-

"मैं तुम्हे बहुत मिस करूँगा ..!"

"मैं भी... आई लव यू डिअर...मैं जल्दी आ जाउंगी, बस तीन चार दिनों की तो बात है"

भारी मन से उसने जयपुर छोड़ा।

***

दिल्ली कैंट स्टेशन पर उतरते ही उसने अपने जीजा रवि को फ़ोन लगाया-

"प्रणाम जीजा जी, मैं प्लेटफॉर्म नंबर एक पर हूँ। आप कितनी देर में पहुंच रहे हैं?"

"खुश रहो ! बेटा मैं तो ज़रूरी काम से मैरिज होम आ गया हूँ। गौरव तुम्हें लेने पहुंच ही रहा है"-रवि ज़िम्मेदारी भरे स्वर में बोले

गौरव उनका छोटा भाई था। जो लंदन में सेटल था। उसने वही एक ब्रिटिश लड़की से शादी की थी। रोहिणी अपनी दीदी के ससुराल में सबसे घुली मिली हुई थी। जब कभी वो दिल्ली जाती उसे सिर आँखों पर बैठाया जाता। पहले अक्सर वो दीदी के यहाँ आ जाया करती थी पर जबसे प्यार और जॉब का चक्कर हुआ है आना ही नहीं हुआ। वो एक बेंच पर बैठ के गौरव का इंतज़ार करने लगी। प्लेटफार्म पर बहुत भीड़ थी। गर्मी की छुट्टियां जो चालू हो गयी थीं। जिसे देखो वो भाग रहा था। बच्चे और ढेरों सामान समेटे कई परिवार हिल स्टेशन पर घूमने निकल पड़े थे। हर जगह भीड़ और हर कोई भीड़ में अपना ढूंढने में लगा था। उसने पवन को फ़ोन मिलाया और बातों में लग गयीतभी गौरव हाथ हिलाता हुआ नज़र आया। गौरव को देख कर उसने फ़ोन काट दिया।

"रूही"

"हेलो भैया..कैसे हैं आप?"

"बस सब मज़े में ...कितना बदल गयी है तू। पांच साल बाद तुझे देख रहा हूँ"

साथ आये ड्राइवर ने सामान उठा लिया। बाहर पार्किंग में गाडी खड़ी थी। कार का दरवाज़ा खोलते ही रोहिणी की नज़र एक बेहद आकर्षक लड़के से टकराई। वो एकदम हड़बड़ा गयी।

गौरव हँसते हुए बोला-

"अरे अपनी ही कार है। बैठ जाओ ...ये रोहित है...हमारी बुआ का बेटा"

रोहित ने मुस्करा कर हेलो बोला। उसने हल्के से सिर हिलाया और उसके बगल में बैठ गयी।

"सुना है तू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हो गयी है .."

"नहीं भैया..अभी तो असिस्टेंट प्रोफेसर हूँ। ये पक्की खबर है ,सुनी सुनाई नहीं"- वो ज़ोर से हँसते हुए बोली

"अरे भई तुझे तो सब असिस्ट ही करेंगे... हम तो प्रोफेसर ही कहेंगे"

"अरे तुम लोग एक दूसरे को पहचाने नहीं? अरे रोहित... ये वही है जिसके तुम भैया की शादी में दीवाने हुए बैठे थे। रूही ! अब ये वो लल्लू सा लड़का नहीं रहा। अब जनाब आई पी एस बन चुके हैं"

"अरे भैया, वो तो बचपना था..."-रोहित झेंप गया था

"तो अब तो जवानी है। मौका भी है ,कहो तो बात चलाऊं ? हाथ के हाथ ही ..अभी तो सब रिश्तेदार भी हैं "-गौरव ज़ोर से हँसा

"गौरव भैया ! आप बहुत ज़्यादा बोलने लगे हो लंदन जाकर। वहां तो भाभी के सामने आपकी बोलती बंद रहती है " रोहित बोला

फिर रोहिणी की तरफ देखते हुए बोला-"ऐसा कुछ नहीं था, भैया मज़ाक कर रहे हैं"

शादी के दौरान रोहित की नज़रें हमेशा उसे पीछा करती हुई महसूस हुई और जब महसूस नहीं होती तो उसकी नज़रें रोहित को खोजने को उतावली हो जाती।

शादी वाला घर था। कई सालों बाद उसका आना हुआ था। वो सबकी चहेती बनी हुई थी। गौरव की ब्रिटिश बीवी लिली से उसकी अच्छी दोस्ती हो गयी थी। दो तीन बार रोहिणी को रोहित के साथ बाजार भी भेज दिया गया। रोहिणी ने महसूस किया कि वो रोहित की तरफ खिंचती जा रही है। वो छह फुट लम्बा, तीखे नैन नक्श, कसरती बदन वाला था। एक बार मिल कर उससे कोई बिना प्रभावित हुए नहीं रहता। इस दौरान उसे पवन की बिलकुल याद नहीं आई। पहले तो वो कहीं भी बाहर जाती तो हर एक घंटे में उसे फ़ोन करती थी। बिलकुल मन नहीं लगता था और अब दो दिनों से उसने एक बार भी पवन को फ़ोन नहीं किया। पवन बार बार फ़ोन कर रहा तो उसे ख़ीज आ रही थी।

"तुमने कल से एक बार भी फ़ोन नहीं किया"- पवन ने शिकायती लहजे में कहा

"मैं यहाँ शादी में आई हूँ। इतनी भीड़ भाड़ है, कैसे फ़ोन करूँ?"

"अच्छा कोई बात नहीं। क्या हो रहा है "-वो इत्मीनान से बात करने के मूड में था

रोहिणी ने देखा, मोबाइल पर रोहित की कॉल आ रही थी। उसने पवन को होल्ड पर डाल दिया।

"कब से ढूँढ रहा हूँ तुम्हें ..कहाँ हो यार? मेरा ख़ास दोस्त और उसकी वाइफ आये हैं, तुमसे मिलवाना है"

"मैं दीदी के कमरे में हूँ,अभी आती हूँ बाबा"

पवन अचानक फ़ोन होल्ड पर जाने से बुरी तरह ख़ीज गया। उसने दोबारा फ़ोन किया। फ़ोन बिजी आ रहा था। रोहिणी ने बाथरूम में जा कर मुँह धोया। मोबाइल फिर बजने लगा ,पवन का फ़ोन था। रोहिणी ने मोबाइल को स्विच ऑफ कर दिया और रोहित से मिलने नीचे हॉल में चली गयी। वो बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहा था। साथ में एक बड़ा खूबसूरत सा जोड़ा बैठा हुआ था। उसे पास आता देख वो तीनों उठ खड़े हुए।

"रोहिणी ये मेरे दोस्त हैं विशाल और ये इनकी बेटर हाफ सुधा। दोनों आईएएस हैं। मेरे साथ ही लखनऊ में ही पोस्टिंग है। शादी के लिए स्पेशली आये हैं"

“हेलो”-रोहिणी ने दोनों से हाथ मिलाया

“और इन्हें तो आप जानते ही हैं ये है रोहिणी ...”- रोहित बोला

"हाँ हाँ बिलकुल... आप पिछले आधे घंटे से सिर्फ इनके बारे में ही बता रहे थे जनाब"- सुधा हँसते हुए बोली

रोहिणी ने शर्माते हुए रोहित की तरफ देखा।

***

शाम को शादी के समय रोहित अचानक रोहिणी से बिलकुल सट कर खड़ा हो गया।

"कुछ बात करना चाहता हूँ तुमसे"-रोहित ने फुसफुसा कर कहा

"हाँ बोलो"

"मैं ..."

