सारांश

क्यों तुम मेरे जज़्बातों को रेत के घरौंदों सा बिखेर जाते हो ।
swaraj
सरल रचना है. लय ठीक है. परंतु पद्द बहुत छोटा है. कुछ निष्कषॆ निकल कर नहीं आया.
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