कॉलेज का सेकंड इयर शुरू हो चुका था। विक्रम अपने पहले प्यार प्रीति को भूलने की कोशिश कर रहा था पर उसे भूल नही पा रहा था, हमेशा नजरों के सामने जो रहती थी। दोनो एक दूसरे के सामने रहते हुए भी, एक ही क्लास में पढ़ते समय भी एक दूसरे से अजनबी बने रहते। एक दूसरे को देखकर मुस्कुराना भी बन्द था। विक्रम को अब किसी भी तरह के प्यार की कोई तलाश नही थी। वो कॉलेज के फर्स्ट इयर में ही ऐसा अनुभव ले चुका था, जिसने उसे सिखा दिया कि अगर किसी लड़की से लम्बे समय तक व्यवहार और बातचीत बना कर रखना है, तो उससे कभी भी प्यार व्यार की बाते नही करना चाहिए।
प्रीति से बातचीत बन्द होने के बाद उसका ध्यान रागिनी पर गया। उसने पहले कभी रागिनी से ज्यादा बातें नही शुरू की थी। ना ही उसने पहले कभी उसे नोटिस किया था। प्रीति से बातचीत बन्द होने के बाद जब वो अकेला बैठा रहता तो वो उसके पास आकर बैठ जाती और उससे बाते करने लगती। विक्रम चुपचाप उसकी बातें सुनता रहता। शायद इसीलिए रागिनी उसके पास ज्यादा बैठने लगी और बाद में विक्रम को भी उसका यूँ बाते करना अच्छा लगने लगा। उसे कभी ये भी लगता कि रागिनी शायद उसे पसन्द करती है पर उसने पहले ही अपने मन को समझा लिया कि इस बार पहले की तरह कुछ नही करना है। क्योंकि वो अब रागिनी की दोस्ती नही खोना चाहता था।
समय ऐसे ही बीतता रहा। विक्रम ने अपने मन को दोस्ती के दायरे में समेट कर रखा था। वो फरवरी का महीना था। जब हर तरफ प्यार की बयार बहने लगी थी। वो मौसम ही कुछ ऐसा था। पर विक्रम को इस वेलेन्टाइन वीक से कुछ मतलब नही था। उसका दोस्त जयन्त हमेशा की तरह अपने सच्चे प्यार की तलाश और हर किसी को प्रपोज करने की आदत को छोड़ नही पा रहा था। उसकी इस आदत की वजह से विक्रम भी अब उससे कम बातचीत करता था। वो चुपचाप कॉलेज में आता, अपने कुछ दोस्तों से बात करता। थोड़ी बहुत पढ़ाई करता और चला जाता। उसकी तन्हाईयों में हमेशा की तरह रागिनी उससे आकर बात कर लेती।
और उस दिन तो उसने विक्रम को चौंका दिया। विक्रम उदास सा बैठा था। रागिनी उसके पास आकर बोली - क्या जनाब, आज खाली हाथ कैसे ?
खाली हाथ मतलब, बुक्स तो है ?
अरे, वो नही बुद्धु मेरा मतलब था। आज रोज नही लाए मेरे लिए ?
विक्रम को कुछ कहते नही बना पर बात बनाते हुए बोला - पता है ना रोज कितने महँगे हो रहे है।
हा हा हा कंजूस। किसी बाग से ही ले आते ।
मुझे मार खाने का शौक नही है, पर फिर भी कोशिश करूँगा।
अगले दिन प्रपोज डे था। पर विक्रम किसी काम की वजह से कॉलेज न आ सका।
उसके बाद चॉकलेट डे के दिन वो कॉलेज आते ही सबसे पहले रागिनी के पास गया। बड़े विश्वास से उसका हाथ पकड़ा और इससे पहले की वो कुछ बोल पाती चॉकलेट उसके हाथ में पकड़ाते हुए कहा - हैप्पी चॉकलेट डे।
ओह तो जनाब को याद रहा। थैंक्स। यार ये वाली तो मेरी फेवरिट भी है। - रागिनी ने खुश हो कर कहा।
मतलब मेरी पसंद सही निकली। वैसे मुझे तुमसे कुछ कहना था।
अरे हाँ मुझे भी तुम्हे एक जरूरी बात बतानी थी।
तो बताओ।
पहले तुम
नही यार लेडीज फर्स्ट
ओके मैं ही बताती हूँ। परसों मेरे पापा के दोस्त अपने बेटे के साथ मुझे देखने आए थे। उन्होंने मुझे पसंद भी कर लिया। और शायद इसी महीने सगाई भी हो जाए।
क्या ?? - विक्रम एकदम चौंक गया।
हाँ, सच यार मैं तो पापा से मना कर रही थी पर तुम्हे पता लड़कियों को तो परायी लक्ष्मी ही मानते है। और मेरे पापा तो जाने कब से मेरी शादी के लिए लड़के ढूंढ रहे थे ?