“अरे तुम लोग यहाँ खड़े हो? वहाँ जयमाल पर तुम्हारा इंतज़ार हो रहा है...कब से फ़ोन मिला रहे हैं" रवि हांफता हुआ बोला

“जीजा जी ..गानों के शोर में मोबाइल की रिंग सुनाई नहीं दी”-रोहिणी ने घबराते हुए सफाई देने की कोशिश की

"चलो पहले उनको निपटा दें"-कहते हुए रोहित ने रोहिणी का हल्के से हाथ दबाया

पवन तो जाने कितनी बार उसका हाथ पकड़ता था, पर उसे कभी ऐसा झनझना देने वाला अहसास नहीं हुआ था। रोहित रवि के साथ आगे जा चुका था। उसका स्पर्श रोहिणी की हथेली पर रह गया था। वो कुछ देर वही खड़ी रही।

फिर शादी के शोर शराबे में उन्हें बात करने का मौका ही नहीं मिला। अगले दिन रोहित को वापस जाना था। देर रात उसके मोबाइल पर रोहित का मैसज आया।

"सुबह वाक पर चलोगी?"

***

वो सुबह सुबह नहा कर तैयार हो गयी। उसने ब्लू पजामा और पिंक टीशर्ट पहन रखी थी। रोहित ट्रैक सूट में था।

“आईपीएस है तो एक्सरसाइज में रेगुलर होगा ..”-उसके कसे हुए शरीर को देख रोहिणी के मन में कुछ हुआ

दोनों चुपचाप चलने लगे। सुबह थोड़े बादल छाए हुए थे और ठंडी हवा चल रही थी। जून के उमस भरे मौसम में ऐसी सुबह मुश्किल से ही आती है। ऐसा लग रहा था मौसम भी उनके मिलने पर थोडा बहक गया था।

"तुम कब वापस जाओगी?”-रोहित ने बात शुरू की

"वैसे तो आज रात जाने का था पर दीदी कह रही है छुटियाँ है थोड़े दिन यही रुक जा। शॉपिंग कर और दिल्ली घूम"

"हाँ ठीक ही तो कह रही हैं भाभी। वैसे अगले हफ्ते एक मीटिंग के लिए मैं दुबारा दिल्ली आऊंगा, तो हम दोबारा मिल सकेंगे”

"मैं एक किताब लिख रही हूँ ..तो जाना होगा..."

"वाओ ..तुम लिखती भी हो ! नावेल ?"

"अरे नहीं...बॉटनी की किताब। इंटरमीडिएट स्टैण्डर्ड की"

"यू आर ब्यूटीफुल"

"व्हाट..."-रोहिणी तारीफ के लिए तैयार नहीं थी। वो शरमा गयी।

"तो तुम नहीं रुकोगी..मुझ से दोबारा मिलने? अब तुमसे मिलने जयपुर आना तो थोडा मुश्किल होगा न! वैसे भी बहुत सारी बातें करनी हैं मुझे तुमसे। किताब तो तुम यहाँ भी लिख सकती हो। भाभी भैया तो दिन भर हॉस्पिटल रहते हैं ...बस एक हफ्ते .."

रोहिणी ने उसे मुस्करा कर देखा। वो एकटक उसकी आँखों में झांक रहा था।

“कैसे मना करूँ इसे...”-वो मन में बहुत बैचैन थी

"ठीक है ...रुक जाती हूँ...फिर हम साथ में डिनर करेंगे"

"सिर्फ डिनर....?"

"तो..."

"मेरे मतलब है हम पूरा दिन साथ घूमेंगे ..ब्रेकफास्ट लंच शॉपिंग और डिनर"

रास्ते में उन्होंने नाश्ता किया चाय पी। खूब बातें की। रोहित ने घडी पर नज़र डाली। ग्यारह बज रहे थे।

"ओह वक़्त का पता ही नहीं चला। वापस चलते हैं, जाना भी है ...तुम्हारे साथ कितना दूर आ गया"

उन्होंने ऑटो कर लिया। दोनों के कंधे टकराने लगे। रोहित ने उसका हाथ थाम लिया। वो रोहित की गंध महसूस कर रही थी। जाते समय वो रोहिणी के कमरे में आया और उसे गले से लगा लिया। रोहिणी का मन उसे चूमने का किया पर उसकी हिम्मत नहीं हुई। रोहित के जाने के बाद उसका मन नहीं लगा। मेहमानों को विदा करने और मिठाई देने में शाम हो गयी।


पवन के प्रति उसका मन एकदम भावना शून्य हो गया। वो कई बार फ़ोन कर चुका था। रोहिणी को समझ नहीं आ रहा था कि वो पवन से क्या बात करे। जैसे अचानक से सारी भावनाएं गुम हो गयीं। पवन परेशान हो बार बार फ़ोन मैसेज कर रहा था। आखिर रात में रोहिणी ने उसे फ़ोन किया।

“कहाँ थीं तुम? कल दोपहर से एक बार भी फ़ोन नहीं किया। पहले होल्ड पर डाल दिया और उसके बाद फ़ोन स्विच ऑफ आने लगा। मैं कितना परेशान हो रहा हूँ, कोई मतलब ही नहीं तुम्हें”-पवन गुस्से से फट पड़ा

“मोबाइल खराब हो गया था”-रोहिणी ने झूठ बोला

“पी सी ओ से एक कॉल तो कर ही सकती थी”-पवन की आवाज़ में नाराजगी साफ़ थी

“मैं यहाँ शादी में आई हुई हूँ। कोई घूमने तो आई नहीं कि जहाँ पी सी ओ नज़र आया फ़ोन मिला दिया”-रोहिणी ने भी गुस्से में कहा

“कब आ रही हो”-पवन ने पूछा

“पता नहीं”

“मतलब ? तुम तो तीन दिन में आने वाली थीं”

“कुछ काम है ज़रूरी”

“कौन सा काम?”-पवन ने पूछा

“यार प्लीज..मेरी अपनी कोई लाइफ है या नहीं? मैं क्यों हर बात तुम्हें बताऊँ?”-रोहिणी की आवाज़ तेज़ हो गयी

“तुम्हें हो क्या गया है? यहाँ से जाते वक़्त तो बहुत उदास थीं और अब किसी बात का सीधा जवाब नहीं दे रहीं?”-पवन चिल्ला कर बोला

“चिल्लाओ मत। मेरा मन नहीं तुमसे बात करने का। अब बार बार मुझे कॉल मत करना। जब फुर्सत होगी मैं खुद फ़ोन कर लूंगी”-रोहिणी ने कहते हुए फ़ोन काट दिया

पवन का दिमाग खराब हो गया। उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। अचानक से रोहिणी का व्यवहार बदल कैसे गया? गुस्से में उसने भी फ़ोन नहीं किया।

दो दिन गुज़र गए। रोहिणी अपनी एक पुरानी दोस्त अंजना से मिलने गयी जो अब दिल्ली में एक इंटरमीडिएट कॉलेज में पढ़ा रही थी। उसके साथ लाइब्रेरी जा कर वो ढेर सारी किताबें इशू करा लायी। शादी में आये सभी मेहमान जा चुके थे। अब घर में केवल दीदी, जीजा जी और दीदी की सास और रोहिणी थे। गौरव भी लिली को राजस्थान घुमाने चला गया था। दीदी और जीजा जी के हॉस्पिटल जाने के बाद रोहिणी सारा दिन किताब लिखने में लगी रहती। बीच में कभी कभी टीवी देख लेती या दीदी की सास से थोड़ी देर बातें कर लेती। रोहित का दिन में दो तीन बार तो फ़ोन आ ही जाता।

