प्रभु दयाल मंढइया
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परिचय  

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सारांश:

एम . ए . पी . अच्. डी .; डी लिट् , सेवा निवृत बैंक प्रबंधक ,साहित्य लेखन में रूचि . कुछ पुस्तकें प्रकाशित . गोदान के बाद(१९९४) , ( १९३६ से १९४८ तक सव. मुन्शी प्रेमचंद के उपन्यास गोदान का विस्तार )तथा पूर्ण मंगल सूत्र का प्रकाशन शीघ्र संभावित ,देश के विभिन्न पत्रों / पत्रिकाओं मैं कहानी ,लघुकथा ,कविता,नाटक आदि का प्रकाशन तथा ,आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर प्रशारण .


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