विक्रम ने अपने दिल और दिमाग दोनो को संभाला और मन को मजबूत करके बोला - बहुत बहुत बधाई हो यार। खाली हाथ ही आ गई। मिठाई तो लाती।
सॉरी यार वो तो भूल गई।
चलो कोई बात नही। वैसे लड़का कैसा है ?
मुझे तो अच्छा नही लगता यार। उसका रंग काला है। और थोड़ा मोटा भी है। राजेश नाम है उसका।
अच्छा राजेश को तो मैं जानता हूँ।
कैसा लड़का है वो ? उसके बारे में कुछ बताओ ना।
विक्रम राजेश को जानता था कि वो एक शराबी और थोड़ा खराब स्वभाव का लड़का है पर विक्रम ने सोचा कि अगर वो रागिनी को यह बात बताएगा तो रागिनी उसकी बातों पर विश्वास करेगी भी या नही और बताने से कही वो कोई गलत फैसला नही कर ले। इस वजह से उसने अपने मन की बात मन में दबा ली और बोला - यार अब इस बारे में मैं क्या कहूँ। दोस्तों से तो वो अच्छा रहता है पर पति कैसा बनेगा ? ये तो वक्त ही बताएगा।
हाँ बात तो सही है लेकिन कभी सोचती हूँ शादी के बाद भी मेरी किस्मत अच्छी निकलेगी या नही ? क्या मेरी किस्मत में राजेश ही लिखा है ?
रागिनी ये सब वक्त पर छोड़ दो। अगर तुम्हारी किस्मत में वो लिखा है तो तुम्हारी शादी उसी से होगी। वैसे एक बात बताओं क्या तुमसे कभी किसी ने आई लव यू नही कहा ?
हाँ कहा है पर तुम जानते हो जिस बात को कहने से कोई अर्थ नही निकले, वह कहना किस काम का ? प्यार कहने, करने और निभाने में बहुत अंतर है यार। प्यार करने की दम के साथ उसे निभाने की भी दम होनी चाहिए। वैसे तुम बताओ तुम्हे कोई मिली क्या ?
नही यार मनचाहा प्यार और जीवन साथी किस्मत वालों को ही मिल पाता है। मेरी किस्मत ऐसी कहा ?
चलो कोई बात नही। मैं भगवान से प्रार्थना करूंगी कि तुम्हे भी जल्दी से कोई अच्छी लड़की मिल जाए। अच्छा बाय। कल मिलते है।
रागिनी चली गई पर विक्रम अकेला बैठा-बैठा सोच में डूब गया। वो आज फिर वही गलती करने वाला था जो उसने प्रीति के साथ की थी। पर अच्छा हुआ जो उसने पहले रागिनी की बात सुन ली। उसने अपने दिल को संभाल लिया। क्योंकि इस बार वो अनुभवी हो चुका था।
वेलेन्टाइन डे के दिन विक्रम का दिल बहुत खुश था। वो क्लास के दरवाजे पर खड़ा था। रागिनी उसकी तरफ आ रही थी तो वो भी मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ बढ़ा। पर अचानक रास्ता बदल कर क्लास में चला गया।
रागिनी थोड़ी देर बाद क्लास में आई। क्लास खाली थी। उसने देखा विक्रम एक तरफ बैठा एक बैग में से कुछ निकाल रहा था। वो उसकी तरफ गई। विक्रम उसे देख कर चौक गया और बोला- अरे रागिनी तुम
हाँ क्या छुपा रहे हो यार और किसके लिए ?
वो खास है यार
अच्छा कौन ?
तुम - कहते हुए उसने एक लाल गुलाब, लव शेप्ड ग्रीटिंग कार्ड के साथ दिया।
हेप्पी वेलेन्टाइन डे
ओह थैंक यू यार तुम्हे भी हेप्पी वेलेन्टाइन डे पर यार देर कर दी तुमने। शायद पहले ऐसा कुछ बताते तो चांस था। - उसने रोज और कार्ड लिया। और कार्ड की लाइन्स पढ़ने लगी।
अच्छा। मेरा बेडलक यार। पहले पता नही था वरना कॉलेज के फर्स्ट इयर में ही प्रपोज मार देता
अच्छा बच्चू ! तो जनाब के दिल में तब से ये चल रहा है। पर यार तुम्हे तो सब पता है ना फिर भी ?