रोहिणी की तरफ से फ़ोन न आते देख पवन ने देर रात उसे फ़ोन मिलाया। रोहिणी रोहित से फ़ोन पर बातों में लगी हुई थी। पवन का कॉल आते देख वो एकदम से नर्वस हो गयी।
“रोहित..अब कल बात करेंगे”-उसने बोला

“क्यों अचानक से क्या हो गया तुम तो कोई ज़रूरी बात बताने वाली थीं?”-रोहित ने कहा

“आज नहीं कल। अभी मेरे सिर में दर्द हो रहा है”

“ओके डिअर...एक डिस्प्रिन ले लेना और जल्दी सो जाना। किताबों में पूरा दिन सिर खपाती रहती हो। दिन में थोडा सो जाया करो न..चलो गुड नाईट”

“गुड नाईट”

रोहिणी के फ़ोन रखते ही पवन का फ़ोन आ गया।

“इतनी रात में किससे बात कर रहीं थीं?”-पवन बहुत गुस्से में था

“अंजना का फ़ोन था”

“रात के बारह बजे पहले तो तुमने कभी अंजना से बात नहीं की। मैं यहाँ रात दिन तुम्हारे फ़ोन के इंतज़ार में तड़प रहा हूँ और तुम पता नहीं किससे फ़ोन पर रोमांस कर रही हो”

“बकवास मत करो। मेरे मन में तुम्हारे लिए कुछ नहीं और इसलिए मेरा बात करने का मन नहीं करता तुमसे”

“क्या मतलब? कुछ नहीं है? प्यार व्यार सब नाटक था ?”

“जो मर्ज़ी समझो। पर प्लीज मेरा दिमाग ख़राब मत करो”-रोहिणी का लहजा सख्त हो गया

वो खुद समझ नहीं पा रही थी एक साल से उसका पवन के प्रति प्यार लगाव एकदम से कैसे दूरियों में बदल गया? पहले तो वो छोटी से छोटी बात पवन से शेयर करती थी और अब वो सिर्फ रोहित से बात करना चाहती थी। उसे पवन को दुखी करना अच्छा नहीं लग रहा था पर वो बिना मन के प्यार का नाटक भी नहीं कर सकती थी।

अगले दिन सुबह सुबह ही पवन का फ़ोन आ गया। न चाहते हुए भी रोहिणी ने फ़ोन उठा लिया।

“रोहिणी तुम ऐसा क्यों कर रही हो?”-पवन रो रहा था

“प्लीज तुम रोओ मत। मैं जान बूझ कर कुछ नहीं कर रही। समझने की कोशिश करो। मुझे थोडा टाइम दो”-रोहिणी थोडा नरम हुई

“प्लीज तुम वापस लौट आओ। मैं पागल हो रहा हूँ”-पवन और जोर से रोने लगा

“प्लीज डोंट क्राई”-वो उसके रोने से दुखी हो गयी

पवन रोता रहा।

“देखो मैं किताब के काम में लगी हूँ। यहाँ कुछ लोगों से मिलना भी है। मैं अगले हफ्ते वापस आ पाऊँगी”

“किताब का काम तो यहाँ भी हो जायेगा। आई लव यू रोहिणी। आई कांट लिव विदआउट यू। प्लीज कम बैक”

“दीदी बुला रही हैं..चलो बाय”

***

जब वो नाश्ते के लिए डाइनिंग हॉल में पहुंची तो रोहित को देख कर चौंक गयी।

“गुड मोर्निंग रूही”- रोहित उसके कुछ बोलने से पहले ही बोल पड़ा

“अरे आप कब आये?”

“सुबह छह बजे..जब आप सो रहीं थी। मुझ से बोल रही थी कि मैं रोज़ सुबह पांच बजे वाक पर जाती हूँ”- रोहित ने पोहे खाते हुए कहा

“रात देर तक पढ़ती है आजकल। तो सुबह कैसे उठ पायेगी”-रमणिका दीदी बोल पड़ी

“वाकई..देर तक पढ़ती हो?”-रोहित ने उसकी तरफ मुस्करा कर देखा

रोहिणी ने थोड़ा नाराजगी वाला चेहरा बना कर रोहित की तरफ देखा। रवि पहले ही हॉस्पिटल निकल चुके थे। रोहित रमणिका से बातों में लगा था। रमणिका उसकी बातों को सुन कर हँसे जा रही थी। दीदी के सामने रोहिणी की रोहित से बात करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। मन ही मन रोहित के आ जाने से वो बहुत खुश थी।

“दीदी मैं कमरे में जा रही हूँ। कुछ ज़रूरी मेल करने हैं..बाय रोहित”-वो उठ कर चली गयी

थोड़ी देर बाद रोहित उसके कमरे में आ गया। वो अपनी वर्दी में बहुत जच रहा था।

“क्या हो रहा है?”

रोहिणी की धडकनें बढ़ गयीं। वो कुछ बोल नहीं पायी। रोहित के हाथ में एक बड़ा पैकेट था।

“मीटिंग के लिए निकल रहा हूँ। एक बजे तक फ्री हो जाऊंगा। लंच साथ में करेंगे”

“ठीक है”

“गाड़ी भेज दूंगा”

रोहित ने उसे पैकेट पकड़ाया और कमरे से निकल गया। रोहित के जाते ही उसने दरवाज़ा बंद किया और पैकेट खोल कर देखा। पैकेट में एक डायरी, रोहिणी की शादी के दौरान खीचीं हुई कुछ तस्वीरें, एक ग्रीटिंग कार्ड और दो खूबसूरत पेन थे। उसने जल्दी से कार्ड खोला। कार्ड को खोलते ही म्यूजिक बजने लगा। किसी अंग्रेजी गाने की धुन थी। रोहिणी अंग्रेजी गाने कम ही सुनती थी। फिर भी उसने कई बार कार्ड को खोला और उसकी धुन के साथ गुनगुनाने की कोशिश की। उसने कार्ड रख कर डायरी खोली। डायरी के पहले पन्ने पर “रूही के लिए” लिखा हुआ था। हर पन्ने पर एक लव नोट लिखा हुआ था। उन्हें पढ़ते हुए जब वो आखिरी पन्ने पर पहुंची तो “आई लव यू रोहिणी” लिखा हुआ था। उसने हर पन्ने को कई कई बार पढ़ा।

पवन के दिये सारे लव लेटर्स, कार्ड्स और तोहफों पर रोहित भारी पड़ गया।

***

रोहिणी द्वंद में फस गयी। उसने कई बार अपने आप को समझाया। पवन की कोई गलती नहीं। उसके प्यार में कोई कमी नहीं थी । दोनों एक दूसरे के साथ खुश भी थे पर फिर क्यों वो रोहित की तरफ झुकने लगी थी। उसे पवन के कहे हर शब्द से एलर्जी हो रही थी जैसे वो उसके लिए कोई राह चलता अजनबी हो!

