शाम के वक्त कालबेल लगातार बजते देख गोपा से रहा नहीं गया ।

अरे भई कौन है आ रही हूँ मेरी तो घंटी ही फूक डालोगे क्या ?

अरे भई आ रहे है ।

दरवाजा खोलते ही हरियाणवी जमाई चिरंजीवी अंदर धड़धड़ाते हुए घुसे तो बंगाली सास गोपा स्तब्ध देखती रह गई ।

आईए बैठिए जमाई जी ।

नहीं हमें नहीं बैठना हैं ।अपनी बेटी की तुरंत विदा कर दो लेकिन आप अभी अभी तो आए है कल लेकर चले जाइयेगा । अच्छा बैठिए तो सही ।

गोपा आग्रह करती रही पर जमाई टस से मस न हुए ।

क्या हुआ हमारा सोफा पसंद नहीं किसी और कुर्सी में बैठ जाईए ।

गोपा भागी भागी ऊपर गई दादा जी की नक्कासीदार कुर्सी उठा ले आई ।

चिरंजीवी के खड़े - खड़े पैर दर्द करने लगे तो हार कर बैठ गए।

घर के सभी सदस्य उनकी खिदमत में लग गए ।

नाश्ते में संदेश मिष्टीदोई ओर ढेरों मिठाईयां देखकर मुँह में पानी आने लगा पर खुद को संयत कर मां की बात याद आ गई सुण बेटा तू जाटणी का छोरा सै तनै मेरी सों सै जब तक बंगालन किसै बी चीज के बारे में दस बार नहीं पूछ ले इतनै हाँ मत कर लिए । । चिरंजीवी ने याद आते ही नाईनटी डिग्री कोण दाए बाए मुंडी घुमा दी ।

गोपा ने कई बार कहा फिर क्या सारी मिठाई गोपा ने अपने बैटे से अंदर रसोई में पहुँचा दी ।

चिरंजीवी ताकते रह गये।

अब आई खाना खाने की बारी फिर से मेज पर तरह तरह के पकवान लगा दिये चिरंजीवी से सबने खाने के लिए आग्रह किया लेकिन किसी को बताने में असमर्थ चिरंजीवी ने दिखावे के लिए मना किया तो सब लोगों ने अपनी अपनी प्लेट परोस ली चिरंजीवी की तरफ बंगाली खिचड़ी बढ़ा दी ओर सब भोजन करने में मशगूल हो गये अब चिरंजीवी को ऐहसास हो गया माँ ने जो कसम खिलाई थी भारी पड़ रही थी।

अब तक पेट में चूहे कूदने लगे थे चुपचाप खिचड़ी खा ली । गोपा ने खिचड़ी खाते देख बेटी की तफ देखके मुस्कुराई धीरे से कोमल के कान में कहा जमाई बाबू का पेट खराब है मेरा अनुमान सही था ।

रात हुई चिरंजीवी से पूछा आप कहाँ सोएगे चिरंजीवी ना में सिर हिलाते रहे अंत में गोपा ने कोमल से कहा जाओ ऊपर टिन शेड वाले कमरे में पहुंचा आओ कोमल और भाई जाकर ऊपर कमरे में छोड़ने ले गये ।

चिरंजीवी से पूछा रजाई लेगे या कम्बल चिरंजीवी ने यथावत गर्दन हिला दी ।कोमल बिस्तर पर कम्बल और पानी साईड टेबल पर रख भाई के साथ नीचे जाने को मुड़ी लेकिन चिरंजीवी मुंह से शब्द ही नहीं निकले की तुम तो रुक जाओ अपनी बीवी को जाते देखते रह गए । ये मेरी बीवी भी एक बार रुक कर मेरा हाल तो पूछती भाई के रहते मैं कुछ कह न सका पर उसे तो सोचना चाहिए था।

पलंग पर लेटे तो सर्दी की रात की सिहरन शरीर में महसूस की पैताने रखा कम्बल ओढ़ लिया लेकिन वो नाकाफी लगा सर्दी से दात किट किटाने लगे नीचे जाकर कुछ चाय काफ़ी मांगने की हिम्मत नहीं थी कसम टूट जाती । अब कम्बल में ठंड न रुकी तो बिछावन ओढ़ लिया उससे काम न चला तो गद्दा ओढ़ लिया लेकिन ठंड रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी।

चिरंजीवी ने आपने ऊपर खटिया उलट लीऔर गुडी मुड़ी होकर रात बीतने का इंतजार करने लगे ।

शरीर का तापमान बढ़ने लगा तो हल्की सी बेहोशीसी छाने लगी इतनी भी हिम्मत न बची की किसी को आवाज दे पाते ।

सुबह हुई तो कोमल का भाई ऊपर जीजाजी को चाय के लिए बुलाने गया तो देखा जीजाजी नहीं है ।

खाट उल्टी पड़ी थी आसपास देखा कहीं नजर नहीं आए अचानक गद्दे की गठरी हिली हाथ बढ़ा कर उसने गद्दा हटाया देखा तेज बुखार से तप रहे थे ।अपनी बहन और पापा मम्मी को आवाज दी सभी लोग तुरंत ऊपर आए देखा जमाई एक सौ छः डिगरी की गठरी बने हुए थे । उन्हें कम्बल में लपेटकर जल्दी से अस्पताल पहुंचाया गया ।

अस्पताल में होश आने के बाद सबने उनके इस अटपटे व्यवहार के बारे में पूछा तो घर से चलते समय माँ ने जो कसम दी थी उसके बारे में बताया तो सब के मुंँह से हंँसी निकल गई अब माँ ने ऐसा भी नहीं कहा था पुत्र होतो तो ऐसा जान पे बन आई पर कसम न तोड़ी .....

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