अविज्ञापित

रमेश उपाध्याय

अविज्ञापित
(37)
पाठक संख्या − 8436
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रमेश कुमार
quite absorbing and interesting,
राजेश रस्तोगी
थोडा़ लीक से हटकर एक अच्छी कहानी
Rewadhar Bahuguna
बहुत सुन्दर रचना है। कहानी में एकलयता है। कहानी शुरू से अंत तक पाठक को बांधे रखती है । कहानी का अचानक अंत और उसमें स्टेला का पार्टनर की तरह उभरना पाठक को एक हल्का सा झटका देता है।
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Manish yadav
रचना में सबसे उत्तम लगा अलका का एक बार फ़िर से आगे निकलना,और कहानी में एक लय का होना ! अति सुन्दर...
राजा सिंह
Avastvik aur nayika ko bhagwan bana dene ki kahani.kahani ka end kislay ki maut ke baad us par ayi bekari aur tootan se ho jana chahiye aur nayika ki atmahatya se karana chahihiye tha .Nayika phit safalta kaise prapt karati hai ,yah kahidikhai nahi padata.Ek dukhad ant ko jabardasti sukhad kiya gaya hai. Kahani ko first prize, lekhak bad,prashidhya, aur mahan sahtyakat hai, isliye diya gaya hai .
Manisha Jha
बहुत ही रोचक और ताज़गी से भरी कहानी है। आपकी सभी रचनाओं की तरह जबरदस्त। आधुनिक दौर की समस्याओं का सामना करती हुई आमफ़हम लड़की का जुझारूपन दीखता है। जो उसमे कुछ पल के लिए शिथिलता तो लाता है पर वह फिर परिस्थितियों पर काबू पा लेती है।अपनी स्वतंत्रता बनाये रखती है।
Gunjan Ladia
Swatantr rehne ka faisla krna or apne maya pita ke samksh prastutt krna se hi istrio ki azaadi ki shuruaat h desh to 1947 main hua tha azaad istrio kz azad hona baaki h jiski shuruaat aiso alka jesi istriyaan hi krengi
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