कई बार प्रेम अकेलेपन से बचने का उपाय होता है... “जो हमें बेहद चाहे उसके प्रेम में पड़ जाना” । हम उसका साथ भी देते हैं, ख्याल भी रखते हैं। लेकिन जैसे ही किसी से प्यार वाला कनेक्शन महसूस होता है पहले वाला प्रेम हवा हो जाता है क्यूंकि वो प्रेम नहीं था खुद को खुश रखने का केवल एक तरीका था। जैसे बारिश में अक्सर किसी बस स्टॉप, पेड़ या झोंपड़ी की शरण ले ली जाती है पर वहां घर नहीं बसाया जा सकता। ठीक ऐसी ही रोहिणी की मनोस्थिति थी। विशाल के दिए दर्द से बचने का इलाज़ उसने पवन में ढूंढा। क्यूंकि वो खुद को अकेलेपन से बचाना चाहती थी और उस दर्द को भूल भी गयी। रोहित से मिलने के बाद उसने उसी प्यार को महसूस किया जो कभी वो विशाल के लिए महसूस करती थी। कई बार किसी को खोने के डर से लोग किसी से जुड़ तो जाते हैं पर उनके अन्दर एक अफ़सोस.. एक खालीपन बना रहता है। उसका यही खालीपन रोहित के मिलने से भर गया था। उसका अफ़सोस दूर हो गया । जैसे पहली नज़र का प्यार हो, रोहित तेज़ नशे की तरह उसके दिमाग पर चढ़ गया था। रोहित को उसका दिल और दिमाग पूरे मन से स्वीकार कर रहा था !

***

रोहिणी अनमनी सी बिस्तर पर पड़ी रही। आखिरी मोबाइल की रिंग ने उसकी तन्द्रा तोड़ी।

“मैडम...नमस्कार! रोहित साब ने गाड़ी भेजा है..मैं बाहर खड़ा हूँ”

रोहिणी ने घड़ी पर नज़र डाली, बारह बज गए थे। तीन घंटे से वो केवल सोच रही थी। उसने ड्राईवर को इंतज़ार करने को कहा और जल्दी से बाथरूम में घुस गयी। करीब बीस मिनट बाद वो कार में थी।

रोहित बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहा था। पीली फ्रॉक स्टाइल टी शर्ट और ब्लू जीन्स में रोहिणी एक दम कॉलेज गोइंग गर्ल नज़र आ रही थी।

“ओहो आइये मैडम आप ज्यादा नहीं केवल एक घंटा लेट हैं”

“सो सॉरी रोहित, मैं कुछ काम में लग गयी तो वक़्त का पता ही नहीं चला”

“अरे कोई बात नहीं...आपका तो हम ज़िन्दगी भर इंतज़ार कर सकते हैं”-रोहित ने उसके लिए कुर्सी खिसकाते हुए कहा

“अच्छा...ऐसा है क्या?” रोहिणी ने मुस्कराते हुए पूछा

“और नहीं तो क्या..मेरी डायरी पढ़ के आपको पता नहीं लग पाया?”

रोहिणी ने नज़रें नीची कर लीं। उसे पहले प्यार वाली शर्म और झिझक महसूस हुई। उसके चेहरे पर एक अलग सी चमक आ गयी। रोहित ने बात आगे बढाई-

“पहली बार पुलिस वर्दी में डेट कर रहा हूँ, इसका मतलब जानती हो?”

“नहीं तो..”-रोहिणी ने थोडा हैरान होते हुए पूछा

“इट मीन्स –इट्स ऑफिसियल नाउ”-रोहित जोर से हंस दिया

वेटर सूप रख गया था। जल्दबाजी में रोहिणी की जीभ जल गयी।

“शायद सूप की तरह ये नया बनता रिश्ता भी बहुत गरम है, मेरा मेंटल पीस जल गया। मैं शायद बहुत जल्दी कर रही हूँ। इससे अच्छा तो मैं दिल्ली आती ही नहीं”-रोहिणी सोचने लगी

“क्या सोच रही हो रूही? मैं ही बोले जा रहा हूँ तुम कुछ कहती नहीं?”- रोहित मेनू कार्ड देखते हुआ बोला

“रोहित सब कुछ बहुत जल्दी हो रहा है”-रोहिणी के मुंह से निकला

“हम पुलिस वालों से इंतज़ार नहीं होता। जब तुम्हें पहली बार सात साल पहले देखा था तभी से तुम्हें चाहने लगा था। उसके बाद पापा की अचानक रोड एक्सीडेंट में डेथ हो गयी। सब कुछ बिखर गया था। मैं परिवार की ज़िम्मेदारी और करियर बनाने में उलझ के रह गया। अपने बारे में जैसे सोचना ही भूल गया था। जीवन से एक विरक्ति हो गयी थी, बस मशीन की तरह अपने काम और जिम्मेदारियों में लगा रहा। फिर जब रमणिका दीदी ने फ़ोन कर के स्पेसिअली इनवाइट किया तो मैं जैसे सात साल पीछे लौट गया। उनकी शादी में तुमसे हुई पहली मुलाकात ! मेरी तुम्हारे लिए जो चाहत और दीवानगी कहीं दब गयी थी वो वापस लौटती हुई मालूम हुई और सिर्फ तुमसे मिलने मैं शादी में आया। तो बताओ सात साल का इंतज़ार कम होता है क्या?”

रोहिणी चुपचाप उसकी बातें सुन रही थीं। रोहित की आँखों में गीलापन था। वेटर खाना रखने आया तो वो थोड़ी देर चुप रहा। उसने वेटर को जाने का इशारा किया और खुद खाना परोसने लगा।

“पता है रोहिणी ..मैंने बहुत खूबसूरत रिश्ते गवाएं हैं अब मैं तुम्हें नहीं खोना चाहता इसलिए स्ट्रेट फॉरवर्ड हो कर बोलता हूँ- आई लव यू”

रोहिणी की आँखों से आंसू निकल कर गालों पर आ गए। रोहिणी को चुप देख कर रोहित थोडा असहज हुआ। दोनों चुपचाप खाने लगे।

“लुक रूही..ये मेरी फीलिंग हैं एंड आई ऍम नॉट फोर्सिंग यू फॉर एनीथिंग। एक दोस्त की तरह हम खुल कर बात कर सकते हैं। मेरी वर्दी का रौब मत खाना..सो रिलैक्स”-रोहित ने माहौल हल्का करने की कोशिश की

रोहिणी ने फीकी सी मुस्कराहट बिखेरी। लंच के बाद दोनों शौपिंग करने एक मॉल में चले गए। रोहित ने अपनी बहन के लिए रोहिणी को ड्रेस पसंद करने को कहा। अपनी माँ के लिए साड़ी ली। रोहिणी ने भी अपनी माँ , पापा, दीदी और जीजा जी के लिए कुछ तोहफे लिए।

“पता है रूही मैं पहली बार उनके लिए कुछ ले जा रहा हूँ। पहले तो कह देता था जो मन हो खरीदो। उन्हें पसंद तो आयेगा न? वैसे तुम्हारी चॉइस है तो कैसे नहीं पसंद आएगा !”

