थोड़ा-सा प्रगतिशील

ममता कालिया

थोड़ा-सा प्रगतिशील
(8)
पाठक संख्या − 2610
पढ़िए
लाइब्रेरी में जोड़े
Manju
really nice story....
Juhi
itni achchi rachna or adhuri......ye to pathak k sath anyae hy
Shailendra
आज के हमारे जीवन की परछाई; तर्क एवं विषलेशण का आश्यर्जनक संगम...परन्तु समाधान शेष
शशांक
लगता है,चेतना जी ने ही लिखी है कहानी और विनीत जी ने पूरी नही करने दी।
शिवानी
सच्चाई के बहुत करीब। पर उत्सुकता रह गयी कि आगे क्या हुआ होगा?
आकांक्षा
कहानी अच्छी है , लेकिन कुछ अधुरी सी है
रिप्लाय
hindi@pratilipi.com
+91 8604623871
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.