"कौन है वहां?

कौन है?

जल्दी बताओं नही तो इसी लाठी से टांगे तोड़ दूंगा।" शाम के धुंधलके में राजेन्द्र सिंह अपनी लाठी पटकते हुए बोले।

आम के बाग में पेड़ों के झुरमुट से एक १०-१२ वर्षीय बच्ची हाथ में २ कच्चे आम पकड़े हुए, डरी-सहमी बाहर आई।

"रे आम चोर! इधर आ जल्दी। कहां रहती है तू? किसकी लौंडिया है? जल्दी बता वरना तेरे हाथ-पांव तोड़ दूंगा।" राजेन्द्र सिंह ने गुस्से से कहा।

बच्ची डर कर थर-थर काँपने लगी। उसके कदम उसके साथ नही दे रहे थे। आगे बढ़ने को हुई तो गिर पड़ी। राजेन्द्र सिंह उसे उठाने के उद्देश्य से उसके पास गया और उठाया और डूबते सूरज की रोशनी में उसे देखा।

मैली-कुचैली फ़टी हुई फ्रॉक, बिखरे बाल मिट्टी से सना शरीर उसके किसी मजदूर की बेटी होने की पुष्टि कर रहे थे।

उसे देखकर राजेन्द्र सिंह का गुस्सा गायब हो गया।

प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा, "तुझे आम बहुत पसंद हैं?"

"हाँ बाबा"। बच्ची डरते हुए बोली।

राजेन्द्र सिंह ने फिर पुचकारा,

"तुझे आम चाहिए?"

अब बच्ची का डर थोड़ा कम हुआ तो सामान्य भाव से बोली,

"हाँ बाबा"।

"तो मुझसे मांग लेती, इस तरह चोरी करने की क्या जरूरत थी"? राजेन्द्र सिंह के लगातार प्यार से बात करने से बच्ची का डर चला गया और वो सहज हो गयी।

"अच्छा बताओ कच्चे आम चाहिए या पके हुए?"

बच्ची सोचने लगी।

"कोई बात नही, मैं तुम्हे हर तरह के आम दे देता हूँ सब खा लेना"।

बच्ची अब खुश थी।

साठ वर्षीय राजेन्द्र सिंह चुस्ती-फुर्ती में युवाओं को मात देते थे झट से चढ़ गए पेड़ पर और आम तोड़-तोड़ कर बच्ची को देने लगे।

पेड़ पर से ही राजेन्द्र सिंह ने पूछा, "कोई झोला, बोरा लायी हो? किसमे ले जाओगी?"

बच्ची ने उदास होकर इन्कार में सर हिलाया फिर खुश होते हुए अपनी फ्रॉक दिखा कर बोली, "इसमें।"

राजेन्द्र सिंह मुस्कुरा उठे।

राजेन्द्र सिंह आम तोड़ते जा रहे थे और बच्ची उन्हें अपनी फ्रॉक में इकठ्ठा करती जा रही थी।

जैसे-जैसे आम बढ़ रहे थे वैसे-वैसे फ्रॉक ऊंची होती जा रही थी।

फ्रॉक की हर इंच की ऊंचाई के साथ राजेन्द्र सिंह की आंखों की चमक भी बढ़ रही थी।

राजेन्द्र सिंह इतने आम दे चुका था कि उसकी मनवांछित 'चीज' उसे दिख जाए।

अब सूरज अस्त होने ही वाला था।

****

अगली सुबह नहर के पास राहगीरों ने एक बच्ची की लुटी-नुची लाश देखी। किसी ने बेरहमी से उसके साथ दरिंदगी की थी।

राजेन्द्र सिंह अभी भी लाठी लिए अपने बाग़ की रखवाली कर रहा था।

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