रोहिणी के कहने पर रोहित ने वर्दी उतार कर अभी अभी खरीदी नयी शर्ट और जीन्स पहन ली। शौपिंग के बाद वो दोनों दिल्ली हाट चले गए। अब रोहिणी भी उसके साथ सहज होने लगी। अपने संघर्ष, बचपन से लेकर कॉलेज की बातें, दोस्त घरवाले नौकरी कई बातें दोनों ने आपस में शेयर की।

“देर हो रही है दीदी चिंता करेंगी”-रोहिणी ने घड़ी देखते हुए कहा

“भाभी को पता है तुम मेरे साथ हो”

“ओह माय गॉड..मैंने तो दीदी को बोला था मैं अपनी फ्रेंड के घर जा रही हूँ”-रोहिणी के चेहरे पर तनाव उभर आया

“हाहा...कोई बात नहीं... भाभी जानती हैं कि मैं तुम्हारी नयी सहेली हूँ”-रोहित ने रोहिणी के सिर पर हल्के से हाथ मारा

“रोहित...मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूँ”-रोहिणी की आवाज़ एकदम से गंभीर हो गयी

“क्या तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई और है?”-रोहित ने भांप लिया

“है भी और शायद अब नहीं भी। पता नहीं तुम समझ भी पाओगे या नहीं ? पर मुझे लगता है कि तुम्हें जानने का हक है और उसके बाद कोई फैसला करने का भी”

रोहिणी ने रोहित को अपने जीवन के पहले प्रेम विशाल से लेकर पवन तक की सारी कहानी और रोहित को लेकर उसके मन में आये तूफ़ान को विस्तार से बता दिया। दिल्ली हाट के बाहर रखी बेंच पर बैठा वो उसे सुनता रहा। मौसम में उमस थी, पसीने से दोनों भीग गए थे। कई बार रोहिणी की ऑंखें छलक आई।

“तुम बहुत प्यारी हो रोहिणी”-उसने रोहिणी का हाथ थाम लिया

“रोहित मुझे समझ नहीं आ रहा तुम्हारे लिए मेरे मन में जो है वो प्यार है या सिर्फ एक अट्रैक्शन? तुम इतने अच्छे हो कि कोई भी लड़की फ़िदा हो जाये। पर तुम जितना प्यार करते हो तुम्हें भी कोई उतना ही या उससे ज्यादा प्यार करे तो अच्छा होगा..यू डिसर्व दा बेस्ट”

“छोड़ यार, इतना मत सोच। आई कैन अंडरस्टैंड योर मेंटल डाइलेमा...टेक योर टाइम। वैसे अब दोस्त तो हम बन ही गए-रोहित ने बड़े प्यार से कहा

“चलो पानी के बतासे खाते हैं”-रोहिणी उठ खड़ी हुई

रोहिणी रोहित को सब कुछ बता कर बहुत हल्का महसूस कर रही थी। रोहित बातें बहुत करता था, वो उसकी बातें सुनती रहती। रोहित के साथ डिनर कर के वो वापस घर पहुंची। रमणिका और रवि बाहर गार्डन में ही इंतज़ार कर रहे थे।

“आओ रूही... बहुत देर कर दी फ्रेंड के घर? हम कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं”-रवि कॉफ़ी पीते हुए बोले

“भाई साहब..थोडा मिसकम्युनिकेशन हो गया..ये तो मेरे साथ थी दोपहर से”-रोहित ने दीदी के हाथ पर हाथ मारा

रोहिणी का चेहरा ऐसा हो गया जैसे उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया हो। रोहित और रोहिणी के हाथों में ढेरों शौपिंग बैग देखते हुए रमणिका बोली-

“क्या पूरा दिल्ली खरीद लाये?”

“बस दीदी ..थोडा बहुत”

“मुझे लग रहा है ..रोहिणी अपनी शादी की शौपिंग कर के आई है”-जीजा जी ने चुटकी ली

सब हंस दिए। रोहिणी शौपिंग बैग्स रखने के बहाने अन्दर चली गयी। रोहित की सुबह छह बजे की फ्लाइट थी । रोहिणी लेट गयी। रोहित के साथ बिताये पलों को याद करती रही। ग्यारह बजते ही पवन का फ़ोन आ गया। रोहिणी ने फ़ोन उठाया।

“कब आ रही हो”

“दो दिन बाद”

“मैं तुम्हे बहुत मिस कर रहा हूँ जान”

“प्लीज पवन इस तरह मत बोलो...मुझे अच्छा नहीं लग रहा”

“रोहिणी...पहले तो तुम्हें सब अच्छा लगता था और अब अचानक ऐसा क्या हुआ दस दिनों में कि तुम्हें मुझ से एलर्जी हो गयी है। आखिर मेरी गलती क्या है?”-पवन लड़ने के मूड में आ गया

“तुम्हारी कोई गलती नहीं, पर मैं अपने मन के साथ ज़बरदस्ती तो नहीं कर सकती। मेरे मन में प्यार वाली फीलिंग नहीं आ रही तो क्या करूँ?”

“क्या नहीं किया मैंने तेरे लिए? अपनी शादी भी तोड़ दी और तू अब नखरे दिखा रही है”

“मुझ से इस तरह बात मत करो। वापस आ कर बात करते हैं”-रोहिणी ने फ़ोन काट दिया

पवन फिर से फ़ोन करने लगा। रमणिका दरवाज़ा खटखटा रही थी। उसने फ़ोन उठा कर कहा-

“सुनो दीदी हैं रूम में। मैं तुमसे लड़ नहीं सकती। कल बात करेंगे। अब प्लीज दोबारा फ़ोन मत करना...बाय”

रोहिणी ने दरवाज़ा खोला

“सो गयी थी रूही”

“नहीं दीदी बाथरूम में थी..आइये”

रमणिका आकर बेड पर लेट गयी। रोहिणी ने उनके लिए लिए लायी हुई साड़ी का पैकेट उन्हें थमाया ।

“वाओ.. सुपर्ब..थैंक्स डार्लिंग”-उन्होंने रोहिणी को गले से लगा लिया

“और ये जीजू के लिए”

“कल सुबह खुद दे देना..अभी तो सो गए हैं”

“ओके दी”

“रोहित कैसा लगता है?”

“जी..अच्छा है”

“ही वांट्स टू मैरी यू”

“व्हाट?”-एकदम से रोहिणी के मुंह से निकला

“इसमें इतनी हैरानी की क्या बात है? मेरी रूही है ही इतनी काबिल कि कोई भी एक नज़र में मर मिटे”

“लेकिन दीदी...”

“क्या लेकिन? कोई और पसंद है तुम्हें?”

“नहीं तो”

“देख बाबू प्यार व्यार के चक्कर में कुछ नहीं पड़ा। विशाल को कितना चाहती थी तू... पर उसने क्या किया अमेरिकन से शादी कर ग्रीन कार्ड हासिल कर लिया। सब फालतू की बातें हैं। रोहित आई पी एस है, अच्छा लड़का है। कितना हैण्डसम है। तुम दोनों एक दूसरे के लिए परफेक्ट हो”

रोहिणी कुछ नहीं बोली। उसके मन में सही गलत का पजल चल रहा था। बारह बजने वाले थे। रोहित तीन कप कॉफ़ी लेकर दाखिल हुआ।

“क्या बातें हो रहीं हैं आर-सिस्टर्स में..?”

“आओ रोहित..कुछ नहीं बस ऐसे ही। ...शादी के शोर शराबे में बात करने का वक़्त ही नहीं मिला। अब रूही भी परसों जाने का बोल रही है”-रमणिका ने कॉफ़ी का कप उठाते हुए बोला

“अरे इतनी जल्दी क्यों जा रही हो? क्या सिर्फ मेरे इंतज़ार में रुकी हुई थीं?”-रोहित रोहिणी की तरफ कॉफ़ी मग बढाता हुआ बोला

रोहिणी ने उसकी तरफ थोड़े गुस्से वाली निगाह से देखा ।

“अरे मजाक कर रहा था यार..किताब का काम कितना हुआ?”

