छलावा

रीत शर्मा

छलावा
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सारांश

सर्दी की गुमसुम सुनसान रात और बारिश रुक रुक कर हो रही थी सड़क पर दूर दूर तक कोह्र्रे की चादर थी चारो तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था ऐसी अँधेरी रात मैं वरुण अकेले ही निकल पड़ा था आज उसके पक्के दोस्त पंकज का जन्मदिन था और उसने सभी दोस्तों को अपने फार्महाउस पर पार्टी दी थी वह शराब और शाबाब का पूरा इन्तजार था वरुण का प्रोग्राम अगले दिन सुबह निकलने का था पर 
Rohit Gupta
kya bat hai aisa hi hona chahiye
Anuradha Rai
निराधार
Finding Kashfur
एक अच्छा संदेश है कहानी में।
दिनेश लोंगरे
कहानी ने खिंच के रखा
Lavkush Mishra
कहानी अच्छी है लेकिन डरावनी नहीं।
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