कहाँ बसा है वो संसार

ऋचा तिवारी

कहाँ बसा है वो संसार
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सारांश

ये कविता हर किसी के मन में बसने वाले उस संसार की है जहाँ सब अपने मन के अनुसार होता है,इस कविता में जिस संसार के बारे में कल्पना की गयी है वो वास्तविकता के सुन्दर संसार जैसा ही है आवश्यकता है बस इस वास्तविक संसार में कुछ बदलावों की जो हम सब के ही हाथ में है.
Artharv Singh
Beautiful imagination
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