छलना

राजा सिंह

छलना
(40)
पाठक संख्या − 25131
पढ़िए
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बहुत ही बढ़िया
sachindeo
kuch auraten apna kaam nikaalne me sabko ullu banaati hain....
ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा
यह कहानी कथ्य में बहुत सुन्दर है। घटनाओं का सहज वर्णन है। एक वयस्क विधवा को समाज में अपने काम के लिए कितना भटकना पड़ता है, कितनी बदनामियों से होकर गुजरना पड़ता है, इस उद्देश्य में अगर कथ्य को पुनर्भाषित किया जाता तो कहानी अपने उद्देश्य में सफल मानी जाती। परंतु ऐसा होता हुआ दीखता नहीं। कहानी कुछ लंबी खींच गयी है।
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