मनीषा गुप्ता
प्रकाशित साहित्य
34
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7,214
पसंद संख्या
1,460

परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

स्थान:     ऋषिकेश

सारांश:

" जिंदगी अनेक रसों का एक ऐसा संगम है जिसमे एक भी रस की कमी उसे नीरस कर देती है । सही मायने में लेखन कला तभी परिपूर्ण होती है जब उसमे श्रोताओं के सभी भावो की अभिव्यक्ति हो । लेखक के एक एक शब्द सभी की रूह में उतर कर उन्हें अपने भावों से प्रतीत हो। " शिक्षा - हिंदी स्नातकोत्तर कृतियां - बरसात की एक शाम नाट्य विधा - औरत दास्ताँ दर्द की नाट्य विधा - जिंदगी कैसी है पहेली अनेक पत्र पत्रिका में कहानियां , लेख , और कविताएं


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