“ऑलमोस्ट कम्पलीटेड”-रोहिणी ने मुस्कराते हुए कहा

“अरे वाह ..ग्रेट”-रमणिका और रोहित साथ बोल पड़े

“चलो अब मैं सोने जाती हूँ, सुबह हॉस्पिटल जल्दी जाना है”-रमणिका उठते हुए बोली

“मैं भी चलता हूँ भाभी। दो घंटे तो सो लूँ”-रोहित भी उठ खड़ा हुआ

दोनों के जाने के बाद भी नींद रोहिणी की आँखों से कोसों दूर थी। रोहित या पवन... उसके मन में बवंडर उठा हुआ था। रोहित से अलग होना उसके लिए तकलीफ़देह हो रहा था। उसका वापस जयपुर लौटने का मन भी नहीं हो रहा था। खुल कर अपने मन की बात किसी से कह भी नहीं सकती थी। सभी सवालों के जवाब इंसान के अन्दर ही होते हैं पर वो उन्हें दूसरों से जानना चाहता है। शायद अपने जवाबों से बचने को खुद को भटकाए रखना चाहता हो ! मन कभी कभी इतनी जल्दी पलटी मारता है कि दिमाग को उसके दांव पेंच समझने में बहुत परेशानी आती है।

रात छोटी होने के बावजूद बहुत लम्बी हो गयी थी। एसी की आवाज़ उसे बुरी लग रही थी। उसने ए सी ऑफ कर दिया। बार बार करवटें बदलती रही। दिमाग में विचार बहुत तेज़ी से घूम रहे थे, उनकी सरसराहट में वो ऑंखें बंद भी नहीं कर पा रही थी। घड़ी की टिक टिक उसके कानों में गूंज रही थी। उसने वक़्त देखा चार बजने वाले थे।

“रोहित जाने वाला होगा”-उसने सोचा

बहुत चाहने पर भी उसने अपने आप को रोक लिया। ठीक सवा चार बजे रोहित का मोबाइल पर संदेश आया

“रूही मैं निकल रहा हूँ..फिर मिलेंगे...ख्याल रखना”

उसका बहुत मन करने लगा कि एक बार रोहित को मिल ले। रोहित की गाड़ी की जाने की आवाज़ भी उसने सुनी पर हिम्मत न जुटा सकी। एक एक सांस लेना उसे भारी पड़ रहा था। घबराहट और बेचैनी से उसका पेट भी खराब हो गया था। जब हालात काबू से बाहर हो गए तो उसने पौने छह बजे रोहित को फ़ोन किया।

“गुड मोर्निंग..तुम्हारे फ़ोन का इंतज़ार कर रहा था...अब चैन से जा पाऊंगा”- रोहित फ़ोन उठाते ही बोल पड़ा

“रोहित...आई ऍम मिसिंग यू लाइक एनीथिंग”-रोहिणी ने कहा

“आई मिस यू टू रूही”-रोहित ने फुसफुसा कर कहा

रोहिणी ने ऑंखें बंद कर गहरी सांस ली। वो उसके कहे शब्दों को अपने अन्दर ज़ज्ब कर लेना चाहती थी। रोहित अपने प्यार का इजहार करना चाहता था पर रूही के मन की कशमकश जानते हुए उसने खुद को रोक लिया। वो जानता था अगर रोहिणी उसे प्यार करती होगी तो उसके पास आ जाएगी वरना वो उसकी दोस्ती में ही खुश था।

“सुनो ..टेक ऑफ हो रहा है अब मुझे मोबाइल ऑफ करना होगा...पहुँच कर बात करता हूँ”

रोहित के फ़ोन रखने के बाद उसका मन खिल गया। उसके बारे में सोचते सोचते उसे नींद आ गयी। उस दिन वो दोपहर एक बजे तक सोती रही। जब अम्मा ने खाने के लिए आवाज़ दी तब उसकी नींद खुली। फ़ोन साइलेंट पर रह गया था। उसने उठा कर देखा तो मोबाइल पर पंद्रह मिस कॉल थे। जिसमें से दस तो पवन के ही थे। दो कॉल रोहित के थे। तीन फ़ोन घर से आये थे।

कई सन्देश भी थे। सबसे पहले उसने रोहित का सन्देश देखा –“रीचड सेफली...मिस यू”

फिर पवन का सन्देश खोला-“ मैं खुद को खत्म कर लूँगा। मुझे अभी फ़ोन करो वरना मैं जान दे दूंगा”

वो घबरा गयी। सन्देश सुबह सात बजे का था।

“अब तक तो वो मर चुका होगा! पुलिस आ गयी होगी। कहीं मेरे नाम से सुसाइड नोट तो लिख कर नहीं छोड़ गया होगा! मेरी वजह से वो मर गया। पुलिस मुझे ले जाएगी। कितनी बदनामी होगी ...मम्मी पापा तो जीते जी मर जायेंगे ”-सैकड़ों ख्याल चैन रिएक्शन की तरह उसके दिमाग में आते चले गए

उसने जोर से सिर को झटका देकर इस चैन रिएक्शन को तोड़ा। उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी पवन को फ़ोन करने की। उसका दिल बेहद घबरा रहा था। तभी फ़ोन की घंटी बजी। उसका दिल बैठ गया। देखा तो मम्मी का फ़ोन था। उसने घबरा कर फ़ोन नहीं उठाया –

“पुलिस घर पहुँच गयी होगी। मम्मी पूछेंगी क्यों किया ऐसा? ये दिन दिखाने को पाला था”

फ़ोन कट गया। थोड़ी देर बाद फिर घंटी बजने लगी। इस बार पापा का फ़ोन था। उसने फ़ोन उठा लिया और कांपती हुई आवाज़ में हैलो बोला।

“कहाँ हो बेटा? सुबह से तीन बार फ़ोन कर लिया। तुम्हारा लिखा आर्टिकल आया है आज पेपर में”

“पापा मैं सो रही थी, थोड़ी तबियत खराब है”-उसकी जान में जान आई

“तुम्हारी फोटो भी आई है पेपर में। सुबह से कई फ़ोन आ गए। तुम कब आ रही हो?”-माँ ने पापा से फ़ोन ले लिया

“मम्मी मैं कल रात डबल डेकर से आ रही हूँ”

अपना आर्टिकल पेपर में आने की उसे कोई ख़ुशी नहीं हुई। पवन के बारे में उसका मन परेशान था। उसने रोहित को फ़ोन मिलाया और सारी बात बताई।

“परेशान मत हो ..वो ऐसा कुछ नहीं करेगा। मुझे नंबर दो उसका”

“लेकिन...तुम...?”

“आई कैन हैंडल दा सिचुएशन..हैव फैथ !”

