रवींद्र नाथ टैगोर के बांग्ला लेख का हिंदी अनुवाद

एक समय की बात है | एक कन्या एक कहानी का निर्माण कर रही है | उस कहानी में उसने मुझे नायक (हीरो) के रूप में प्रस्तुत किया | वह चाहती थी की कहानी का नायक सभी समस्याओं को वैसे ही सुलझाए जैसे मैं अपने यथार्थ जीवन में सुलझाता | उसने लिखा कि कहानी का नायक एक अँधेरी कोठरी में बंद हो गया है और उस कोठरी के बाहर से किसी ने ताला लगा दिया है | उसने मुझसे पूछा, "ऐसी स्थिति में फंस जाने पर आप क्या करते ?" मैंने कहा,"मैं वैसा ही करता जैसा सब करते हैं | अर्थात शोर मचाता, कहता- मुझे बचाओ, मुझे बाहर निकालो | ऐन यहाँ फंस गया हूँ |" वह बोली, "नहीं, यह विचार अच्छा नहीं | ऐसे तो कहानी बनेगी नहीं | हमेें तो कहानी बनानी है न, सर | यदि आपने शोर मचाया और कोई तुरंत ही अवतार बन कर प्रकट हो गया तो? हीरो आप हैं, वह आगंतुक नहीं | " तब वह कन्या पुनः विचार करने लगी की कहानी के कथानक के अनुसार, पड़ोस के लोग उस समय कहाँ कहाँ पर मौजूद हों | तब मैंने सोचा कि वह सही थी | मेरे प्रयास पर्याप्त नहीं थे | मैंने कहा,"मैं दरवाजा तोड़ने के प्रयत्न में उस पर तीव्र प्रहार करूँगा | " तब वह प्रसन्न हो गयी,"वाह! यह भी सही है | दरवाजा स्टील का होना चाहिए, ताकि सरलता से टूटे नहीं | अब कहानी जम जायेगी |"

मैंने कहा,"मुझे एक चाभी भी मिल गयी है, परन्तु जब मैंने ताला खोलने का प्रयत्न किया तो वह खुला नहीं |" और इस प्रकार सभी बाधाओं को पार करती हुई कहानी आगे बढ़ गई |

जीवन के क्रमिक विकास कथा भी कुछ इसी प्रकार आगे बढ़ती है | इसमें कुछ ऐसी समस्याएँ होती हैं जिनसे पार पाना असंभव सा प्रतीत होता है | ठीक उसी प्रकार, जैसे किसी अँधेरे तहखाने में कोई व्यक्ति गलती से बंद हो जाये और उसे बाहर आने की राह न सूझे | बहुत सी समस्याएं आती हैं, जीवनी शक्ति अर्थात मनुष्य की जिजीविषा उससे लड़ती है और उनके समाधान प्राप्त करती हैं | प्रत्येक मानव को अपने जीवन में एक कहानी के हीरो की भाँति ही विषम परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए जीवन की लौ को बुझने से बचाने का प्रयास करना होता है | यदि मानव को सब कुछ अनायास ही प्राप्त हो जाए और विशेष उपलब्धियों के लिए भी उसे संघर्ष न करना पड़े, तब उसके जीवन में कोई कार्य ही नहीं रह जायेगा, सिवाय इसके की वह पर्दा गिराए और सो जाए | इसीलिए प्रभु ने मानव मन के भीतर एक असंतुष्टि की भावना उत्पन्न की है, जो उसे सफलता के लिए छटपटाहट बनाये रखने में सहायक है |

जब पृथ्वी पर जीवन का सूत्रपात हुआ तब सबसे पहले प्रथम कोशिका बनी, बिलकुल अकेली कोशिका | इस विराट विश्व में एकमात्र सूक्ष्म कोशिका के लिए निज अस्तित्व की रक्षा करना भी किसी चुनौती से काम न था | और यह संभव हुआ भी | प्रमाण की आवश्यकता नहीं , आज फलता फूलता जीव जगत हमारे समक्ष प्रमाण स्वरुप स्वयं उपस्थित है, मगर उस संघर्ष की कथा आज भी रहस्य ही है | जीवन निरंतरता का नाम है, वह कोशिका भी वहाँ रुकी नहीं | तत्पश्चात ऊतक, अर्थात बने और तब भिन्न भिन्न जीव | जीवनधारा सारी कठिनाइयों हुई अविरल गति से बहती गयी और बहती ही गयी | परन्तु कभी कभी कुछ ऐसे कृत्य भी सामने आये जिन्होंने जीवन की कलात्मकता को कम किया | ऐसा क्यों हुआ, इसके तर्क हम सभ्य मानव आज तक भी नहीं ढूंढ पाते | अतः मानव के लिए यह आवश्यक है कि जीवन-रक्षा के साथ साथ उसकी सहज कलात्मकता को भी बना कर रख सके, साथ ही उनमें बेहतर सामंजस्य भी स्थापित कर सके |

जीवन की दिशा में अग्रसर निर्मित कोशिका, कोशिका समूहों में परिवर्तित हुई, जिनमें कार्यों का वितरण ही उनके वर्गीकरण का आधार था | इनमे परस्पर सहकारिता भी थी व भिन्नता भी, न कि यह एकमात्र कोशिकाओं के ढेर की भाँती था | इसी प्रकार मानव जाति के उद्धभव व विकास की कथा है | पहले मानव जाति का एक सदस्य निर्मित हुआ, तत्पश्चात मानव समूह | क्रमिक विकास के फलस्वरूप उनमें जातीय भेदों का भी आरोपण किया गया ताकि वे खतरे के समय एकजुट हो कर विषमताओं से लड़ सकें व अपनी जाति की अस्मिता व अखण्डता को सलामत रख सकें |

जैसे वृक्ष होता है वह एक ही है मगर उसके भीतर कोशिकाओं व कोशिका-समूहों पारस्परिक सामंजस्य व गतिशीलता उसके बाहरी सौंदर्य व जीवंतता के रूप में दृष्टिगोचर होता है |

यही उसे शक्ति प्रदान करता है व सहिष्णुता की गरिमा भी, जो उसे अनंत सत्ता की ओर होने वाली एक निरंतर तीर्थयात्रा-सा भी आभास देता है | जीवन का पुनरुद्भवन इसका परिणाम है | अतः वह सृजनकारी जीवन शक्ति असाधारण है, वह निरंतर कार्य करती है | वह थक कर बैठ नहीं जाती | वह निरंतर कुछ नए कार्यों में संलग्न रहती है | कुछ नए प्रयोग, जो जीवन को रक्षा देते हैं और यही उस परम सत्ता की साधन सपन्नता का एहसास दिलाते हैं |

hindi@pratilipi.com
+91 8604623871
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.