सारांश

ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जो बचपन से ही अंतर्मुखी स्वभाव की रहती है और इसके पीछे छुपा होता है एक गहरा राज और इसलिए वो पुरुषों से भी दूर भागती है और बड़े होने के बाद भी वो इससे बाहर नही निकल पाती जब तक उसे एक अच्छे और उससे बहुत अधिक प्रेम करने वाले लड़के से मुलाकात नही होती। गौर करने वाली बातें ये है की लड़की के माता पिता भी उसे कभी समझ नही पाते न समझने की कोशिश करते हैं।
उत्तम
बहुत ही सुंदर प्रस्तुति।
आलोक
बेहतर प्रयास 👌👌 ऐसे ही लिखते रहिये पल्लवी जी 😊
Sandip
तुमने समाज के बहुत बड़े पहलु को इस कहानी के मार्फ़त छूना चाहा हैं. चाइल्ड एबूसिंग ये अपने समाज का एक ऐसा रूप हैं जो कभी सामने आता ही नहीं. परन्तु ये केंसर जैसा हमारे समाज मे फैला हुआ हैं. जरुरत हैं अब लडकिया खुल कर इस मुद्दे पर बोले.. फैमिली कांसेलिंग और जानकारी भी बच्चो को जरुरी हैं. न जाने कितने लड़कियों की प्रतिभा बस इस कारण बर्बाद हो जाती होगी.
Shashi
So nice. ..
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अरुण
एक अच्छा प्रयास,,लेकिन आप थोडा सा और प्रयास करती तो इस विषय पर और अच्छी कहानी बन सकती थी।
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ब्रजेंद्रनाथ
यह अगर प्रतियोगिता के लिए चयनित कहानी है, तो मैं सिर्फ इतना ही जहन चाहूंगा कि प्रदत्त विषय, जिसमें पुरुषों के अंतर्द्वंद्व के बारे में अधिक दर्शना था, यहां एक स्त्री के अंतर्मुख होने के कारणों को अधिक दिखाया गया है। प्रतिलिपि टीम को इसपर विचार करना चाहिए।
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शशांक
प्रयास रत रहें, बेहतर लिख सकती हैं
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Rita
bahut achhi kahani.keep it up
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