यार दोस्त को हैप्पी वेलेन्टाइन नही बोल सकते क्या ? जरूरी तो नही उसके लिए ये प्यार मोहब्बत का रिलेशन बनाना ही जरूरी हो। और मैंने तुम्हे हेप्पी वेलेन्टाइन डे कहा है यार आई लव यू नही। टेंशन मत लो।
यस यार तुम सच में मेरे सबसे अच्छे और समझदार दोस्त हो। आज जब से कॉलेज आई हूँ तीन लड़को ने प्रपोज कर दिया। इन सबको लड़कियों की भावनाएं भी तो समझना चाहिए। पर ये तो सोचते ही नही है कुछ। वैसे चॉकलेट कहाँ है ?
अरे हाँ बातों के चक्कर में वो तो भूल ही गया। ये लो।
रागिनी ने चॉकलेट ली और अपने बैग में से चॉकलेट निकाल कर उसे दी। लो आज मैं भी तुम्हारे लिए चॉकलेट लेकर आई हूँ।
थैंक्स यार ।
वैसे जनाब ने आज बहुत पैसे खर्च कर दिए। क्या सात दिन में ही अमीर हो गए। उस दिन तो गुलाब खरीदने के पैसे नही थे।
हाँ यार क्या करे ? कभी कभी खर्च कर भी लेना चाहिए। वैसे आज तो हर चीज के रेट चौगुने हो गए यार। प्यार करना सच में बहुत महँगा है आज के जमाने मे।
हाँ यार ये तो सही है।
तो चलो अब ये सब तो हो गया। कहीं घूमने का प्लान है क्या ?
क्या सच में ? कहीं घूमने का सोचा है ?
हाँ, और क्या चलो किसी अच्छे से रेस्टोरेंट मे चल कर कॉफी पीते है। और मुझे तुम्हे कुछ बात भी बतानी है।
ओके चलो।
10 मिनट बाद दोनो एक रेस्टोरेंट में बैठे थे। कॉफी का ऑर्डर दिया जा चुका था।
हाँ तो क्या बात बताने वाली थी तुम ?
मैने तुम्हे बताया था ना कि मेरे पापा इसी महीने मेरी सगाई करवाने वाले है।
हाँ।
तो मेरी सगाई तय हो गई 27 फरवरी को, याद रखना भूल मत जाना।
27 फरवरी को - विक्रम को अचानक प्रीति के बर्थडे वाली शाम याद आ गई। उसी दिन उसे जिन्दगी में पहली बार प्यार का अहसास हुआ था। 27 फरवरी की तारीख वो कभी नही भूल पाएगा। और अब तो बिलकुल नही क्योंकि उसी दिन रागिनी की सगाई है।
और आना जरूर। जयन्त को भी ले आना। वैसे तो मैने उनसे बोल दिया है। पर तुम भी बोल देना।
ओके ठीक है।
तभी कॉफी आ गई। विक्रम को आज कॉफी कुछ ज्यादा ही कड़वी लग रही थी पर वो कुछ नही बोला।
27 फरवरी के दिन वो रागिनी की सगाई में जाने के लिए तैयार हो गया पर न जाने क्यों वो नही जा सका। अचानक उसके कदम बढ़ते बढ़ते रह गए। वो दुखी तो नही था पर खुश भी नही था।
अगले दो तीन दिन तक रागिनी कॉलेज नही आई। एक अजीब सी बैचेनिया उसके मन में उठ रही थी। पर चौथे दिन रागिनी आई। पहले तो वो नाराज रही पर बाद में विक्रम के मनाने पर मान गई। सगाई में न आने का कारण पूछा। विक्रम ने उसी दिन अपने परिवार में किसी की शादी में जाने का बहाना बना दिया।
जब विक्रम ने उससे तीन दिन तक न आने का कारण पूछा तो रागिनी ने बताया कि उसके परिवार के सारे मेहमान घर पर ही थे। उसने सगाई वाले दिन का पूरा हाल सुनाया। सुनकर विक्रम का दिमाग और ज्यादा खराब हो गया। इसके बाद वो अपनी शादी की बातें करने लगी। उसने बताया कि वो शादी के बाद भी कॉलेज आएगी। सरकारी जॉब के लिए तैयारी करेगी। अपने घर को नई नई चीजों से सजा कर रखेगी। अपने पति के साथ घूमने जाएगी। उसके और भी कई सपने थे जो अक्सर लड़कियाँ देखती है।
विक्रम उसको कहना चाह रहा था कि वो भी उसे प्यार करने लगा है, वो भी उसके सपने पूरे करना चाहता है। पर जाने क्यों रागिनी के कहे शब्द जिस बात को कहने से कोई अर्थ नही निकले, वह कहना किस काम का ? प्यार करने की दम के साथ उसे निभाने की भी दम होनी चाहिए। उसे याद आ गए। ये बात सच भी है। वो चाहे तो रागिनी से भी कह सकता है कि वो उसे प्यार करता है पर क्या वो उसे निभा पाएगा ? शायद नही।
अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर उसकी शादी थी। इस बार उसका जाने का बिलकुल मन नही था। पर शादी की व्यस्तता के बीच भी रागिनी ने विक्रम को फोन किया। तब विक्रम ने अपना फैसला बदल दिया। क्या पता फिर न जाने कब रागिनी से मिलना होगा ? यही सोच कर वो उस दिन वहाँ पहुँच गया। सोचा शादी से पहले एक बार रागिनी से बात कर ले। इसलिए निश्चित समय से 2 घंटे पहले ही उसके घर पहुँच गया। पर वो ब्यूटी पार्लर गई थी। उसके अरमान दिल में ही रह गए। अफसोस के साथ वो विवाह स्थल पहुँचा। वहाँ कॉलेज के सभी दोस्त जयन्त, रूचि, मीरा और प्रीति आए थे। उसने सबसे हाय हैल्लो किया। फिर सबने साथ मिलकर खाना खाया। जयमाला का समय हुआ तो एक भव्य सुन्दर स्टेज पर रागिनी और राजेश के जयमाला का कार्यक्रम हुआ। पर जब नवयुगल के विवाह की यादों के लिए फोटो खींचे जा रहे थे तो राजेश लड़खड़ाने लगा। और कुर्सी पर बैठ गया। कुछ लोग समझे शायद उसकी तबीयत खराब हो गई है। पर राजेश के एक दोस्त ने विक्रम को बताया कि आज राजेश की शादी की खुशी में राजेश और उसके दोस्तों ने शराब पी थी। इसी वजह से वो लड़खड़ा रहा है। विक्रम और उसके दोस्तों को ये बात पता चली तो सब राजेश की इस हरकत की बुराई करने लगे। खासकर विक्रम को सबसे ज्यादा बुरा लगा। काश वो रागिनी को एक बार राजेश के बारे में बता देता। पर अब कुछ नही हो सकता था। कुछ समय बाद राजेश और रागिनी का आशीर्वाद समारोह शुरू हुआ। परिवार वालों के बाद जब कॉलेज फ्रेंड्स की बारी आई तो विक्रम और बाकी सभी कॉलेज के दोस्त ग्रुप में स्टेज पर गए। विक्रम और बाकी सभी दोस्तों ने अपने अपने गिफ्ट्स और अपनी शुभकामनाएं दी। विक्रम ने रागिनी से हाथ मिलाया और उसे हैप्पी मेरिड लाइफ बोला। उस दिन उसे रागिनी की आँखों में एक अफसोस नजर आया । विक्रम को नही पता था कि ये उसका रागिनी के साथ अंतिम संवाद है।
कॉलेज खुलने के बाद विक्रम ने बहुत दिनों तक रागिनी का इंतजार किया पर रागिनी फिर कभी नही आई। उसका फोन नम्बर भी बदल चुका था। बाद में उसे उसकी एक सहेली से पता चला कि रागिनी अब बहुत बीमार रहती है। राजेश खूब शराब पीता है। कुछ काम भी नही करता है और अक्सर रागिनी और राजेश में लड़ाई होती रहती है। वो कभी कभार उसके साथ मार पीट भी करता है। उसने उसकी पढ़ाई भी छुडवा दी। सुनकर विक्रम को बहुत धक्का लगा। उसे रागिनी के साथ बिताए लम्हे और बाते याद आने लगी। उसने शादी से पहले क्या क्या सपने देखे थे ? रागिनी के सारे सपने टूट गए। कहीं न कहीं उसकी इस हालत के वो भी जिम्मेदार था। उसने रागिनी के पूछने पर भी राजेश के बारे में सब सच बात नही बताई। पर उसे रागिनी की बात याद आ गई जो उसने उससे कही थी विक्रम चाहे तुम कितनी भी कोशिश कर लो होता वही है जो किस्मत में लिखा है। मेरी किस्मत में अगर दुख लिखा है तो उसे कोई चाह कर भी नही रोक सकता।
अब विक्रम का इस प्यार से विश्वास उठ चुका था। कॉलेज के फर्स्ट इयर में उसने प्रीति को अपने दिल की बात बताकर गलती की थी पर इस बार उसने रागिनी से प्यार होने के बावजूद उससे कुछ नही कहा। शायद वो उसे अपने दिल की बात बता देता है तो उसके दिल में ये मलाल न रहता। पर इस बार वो इसलिए ही डरता रहा क्योंकि वो रागिनी से शायद सच्चा प्यार करने लगा था। सच में प्यार में इंसान को क्या करना चाहिए और क्या नही ये कोई सही तरह से नही बता सकता है।
-समाप्त-
(ये कहानी आपको कैसी लगी। कहानी पर कॉमेंट और रेटिंग देकर बताए। आपके अनमोल विचारों का मुझे इंतजार रहेगा। )

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