सारांश

सर्दी की गुमसुम सुनसान रात और बारिश रुक रुक कर हो रही थी सड़क पर दूर दूर तक कोह्र्रे की चादर थी चारो तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था ऐसी अँधेरी रात मैं वरुण अकेले ही निकल पड़ा था आज उसके पक्के दोस्त पंकज का जन्मदिन था और उसने सभी दोस्तों को अपने फार्महाउस पर पार्टी दी थी वह शराब और शाबाब का पूरा इन्तजार था वरुण का प्रोग्राम अगले दिन सुबह निकलने का था पर 
Krish
nice collection
Vikas
उत्कृष्ट प्रसंग।।।
jyoti
हिंदी की कहानी में अंग्रेजी के शब्दों की इतनी भरमार थोड़ी चुभी
नवीन
छलावा ,सुन्दर है
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