उसने नंबर दे दिया। लगभग पंद्रह मिनट बाद रोहित का फ़ोन आ गया।

“वो एकदम ठीक ठाक है और अपने ऑफिस में है”

“थैंक गॉड...वो ठीक है”

“सुनो रूही... जो इस तरह की धमकियाँ देते हैं वो प्यार नहीं करते। सिर्फ काबू में रखना चाहते हैं। प्यार किसी को बांधता नहीं। इस तरह किसी से सिर्फ सिम्पथी जताई जा सकती है, प्यार नहीं किया जा सकता। कोई भी दिक्कत हो तो फ़ोन कर लेना। एक दोस्त मान कर हमेशा भरोसा कर सकती हो”

रोहिणी हल्का महसूस करने लगी। फ्रेश हो कर उसने खाना खाया। शाम को फिर पवन का फ़ोन आया।

“तुमको कोई परवाह नहीं मैं जियूं या मरुँ ?”-पवन चिल्ला कर बोला

“मैं चाहती हूँ तुम जियो। लेकिन मुझ पर प्रेशर बनाना छोड़ दो प्लीज ! मैंने बोला था न मुझे वक़्त दो। इस तरह बार बार फ़ोन कर के और मरने की धमकी देकर तुम मुझे इर्रीटेट कर रहे हो”

“कब आ रही हो?”

“कल रात”

“मैं लेने आ जाऊंगा”

“नहीं ..मेरे साथ दीदी और जीजा जी भी आ रहे हैं”-रोहिणी ने फिर से झूठ बोला

“ओके डिअर फिर हम परसों सुबह मिलेंगे”

“जब भी मिलना होगा। मैं खुद फ़ोन कर दूंगी..बाय”-रोहिणी ने रूखेपन से कहते हुए फ़ोन काट दिया

रोहिणी अगली रात जयपुर पहुँच गयी थी। घर आ कर उसे सुकून मिला। रोहित की याद उसके साथ आई थी। पर उसने रोहित से बात नहीं की। वो कुछ दिन अकेले रह कर सोचना चाहती थी। उसे लग रहा था शायद रोहित को देख उसके मन में आकर्षण है जो समय के साथ फीका पड़ जायेगा। वो पवन को धोखा नहीं देना चाहती थी। वो चाहती थी कि पवन के लिए उसके मन में पहले सी बेकरारी वापस लौट आये ! लाख चाहने पर भी उसका मन पवन से मिलने को तैयार नहीं हो रहा था। पर वो मुंह नहीं छुपाना चाहती थी। उसने खुद को पवन की जगह रख कर सोचा।

“जो भी हो पर मुझे उससे आमने सामने बैठ कर बात करनी होगी। वो दस दिनों से तकलीफ में है। खुल कर बात करनी होगी”-उसने फैसला किया

पवन और वो एक पार्क में मिले। पवन बेहद उदास दिख रहा था। उसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी। और आँखों के नीचे काले घेरे बन गए थे। पवन ने मिलते ही उसे गले लगाना चाहा पर रोहिणी ने हाथ से लगभग पीछे धकेल दिया।

“क्या सब नाटक था? प्यार वो वादे?”-पवन बोला

“वो उस समय का सच था। मैं पूरे मन से तुम्हारे साथ था। पर आज का सच ये है कि मेरे मन में तुम्हारे लिए कुछ नहीं बचा। सिर्फ एक फ़िक्र है क्यूंकि मैं जानती हूँ मेरे जाने से तुम्हें बहुत तकलीफ हो रही है”

“बहुत मेहरबानी जो आपको फ़िक्र है। ऐसा क्या कर आई दिल्ली में जो प्यार एकदम से वाश आउट हो गया? किसी के साथ सेक्स कर लिया क्या?”-पवन ने गुस्से में बोला

“तुम्हारी लाख कोशिशों के बाद भी तुम्हारे साथ डेढ़ साल में सेक्स नहीं किया तो दिल्ली में दस दिन में सेक्स कर आउंगी? यही थिंकिंग है तुम्हारी मेरे बारे में? कितना समझते हो तुम मुझे ..वाह”-रोहिणी गुस्से में लाल हो गयी

“रोहिणी ऐसा नहीं है ..मेरी जान प्लीज.. सॉरी ... मैं तुम्हारी बहुत रेस्पेक्ट करता हूँ। मैं दस दिन से पागल हो रहा हूँ। इसलिए कुछ भी बोल रहा हूँ। आई ऍम सॉरी!” पवन की आँखों में आंसू आ गए वो रोहिणी के दोनों हाथ थाम उसके पैरों पर बैठ गया

रोहिणी को उसका छूना एक अजीब सा अहसास दे रहा था। जब तक किसी रिश्ते में प्यार होता है हर चीज़ अच्छी लगती है और प्यार के जाते ही जैसे वो रिश्ता लाश बन जाता है और लाशें हमेशा ठंडी और बेजान होती हैं। उन्हें छूना भयावह होता है। उसने अपना हाथ छुड़ा लिया और उठ खड़ी हुई।

“खुद को संभालो। मैं तुम्हारे साथ अब और नहीं चल सकती। मुझे तकलीफ है कि मेरी वजह से तुम तकलीफ में हो पर सिर्फ इस गिल्ट से बचने को मैं खुद को तिल तिल नहीं मार सकती। आई ऍम सॉरी पवन। इट्स आल ओवर”

“मैं तुम्हारे लव लेटर्स सबको दिखा दूंगा। तुम्हारे नाम सुसाइड नोट लिख कर जाऊंगा। मैं तुम्हें चैन से जीने नहीं दूंगा ..समझी तुम...तुमने क्या समझ रखा है ..”-पवन की आवाज़ तेज़ हो गयी

“तुम्हें अगर यही सही लगता है तो ऐसा ही करो”- रोहिणी वहां से चल दी

आस पास बैठे प्रेमी जोड़े चौंक कर प्यार का हश्र देख रहे थे। इसी पार्क में कभी दोनों प्यार से एक दूसरे की आँखों में ऑंखें डाल कर देखते थे। आज यही वो अलग हो गए।

उसने रोहित को फ़ोन कर के सब बता दिया। पवन की दी हुई धमकी से वो डरी हुई भी थी।

“अगर वो इतना सड़कछाप है कि तुम्हें बदनाम करने की धमकी दे रहा है तो वो तुम्हारे काबिल ही नहीं था। घबराओ मत मैं उसको अच्छे से समझा दूंगा”-रोहित ने उसे दिलासा दिया

एक महीना बीत गया । पवन के फ़ोन आते रहे वो रोहिणी को कभी प्यार से कभी रो कर कभी गुस्से में समझाता रहा। रोहिणी के मन में उसके लिए विरक्ति भाव आ गया था। वो चुपचाप उसकी हर बात सुनकर फ़ोन रख देती। रोहित से उसकी कभी कभी बात हो जाती। अब रोहित उससे अपने प्यार का इजहार नहीं करता। वो अच्छे दोस्तों की तरह आपस में बात करते थे। रोहिणी के मम्मी पापा उसके पवन के साथ हुए ब्रेकअप से बहुत खुश थे। घर में अब उसका और ज्यादा ख्याल रखा जाता। इस तरह तीन महीने बीत गए। कई दिनों से रोहित उसका फ़ोन नहीं उठा रहा था और न ही उसे फोन कर रहा था। वो रोहित को बहुत याद कर रही थी।

“शायद रोहित भी मुझे छोड़ गया। जिसको मैंने चाहा वो कभी मेरा नहीं हो पाया। अब मैं भी उसे फ़ोन नहीं करुँगी। अपने करियर पर फोकस करना है। बाकी प्यार तो मेरी किस्मत में नहीं। पवन को मैंने खुद मना कर दिया। पवन कह रहा था कि जब तुम्हें कोई न मिले या छोड़ जाये तो मेरे पास लौट आना। मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा। पर ऐसा कहाँ होता है? एक बार जाने के बाद प्यार कभी नहीं लौटता। जड़ तक सूख चुका पेड़ कभी हरा नहीं होता । शायद रोहित मेरी ज़िन्दगी में इसलिए ही आया था कि मुझे ये अहसास हो सके कि पवन से मुझे प्यार नहीं था । सिर्फ एक समझौता था जो मैंने भावनाओं में बह कर लिया था”

एक दिन जब वो यूनिवेर्सिटी से वापस आई तो रोहित अपनी माँ और बहन के साथ बैठा हुआ चाय पी रहा था। मम्मी पापा उसकी आवभगत में लगे थे। उसे अचानक देख कर वो चौंक गयी। उसने रोहित की माँ को नमस्ते किया। रोहित की बहन शिखा तपाक से उसके गले लग गयी।

“हम सब अजमेर शरीफ जा रहे थे तो सोचा पहले आपके दर्शन कर लें”-रोहित ने मुस्कराते हुए कहा

“ओह अच्छा...अपने बताया नहीं”

“सोचा आपको सरप्राइज दें!”

