सिर्फ़ काली लड़कियां

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सिर्फ़ काली लड़कियां
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Neeraj Jaiswal
a great story , u have ever read
Vinay Sinha
काला रंग वो भी एक स्त्री के लिए वैसे भी इस बाहरी सुँदरता प्रधान समाज में अभिशाप से कुछ कम नहीं और बाहरी लोगोँ से मिलते तिरस्कार से वो बेचारी निपट भी लेती पर अपने सगे मां बाप से रोज ही मिलते तिरस्कार से वो बेचारी मनोरूप से रोज ही टूट रही थी मर रही थी।भावनाएं कोमल होती हैं वो रँग नहीं देखती वो तो केवल प्रेम और तिरस्कार पहचानती हैं । वैसे भाई आपने मानवीय संवेदनाओं और भावों को काफी अच्छे से उकेरा है , हमारी ओर से शुभकामनायेँ।
mayank sam
अतिसुन्दर चित्रण
viplavi
very heart touching story
Anita Pandita
मर्मस्पर्शी रचना
m yadav
schayi likhi hai aapne bahut achha likha hai
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