रिक्शा वाले अंकल

નિજા

रिक्शा वाले अंकल
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Rajni
parents ko bacho ke badalte behavior par nazar rakhni chayia. unse puchte rehna chayia ki wo kisi problem mai toh nhi..
Imran
this story like some truth
Deepàk
very well written
Puneet
story bahut acchi he or ye reality bhii he ...aajkal baccho pe unke maa baap dhyan nhi dete he or esi cheeje baccho ko jhelni padti he
Aradhya
aaj ke bache ab chup nahin baithtey
Vishwa Mitra
उपसंहार की कमी खली,साथ ही कहानी का औचित्य भी पाठकों को स्पष्ठ नही हुआ,हां पुलिस का फोन लगाना,और वाहन यमुना किनारे ब्रिज पर लगाना रोचक था लग रहा था वो कूद गयी ।
ब्रजेंद्रनाथ
सच्चाई के काफी करीब है या कहानी। इसमें कहानी के और तत्त्व डाले जाने चाहिए: जैसे: पूजा की मनोभाव यात्रा, प्रकृति के बदरंगों से उसके जीवन की तुलना और तब उसका आत्महत्या में शांति ढूढने का निर्णय। इसमें एक शोषित बच्चे के द्वंद्व को दिखाने के अवसर थे, जिसपर दृष्टि डालकर रचनाकार को कहानी के और भी कोण को दिखाया जाना चाहिए था।
Pritam
This story is the mirror of our society where we alive.
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