रोहित को देख कर रोहिणी के मन में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी। उसकी सारी उदासी और शिकायतें जैसे हवा हो गयी।

“अंकल आप लोग भी चलिए न हमारे साथ। सब साथ होंगें तो बहुत मज़ा आयेगा”-रोहित की बहन शिखा बोली

रोहित और उसकी माँ ने इस बात पर उसका समर्थन किया। रोहिणी के मम्मी पापा साथ चलने को तुरंत राजी हो गए। और वो तो हमेशा से राजी थी। वो सब उस रात रोहिणी के घर पर ही रुके। रोहित को अपने आस पास देख वो बहुत ज्यादा खुश थी। सबकी मौजूदगी में बात करने का कोई खास मौका नहीं मिल पाया। अगले दिन सुबह सात बजे वो सब अजमेर को निकले। रोहित आगे ड्राईवर के साथ वाली सीट पर बैठा। रोहिणी चाहती थी वो उसके साथ बैठ जाये चाहता तो रोहित भी यही था पर सबके सामने ऐसा करने से बचा। बारिश के मौसम में रास्ता बहुत हरा भरा हो गया था। शिखा बार बार फोटो खीचने को कार रुकवा लेती थी। रोहिणी रोहित से अकेले में ढेरों बातें करना चाहती थी। रोहित का मन भी उससे बातें करने को बेचैन था पर वो उसे और तडपाना चाहता था। वो अपने मन की उसे कह चुका था अब उसके मन की सुनना चाहता था। दोनों की माएं बिन रुके बातों में लगीं थीं । रोहिणी के पापा भी बराबर उनका साथ दे रहे थे । मौका मिलते ही रोहिणी ने उसे फ़ोन पर मैसेज किया

“तुमने मुझे इतने दिन से फ़ोन क्यों नहीं किया?”

“ताकि तुम मुझे मिस कर सको”-रोहित का तुरंत जवाब आया

“अगर मुझे कुछ हो जाता तो ?”

“तुम्हारी मम्मी से तुम्हारे हाल पूछ लेता था”

***

अजमेर पहुँचते ही अचानक रोहित ने ड्राईवर को बोला-

“यूनिवेर्सिटी की तरफ लेना”

फिर बोला

“रोहिणी मैं तुम्हें अजमेर यूनिवेर्सिटी में प्रोफेसर अवस्थी से मिलवा देता हूँ। जिसके बारे में हमारी दिल्ली में बात हुई थी। तुम्हारी थीसिस में वो तुम्हारी मदद कर सकते हैं। अंकल आप लोग दरगाह जाइये हम प्रोफेसर साहब से मिल कर आते हैं”

रोहिणी कुछ नहीं बोली। उसके पिता ने हामी में सिर हिलाया। दोनों यूनिवेर्सिटी के सामने उतर गए।

“कौन से प्रोफेसर अवस्थी? हमारी कब बात हुई उनके बारे में?”-रोहिणी ने कार के जाते ही पूछा

“बुद्धू हो तुम...प्रोफेसर अवस्थी के बहाने हम एक घंटा अकेले में वक़्त गुजार सकते हैं न”-रोहित के उसके सर पर हलकी सी थपकी मारी

रोहित ने एक ऑटो को रोका-

“भैया! आना सागर ले चलो”

दोनों ऑटो में बैठ गए। रोहिणी का मन रोहित से अपने प्यार का इजहार कर देने को उतावला हो रहा था। पर वो चुप रही। रोहित भी आज सिर्फ उसके बोलने ने इंतज़ार में था। रोहिणी जान बूझ कर रोहित से सट कर बैठ गयी। बाहर हल्की बूंदा बांदी होने लगी। ऑटो में दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई।

आना सागर की पाल पर टहलते हुए दोनों के हाथ बार बार टकरा जाते। आखिर रोहिणी ने धीरे से रोहित का हाथ थाम लिया।
“अब कुछ बोलो भी या मौन व्रत है?”-रोहित ने उसकी तरफ देखते हुए बोला

“चलो बोटिंग करते हैं”-रोहिणी ने झील की तरफ देखते हुए कहा

दोनों एक छोटी पैडल वाली नाव पर सवार हो गए। आसमान पर घने बादल थे। झील और आसमान जैसे एक रंग के हो गए थे। रोहिणी ने गहरी नज़र से रोहित को देखा। वो झील में तैरती बतखों की तस्वीरें लेने में व्यस्त था। झील में उठ रही सैकड़ों तरंगें रोहिणी के मन में उठ रही तरंगों से मिल रही थीं।

“रोहित”-वो एकदम से बोली

“हूँ”-रोहित ने लापरवाही से कहा

कुछ बतखें नाव के एक दम पास आ गयीं थीं। वो उन्हें छूने की कोशिश में था। कुछ देर ख़ामोशी छाई रही फिर रोहिणी ने हिम्मत जुटा कर होंठ खोले-

“आई लव यू”

“क्या...”-रोहित एक दम से उसकी तरफ मुड़ा

“कुछ नहीं”

“बोलो न...मैं सुन नहीं पाया”-रोहित एकटक उसकी ओर देखता हुआ बोला

“तुम बहुत अच्छे हो”

“नहीं तुमने कुछ और बोला था”

“इसका मतलब तुमने सुना था”

“हाँ...फिर से सुनना चाहता हूँ”-रोहित ने उसके दोनों हाथ अपने हाथों में थाम लिए

“आई लव यू रोहित”-कुछ पल खामोश रहने के बाद रोहिणी बोली

रोहित ने उसके हाथों को अपने माथे पर लगा लिया। बारिश फिर से शुरू हो गयी थी। उन्होंने नाव किनारे की तरफ मोड़ ली। झील, हवा, बारिश और आसमान उनकी मुहब्बत के गवाह थे !

रोहित की बहन का फ़ोन आ रहा था।

“भैया ..हमने तो चादर चढ़ा कर मन्नत भी मांग ली। आप लोग कब आ रहे हो?”

“हाँ थोडा टाइम लग गया..अवस्थी जी ने रोक लिया। देर हो रही है अब पुष्कर चलते हैं... तुम ड्राईवर से कहो आना सागर की तरफ से आये हम रास्ते में मिल जायेंगे”

“क्यों भैया..आप दरगाह में दुआ नहीं करेंगे?”

“मेरी तो हर दुआ कबूल हो गयी”-रोहित ने रोहिणी की तरफ देखते हुए उसका हाथ थाम लिया

दोनों के चेहरों पर भीगी हुई मुस्कान थी।



































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